बस मार्शलों की बर्खास्तगी पर ‘आप’ और भाजपा में टकराव
नोमान माधव
- 26 Sep 2024, 05:28 PM
- Updated: 05:28 PM
नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) दिल्ली विधानसभा में दो दिवसीय सत्र के पहले दिन सत्तारूढ़ ‘आप’ और विपक्ष के बीच लगभग 10,000 बस मार्शलों की बर्खास्तगी के मुद्दे पर जोरदार बहस हुई, जिसके बाद दोनों पक्षों ने उनकी नौकरी बहाल करने के लिए प्रस्ताव का समर्थन किया।
सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने उपराज्यपाल (एलजी) वी के सक्सेना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और उन्हें बस मार्शलों की नौकरी जाने और वेतन न मिलने के कारण उनकी दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया।
मदन लाल और जरनैल सिंह समेत ‘आप’ विधायकों ने भाजपा के एक विधायक पर बस मार्शलों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द कहने और उन्हें “बलात्कारी’ बताने का आरोप लगाया। भाजपा विधायकों ने आरोप का विरोध किया और ‘आप’ पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का दावा किया।
विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि ‘आप’ सरकार ने बस मार्शलों के साथ विश्वासघात किया है।
गुप्ता ने यह भी प्रस्ताव रखा कि बस मार्शलों की नौकरी बहाल करने तथा उन्हें “स्थायी” रोजगार प्रदान करने के लिए सदन में एक प्रस्ताव पारित किया जाए।
चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 10,000 बस मार्शलों का जीवन बर्बाद हो गया है क्योंकि उन्हें वेतन नहीं दिया गया है। मंत्री ने कहा कि वे अपनी बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब से सक्सेना ने उपराज्यपाल का पद संभाला है, यह एक “पैटर्न” बन गया है कि अधिकारी किसी भी योजना में कोई न कोई खामी ढूंढते हैं ताकि उसे रोका जा सके।
भारद्वाज ने दावा किया, “जनवरी 2023 में 10,000 बस मार्शलों का वेतन रोक दिया गया था । परिवहन विभाग के अधिकारियों ने नागरिक सुरक्षा बस मार्शलों की तैनाती पर सवाल उठाया था, क्योंकि सार्वजनिक परिवहन बसों में सुरक्षा के उद्देश्य से सीसीटीवी कैमरे लगे थे।”
उन्होंने कहा कि अधिकारियों की इस टिप्पणी का परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत और राजस्व मंत्री आतिशी ने विरोध किया। आतिशी अब मुख्यमंत्री बन गई हैं।
भारद्वाज ने कहा, “यदि भाजपा तैयार हैं तो हम उनकी नौकरियां बहाल करने के लिए तैयार हैं। सदन में एक प्रस्ताव पारित किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर 29 फरवरी को पहले ही पारित प्रस्ताव को फिर से पारित किया जा सकता है।
भारद्वाज ने यह भी सुझाव दिया कि प्रस्ताव में एक पैराग्राफ यह होना चाहिए कि ‘आप’ और भाजपा के विधायक तीन अक्टूबर (नवरात्रि के पहले दिन) को सुबह 11 बजे उपराज्यपाल से मिलने जाएंगे और प्रस्ताव का कार्यान्वयन सुनिश्चित होने तक वापस नहीं आएंगे।
विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा और इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। हालांकि, गोयल ने कहा कि विपक्ष के नेता इस प्रस्ताव को लागू करवाने के लिए एलजी के कार्यालय जाने पर सहमत नहीं हैं।
भाषा
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