कर्नाटक सरकार ने राज्य में जांच के लिए सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ली
नेत्रपाल माधव
- 26 Sep 2024, 08:22 PM
- Updated: 08:22 PM
बेंगलुरु, 26 सितंबर (भाषा) भूखंड आवंटन विवाद के बीच कर्नाटक सरकार ने राज्य में मामलों की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को दी गई सामान्य सहमति बृहस्पतिवार को वापस ले ली। इसने आरोप लगाया कि एजेंसी ‘‘पक्षपातपूर्ण’’ ढंग से काम कर रही थी।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद फैसले की घोषणा करते हुए कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच के पाटिल ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि सीबीआई या केंद्र सरकार अपने साधनों का उपयोग करते समय उनका विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग नहीं कर रही है।’’
यह कदम विपक्षी भाजपा द्वारा मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूखंड आवंटन मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग के बीच उठाया गया है।
पाटिल ने इन आरोपों को खारिज किया कि राज्य में काम करने के लिए सीबीआई की अनुमति को रद्द करने और एमयूडीए द्वारा सिद्धरमैया की पत्नी को 14 भूखंडों के आवंटन में अवैधताओं के आरोपों के बीच कोई संबंध है।
उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 के तहत कर्नाटक राज्य में आपराधिक मामलों की जांच के लिए सीबीआई को सामान्य सहमति देने वाली अधिसूचना वापस ले ली गई है।’’
दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम, 1946 की धारा 6 के अनुसार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में जांच करने के लिए संबंधित सरकारों से सहमति की आवश्यकता होती है।
पाटिल ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि यह स्पष्ट है कि सीबीआई या केंद्र सरकार अपने साधनों का उपयोग करते समय उनका विवेकपूर्ण उपयोग नहीं कर रही थी। इसलिए, मामले-दर-मामले हम सत्यापन करेंगे और (सीबीआई जांच के लिए सहमति) देंगे। सामान्य सहमति वापस ले ली गई है।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या यह मुख्यमंत्री को ‘‘बचाने’’ के लिए किया जा रहा है, जो मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) प्लॉट आवंटन मामले में जांच का सामना कर रहे हैं, पाटिल ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री पर लोकायुक्त जांच के लिए अदालत का आदेश है, इसलिए ऐसा प्रश्न ही नहीं उठता।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘दिन-प्रतिदिन’’ यह चिंता व्यक्त की जा रही है कि कई मामलों में सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है।
पाटिल ने कहा कि यहां तक कि जो मामले राज्य सरकार ने सीबीआई को दिए थे या एजेंसी ने अपने हाथ में लिए थे, उनमें से कई में आरोपपत्र दाखिल नहीं किए गए। उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने (सीबीआई ने) आरोपपत्र दायर करने से इनकार कर दिया, उन्होंने कई खनन मामलों की जांच करने से इनकार कर दिया।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार ने ऐसा भाजपा द्वारा कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम कोष में हेराफेरी मामले की सीबीआई जांच की मांग को ध्यान में रखते हुए किया है, मंत्री ने कहा, ‘‘इसका इससे कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि मामला अदालत में है।’’
यह दोहराते हुए कि वह इस्तीफा नहीं देंगे, सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को फिर से एमयूडीए द्वारा अपनी पत्नी को 14 भूखंड आवंटित किए जाने में किसी भी गलत चीज से इनकार किया और अपने खिलाफ आरोपों को ‘‘भाजपा की साजिश’’ करार दिया।
सिद्धरमैया ने यह भी कहा कि वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
भाषा नेत्रपाल