केरल उच्च न्यायालय ने बलात्कार मामले में अभिनेता सिद्दीकी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
अमित अविनाश
- 24 Sep 2024, 10:11 PM
- Updated: 10:11 PM
कोच्चि, 24 सितंबर (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने बलात्कार के एक मामले में मलयालम फिल्म अभिनेता सिद्दीकी की अग्रिम जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि सिद्दीकी पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अपराध की उचित जांच के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ अपरिहार्य है।
केरल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायक और अभिनेता एम. मुकेश को एक महिला अभिनेत्री की शिकायत पर दर्ज बलात्कार के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।
मुकेश के वकील ने पुष्टि की कि विधायक को गिरफ्तार कर लिया गया, उनकी चिकित्सकीय जांच एवं पुंसत्व जांच (पोटेंसी टेस्ट) कराई गई और फिर उन्हें रिहा कर दिया गया क्योंकि इस महीने की शुरुआत में सत्र अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी।
इस बीच, पुलिस ने एक अभिनेत्री से जुड़े 2016 के बलात्कार मामले में जमानत याचिका उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के बाद सिद्दीकी की तलाश शुरू कर दी है।
न्यायमूर्ति सी. एस. डायस ने कहा कि चूंकि सिद्दीकी के बचाव में ‘‘घटना से पूरी तरह इनकार किया गया है’’, इसलिए उनकी पुंसत्व जांच अभी तक नहीं करायी गई है। न्यायमूर्ति डायस ने कहा कि इस बात की ‘वाजिब आशंका’ है कि वह (सिद्दीकी) गवाहों को डरा-धमका सकते हैं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं, इसलिए ‘‘यह अदालत मानती है कि उन्हें राहत देने के लिये विवेकाधीन शक्तियों का उपयोग करने का यह उपयुक्त मामला नहीं है’’।
अदालत ने कहा, ‘‘... तथ्यों का समग्र विश्लेषण करने, कानूनी प्रावधानों पर विचार करने, मेरी तरफ से ऊपर दिये गए तर्कों, और याचिकाकर्ता (सिद्दीकी) के खिलाफ लगाए गए आरोपों की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए एवं रिकॉर्ड पर रखे गए तथ्यों को समग्र रूप से देखने पर प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता की अपराध में संलिप्तता प्रतीत होती है और अपराध की उचित जांच के लिए याचिकाकर्ता की हिरासत में पूछताछ अपरिहार्य लगती है ....।’’
न्यायमूर्ति डायस ने फैसले में कहा, ‘‘..मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि याचिकाकर्ता के पक्ष में इस अदालत की विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करने के लिए यह उपयुक्त मामला नहीं है। उपरोक्त चर्चा के आलोक में, मेरा मानना है कि आवेदन खारिज किया जाना चाहिए। परिणामस्वरूप, आवेदन खारिज किया जाता है।’’
उच्च न्यायालय ने हालांकि, स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां मामले के गुणदोष को इंगित नहीं करती।
सिद्दीकी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत अपराध का मामला दर्ज किया गया है। अभिनेता ने अपनी याचिका में दावा किया कि शिकायतकर्ता अभिनेत्री उनके खिलाफ ‘‘2019 से उत्पीड़न और झूठे आरोपों का लंबा अभियान’’ चला रही है।
अपनी अग्रिम जमानत याचिका में उन्होंने आगे दावा किया कि अभिनेत्री पिछले पांच वर्षों से बार-बार 2016 में एक थिएटर में उनके द्वारा यौन दुर्व्यवहार किये जाने और 'मौखिक यौन प्रस्ताव' के निराधार और झूठे दावे करती रही हैं।
अपनी याचिका में उन्होंने कहा, ‘‘अब वह उसी वर्ष एक अलग स्थान पर बलात्कार जैसे अधिक गंभीर अपराध का पूरी तरह से विरोधाभासी आरोप लगा रही हैं।’’ सिद्दीकी ने शिकायत दर्ज कराने में देरी का भी हवाला दिया।
पीड़िता के वकील ने अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध करते हुए अदालत में दलील दी कि राज्य पुलिस ने कथित तौर पर उचित जांच नहीं की और अभिनेता के रुतबे से प्रभावित होकर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा और इलेक्ट्रॉनिक सबूत एकत्र नहीं किए जा रहे।
पीड़िता की ओर से वकील ने दलील दी कि सिद्दिकी को हिरासत में लेकर पूछताछ आवश्यक है, क्योंकि उन्होंने एक ‘जघन्य अपराध’किया है।
अभियोजन पक्ष ने भी अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि जांच ‘प्रारंभिक चरण’ में है और ‘याचिकाकर्ता-अभिनेता के खिलाफ तमाम सबूत हैं।’’
अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि अगर सिद्दीकी को अग्रिम जमानत दी जाती है तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं और गवाहों को ‘अपने प्रभाव एवं रुतबे’ से धमका सकते हैं।
सिद्दीकी ने अपने खिलाफ आरोप लगने के बाद मलयालम मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (एएमएमए) के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था।
न्यायमूर्ति के. हेमा समिति की रिपोर्ट में खुलासे के मद्देनजर विभिन्न निर्देशकों और अभिनेताओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद मलयालम फिल्म उद्योग की कई जानी-मानी हस्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
केरल सरकार ने 2017 में एक अभिनेत्री पर हमला मामले की जांच के लिए समिति का गठन किया था। हेमा समिति की रिपोर्ट में मलयालम सिनेमा उद्योग में महिलाओं के उत्पीड़न और शोषण के मामलों का खुलासा किया गया है।
कई अभिनेताओं और निर्देशकों के खिलाफ यौन उत्पीड़न और शोषण के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने 25 अगस्त को इन मामलों की जांच के लिए सात सदस्यीय विशेष जांच दल के गठन की घोषणा की थी।
भाषा अमित