मुख्यमंत्री पर कांग्रेस आलाकमान का फैसला मुझे मंजूर होगा: हुड्डा
हक हक अविनाश नरेश
- 27 Sep 2024, 06:34 PM
- Updated: 06:34 PM
(अनवारुल हक)
रोहतक, 27 सितंबर (भाषा) हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिलने की शुक्रवार को उम्मीद जताई और कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी आलाकमान का जो भी फैसला होगा, वह उन्हें मंजूर होगा।
हुड्डा ने रोहतक में अपने आवास पर ‘पीटीआई-भाषा’’ को दिये साक्षात्कार में कहा कि पार्टी में कोई अंदरूनी कलह नहीं है और मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार होने से कांग्रेस को मजबूती ही मिलेगी।
कांग्रेस के 77 वर्षीय वरिष्ठ नेता ने उनके पुत्र एवं सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप देखे जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वह खुद न तो ‘टायर्ड’ हैं और न ही ‘रिटायर्ड’ हैं।
अपनी पारंपरिक विधानसभा सीट गढ़ी सांपला-किलोई से पुन: मैदान में उतरे हुड्डा ने दावा किया कि हरियाणा में ‘‘अबकी बार, कांग्रेस की सरकार’’ का माहौल बन गया है तथा उनकी पार्टी को प्रचंड बहुमत मिलेगा।
कांग्रेस के कद्दावर नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा मार्च 2005 से अक्टूबर 2014 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने हरियाणा के दिग्गज जाट नेता और पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल को लगातार तीन लोकसभा चुनाव 1991, 1996 और 1998 में शिकस्त दी थी।
कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा की कथित नाराजगी से जुड़े प्रकरण के बारे में पूछे जाने पर हुड्डा ने कहा, ‘‘यह आप लोगों (मीडिया) द्वारा पैदा किया हुआ है, यह कोई प्रकरण नहीं है। कांग्रेस एकजुट है।’’
इस सवाल पर कि क्या अब सब कुछ ठीक है तो हुड्डा
ने कहा, "पहले भी सब कुछ ठीक था और आज भी है।’’
सैनिक स्कूल से पढ़े और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित विधि संकाय से कानून की डिग्री हासिल करने वाले हुड्डा ने युवक कांग्रेस से अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की थी।
मुख्यमंत्री पद की दावेदारी से जुड़े सवाल पर हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री चयन की एक स्थापित प्रक्रिया है और पार्टी आलाकमान जो भी फैसला करेगा, उन्हें मंजूर होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस की एक पद्धति है। विधायक चुने जाएंगे। पर्यवेक्षक आएंगे, विधायकों का मत लेंगे और फिर आलाकमान फैसला करेगा। वे (आलाकमान) जो भी फैसला करेंगे, मुझे स्वीकार होगा।’’
इससे एक दिन पहले सैलजा ने भी कहा था कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस आलाकमान का फैसला उन्हें स्वीकार होगा।
हुड्डा ने सैलजा और रणदीप सुरजेवाला की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘अच्छी बात है। यदि इच्छा ही नहीं रखेंगे तो राजनीति शिथिल पड़ जाएगी। जितने ज्यादा दावेदार होंगे, (कांग्रेस को) उतनी ही अधिक मजबूती मिलेगी।"
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ने दीपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में देखे जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा, "क्यों, आप मुझे रिटायर करना चाहते हैं? मैं पहले ही कह चुका हूं कि मैं न तो टायर्ड हूं, न रिटायर्ड हूं।"
हुड्डा ने इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) तथा जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आजाद समाज पार्टी के गठबंधन को लेकर कहा कि जनता ‘‘वोट कटवा’’ को वोट नहीं देंगी क्योंकि भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा की चुनौती के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘लोकसभा का चुनाव और विधानसभा का चुनाव अलग होता है। 2019 के चुनाव में भाजपा 79 पर आगे थे, कांग्रेस 10 सीटों पर आगे थी, एक पर जजपा को बढ़त मिली थी। इसके कुछ महीने बाद हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा 40 सीटों पर पहुंच गई और कांग्रेस 10 से 31 पर पहुंच गई। इस लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर घटा है और कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ा है।’’
हुड्डा का कहना था, ‘‘पिछली बार के लोकसभा चुनाव में हमारा वोट प्रतिशत 28 था जो इस बार बढ़कर 48 प्रतिशत हुआ है। भाजपा का वोट प्रतिशत 12 प्रतिशत घटा है। इससे स्थिति के बारे में साफ संकेत मिलता है।’’
उन्होंने कांग्रेस पर ‘दलित विरोधी’ होने के भाजपा के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि हरियाणा में सत्तारूढ़ पार्टी ने आरक्षण खत्म करने की नीति अपनाई है।
हुड्डा ने कहा, ‘‘दलित को आरक्षण संविधान ने दिया है। मुझे इस बात का गर्व है कि बाबासाहेब आंबेडकर के साथ संविधान पर मेरे पिता (चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा) के हस्ताक्षर थे। कोई कितनी ताकत लगा दे, हम संविधान बदलने नहीं देंगे।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ भाजपा ने धोखा दिया है, आरक्षण खत्म करने की नीति बनाई है। हरियाणा में कौशल रोजगार निगम है। उसमें न पक्की नौकरी है, न तो मेरिट है और न आरक्षण है। आरक्षण नहीं देना पड़े, उसका इन्होंने नया तरीका ढूंढ लिया। ओबीसी और एससी वर्गों के बच्चों की उम्र चली गई, वो कहां जायेंगे। हरियाणा में भाजपा आरक्षण विरोधी है। प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि इस चुनाव में कांग्रेस ने जनता से जो वादे किए हैं, उन्हें सरकार बनने के बाद पूरा करेगी।
1967 में बना किलोई विधानसभा क्षेत्र 2009 में हुए परिसीमन के बाद गढ़ी सांपला किलोई विधानसभा क्षेत्र में बदल गया। परिसीमन के बाद हसनगढ़ विधानसभा सीट को किलोई सीट में मिला दिया गया था। इस सीट पर अभी तक तीन बार 2009, 2014 और 2019 में चुनाव हो चुके हैं। तीनों ही बार भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की है।
हरियाणा में 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए पांच अक्टूबर को मतदान होगा जबकि नतीजे आठ अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
भाषा हक हक अविनाश