जम्मू-कश्मीर विस चुनाव : विदेशी प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करने पर उमर ने सरकार की आलोचना की
सुरभि मनीषा
- 25 Sep 2024, 02:14 PM
- Updated: 02:14 PM
(फोटो के साथ)
श्रीनगर, 25 सितंबर (भाषा) नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में जारी विधानसभा चुनाव को देखने के लिए विदेशी प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित करने के केंद्र के कदम की बुधवार को आलोचना करते हुए कहा कि ‘‘चुनाव भारत का अंदरूनी मामला है तथा हमें उनके प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है’’।
अब्दुल्ला ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि विदेशियों को यहां चुनाव की जांच करने के लिए क्यों कहा जाना चाहिए?’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब दूसरे देशों की सरकारें इस पर टिप्पणी करती हैं तो भारत सरकार कहती है कि ‘यह भारत का अंदरूनी मामला है’ और अब अचानक वे चाहते हैं कि विदेशी पर्यवेक्षक यहां आएं और हमारे चुनावों को देखें।’’
उन्होंने कहा कि यह ‘‘निर्देशित यात्रा’’ (गाइडेड टूर) अच्छी बात नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र इन चुनावों में लोगों की भागीदारी का श्रेय लेना चाहता है ‘‘जो यहां के लोगों के साथ विश्वासघात है’’।
विधानसभा चुनाव के लिए जम्मू-कश्मीर के छह जिलों में 26 सीट पर बुधवार को मतदान हो रहा है। मौजूदा चुनाव को देखने के बारे में विदेश मंत्रालय के निमंत्रण पर नयी दिल्ली स्थित दूतावासों से 16 राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को यहां पहुंचा।
अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव ‘‘हमारे लिए आंतरिक मामला है’’ और ‘‘हमें उनके प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है’’।
उमर ने कहा, ‘‘यह भागीदारी (मतदान में लोगों की) भारत सरकार की वजह से नहीं है बल्कि उसके द्वारा किए गए सभी कामों के बावजूद है। उन्होंने लोगों को अपमानित किया है, उन्होंने लोगों को हिरासत में लेने और परेशान करने के लिए सरकार की सभी मशीनरी का इस्तेमाल किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसके बावजूद लोग अपने घरों से निकल रहे हैं और चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं। इसलिए यह ऐसी बात नहीं है जिस पर भारत सरकार को जोर देना चाहिए। लेकिन फिर भी, वे ऐसा कर रहे हैं।’’
अब्दुल्ला ने यहां अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के बाद पत्रकारों से कहा कि अगर भारत जम्मू-कश्मीर पर दूसरे देशों से दखल या टिप्पणी नहीं चाहता है तो फिर ‘‘उन्हें यहां क्यों बुलाया गया?’’
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में भागीदारी के लिए जम्मू-कश्मीर के लोगों को श्रेय दिया जाना चाहिए, ‘‘लेकिन भारत सरकार चाहती है कि सारा श्रेय उसे मिल जाए, जो यहां के लोगों के साथ विश्वासघात होगा’’।
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के लोग चुनाव के लिए मतदान इसलिए नहीं कर रहे हैं क्योंकि वे भारत सरकार से खुश हैं। भारत सरकार के उन सारे प्रयासों के बावजूद वे चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं..., वरना तो उन्होंने पिछले छह-सात वर्ष में लोगों के जीवन को कठिन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।’’
नेकां नेता ने पूछा कि अगर दूसरे देशों के राजनयिकों को आमंत्रित किया जा सकता है तो विदेशी पत्रकारों को अनुमति क्यों नहीं दी गई।
उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव कवर करने की अनुमति के लिए आवेदन करने वाले किसी भी विदेशी पत्रकार को इसकी अनुमति नहीं दी गई। लेकिन इन राजनयिकों को पर्यटकों की तरह निर्देशित यात्रा (गाइडेड टूर) कराई गई, जो कि अच्छी बात नहीं है।’’
जम्मू-कश्मीर में 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद पहली बार चुनाव हो रहे हैं। कुल 10 साल के अंतराल पर यह विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।
