झारखंड : सरकार की मुफ्त कोचिंग की योजना आदिवासी विद्यार्थियों के सपनों को पंख देगी
जितेंद्र नरेश
- 27 Sep 2024, 04:39 PM
- Updated: 04:39 PM
रांची, 27 सितंबर (भाषा) रांची के तमार ब्लॉक में रहने वाले एक आदिवासी किसान के बेटे संदीप उरांव का सपना झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा उत्तीर्ण कर एक अधिकारी बनना है।
हालांकि संदीप के घर की वित्तीय स्थिति उसके सपनों के लिए एक बड़ी बाधा बन रही थी क्योंकि उसका परिवार निजी कोचिंग केंद्रों की महंगी फीस नहीं दे सकता था।
लेकिन झारखंड सरकार की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग मुहैया कराने की पहल संदीप के लिए वरदान साबित हुई।
संदीप ने कहा, “सरकार की योजना ने मुझे जेपीएससी की मेरी तैयारी शुरू करने में मदद की और मुझे उम्मीद है कि मैं सफलता प्राप्त कर पाऊंगा।”
संदीप ही अकेले नहीं हैं, जो सरकारी नौकरी की चाह रखते हैं बल्कि अब गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले कई आदिवासी छात्र सरकारी नौकरियों की आकांक्षा रखते हैं।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2023 में विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह के अभ्यर्थियों के लिए एक योजना शुरू की। इस योजना के तहत डॉ. राम दयाल मुंडा आदिवासी कल्याण अनुसंधान संस्थान में मुफ्त कोचिंग की पेशकश की गई।
इस वर्ष, कार्यक्रम का विस्तार करके सभी 32 जनजातियों के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री सोरेन ने जोर देते हुए कहा था, “इस पहल का उद्देश्य आदिवासी विद्यार्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।”
राज्य भर के 21 से 40 वर्ष की आयु के छात्र विश्वस्तरीय शिक्षकों तक पहुंच के साथ इस कोचिंग का लाभ उठा सकते हैं।
असुर, माल पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया और बिरहोर सहित विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह में शामिल आठ समुदायों के 400 से अधिक विद्यार्थियों ने 2023 में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग के लिए आवेदन किया, जिसमें से 156 अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से चुना गया।
रांची के जनजातीय अनुसंधान संस्थान (टीआरआई) के संकाय सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया, “इस पहल से राज्य की नौकरशाही में आदिवासी विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ेगी। अगर ये विद्यार्थी सफल होते हैं, तो नीति-निर्माण में उनकी आवाज शामिल होगी, जिससे राज्य को लाभ होगा।”
पिठोरिया से जेपीएससी अभ्यर्थी प्रतिमा कुमारी ने वित्तीय सहायता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “पढ़ाई में पैसा एक बड़ी बाधा हो सकती है। मेरी मुफ्त कोचिंग बहुत मददगार रही। मैंने 13वीं जेपीएससी मेन्स की परीक्षा भी लिखी।”
राज्य सरकार ने कोचिंग के लिए वार्षिक बजट भी 2023 में 60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2024 में एक करोड़ रुपये कर दिया है।
भाषा जितेंद्र