नेकां उपाध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने चुनाव के लिए 10 साल इंतजार किया और ‘‘पहले चरण के अच्छे परिणाम के बाद दूसरे चरण में भी अच्छे मतदान की उम्मीद है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चाहे कोई भी पार्टी हो, राजनीतिक रैलियों में जोश उत्साहजनक रहा है। अब हमें उम्मीद है कि यह उत्साह मतदाताओं की संख्या में भी दिखेगा।’’
उनसे पूछा गया कि दूसरा चरण उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है क्योंकि वह गांदेरबल और बडगाम की दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। इस पर अब्दुल्ला ने कहा कि चुनाव के सभी दिन महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे बारे में नहीं है, यह पूरी पार्टी के बारे में है। पहला चरण उतना ही महत्वपूर्ण था, तीसरा चरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। हां, इसमें मेरी व्यक्तिगत भागीदारी है, लेकिन पार्टी के लिए तीनों चरण महत्वपूर्ण हैं।’’
पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘उम्मीद पे दुनिया कायम है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं काफी आशावादी व्यक्ति हूं। बाकी सब पहले तो ईश्वर के हाथ में है और फिर मतदाताओं के हाथ में है। तो देखते हैं।’’
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती द्वारा गांदेरबल और बडगाम में फर्जी मतदान के आरोप लगाए जाने के बारे में अब्दुल्ला ने कहा कि पीडीपी ने दीवार पर लिखी इबारत समझ ली है। उन्होंने कहा, ‘‘कृपया (पीडीपी के आरोपों की) जांच करें। अगर उनके उम्मीदवार वह प्रभाव नहीं डाल पाए जिसकी उन्हें उम्मीद थी तो मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता। यह मेरी गलती नहीं है कि लोगों ने मेरे पक्ष में चुनाव प्रचार से खुद को अलग कर लिया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बडगाम में ‘अपनी पार्टी’ का समर्थन पाकर पीडीपी बहुत खुश थी, लेकिन मुंतजिर मोहिउद्दीन ने पार्टी के खिलाफ जाकर मुझे समर्थन देने की घोषणा कर दी। उसके बाद पीडीपी परेशान हो गई और हम पर एवं अपनी पार्टी पर हमला करना शुरू कर दिया। पीडीपी को साफ पता चल गया है कि क्या होने वाला है। बडगाम और गांदेरबल को भूल जाइए, वे बिजबहेड़ा में भी जीत जाएंगे तो वे भाग्यशाली होंगे। इसलिए मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता।’’
मोहिउद्दीन ने अपनी पार्टी के समर्थन से बडगाम से नामांकन दाखिल किया था लेकिन उन्होंने चुनाव से नाम वापस ले लिया और अब्दुल्ला को समर्थन देने की घोषणा की।
बिजबहेड़ा वह सीट है जहां से महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती मैदान में हैं। इस सीट पर 18 सितंबर को पहले चरण के मतदान हुए थे।
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बुधवार को जम्मू-कश्मीर दौरे पर नेकां उपाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस को जम्मू पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘यह अच्छी बात है। मुझे उम्मीद है कि राहुल कश्मीर में एक या दो सीटों पर प्रचार करने के बाद जम्मू पर ध्यान केंद्रित करेंगे। कांग्रेस कश्मीर में क्या करती है, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन कांग्रेस जम्मू में क्या करती है यह महत्वपूर्ण है।’’
अब्दुल्ला ने कहा कि दुर्भाग्य से कांग्रेस ने जम्मू के मैदानी इलाकों में उतना काम नहीं किया है, जितना नेशनल कांफ्रेंस को उनसे उम्मीद थी। नेकां कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन में है।
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू में गठबंधन ने जो सीटें दीं, उनमें से अधिकांश कांग्रेस पार्टी को मिलीं। फिर भी जम्मू में कांग्रेस का अभियान अभी शुरू होना बाकी है। अब प्रचार के लिए केवल पांच दिन बचे हैं। इसलिए मुझे उम्मीद है कि राहुल के घाटी में इस एक सीट पर प्रचार करने के बाद कांग्रेस अपना पूरा ध्यान जम्मू के मैदानी इलाकों पर केंद्रित करेगी।’’
भाषा सुरभि