छात्रा को निशाना बनाने वाले विज्ञापन के सिलसिले में कोचिंग संस्थान की जांच करे पुलिस : एनसीपीसीआर
रवि कांत नेत्रपाल
- 23 Mar 2024, 11:58 PM
- Updated: 11:58 PM
नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) देश की शीर्ष बाल अधिकार संस्था एनसीपीसीआर ने कोचिंग संस्थान 'एफआईआईटी-जेईई' द्वारा प्रकाशित एक नाबालिग लड़की से संबंधित कथित मानहानिकारक विज्ञापन को लेकर दिल्ली पुलिस से जांच करने को कहा है।
'एफआईआईटी-जेईई' से 'पीटीआई-भाषा' ने संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उसकी तरफ से अब तक कोई टिप्पणी नहीं की गयी है।
दक्षिणी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त को लिखे पत्र में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीआर) ने बाल अधिकारों और मानहानि कानूनों के ‘उल्लंघन’ पर चिंता जताई।
आयोग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट का हवाला दिया जिसमें कोचिंग संस्थान ने कथित तौर पर एक ऐसा विज्ञापन प्रकाशित किया, जिसमें एक नाबालिग लड़की को नकारात्मक रूप से चित्रित किया गया।
कोचिंग संस्थान ने अपने विज्ञापन में कहा, ‘‘उसने दिसंबर 2020 में नौवीं कक्षा में 'एफआईआईटी-जेईई' के साथ अपनी यात्रा शुरू की और उसका 80 प्रतिशत जेईई मेन और एडवांस कोर्स पहले ही खत्म हो चुका था जब उसके माता-पिता को किसी अन्य संस्थान ने लालच दिया था। वह 'एफआईआईटी-जेईई' दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शीर्ष पर थी और लेकिन अब उसने हमारी कोचिंग के कई छात्रों से कमतर प्रदर्शन किया है। 'एफआईआईटी-जेईई' के साधन के साथ, वह अपने स्व-अध्ययन से भी एनटीए स्कोर 99.99 हासिल कर लेती। तो, उसके प्रदर्शन में अन्य कोचिंग संस्थान का योगदान नकारात्मक रहा है। अगर वह 'एफआईआईटी-जेईई' के साथ बनी रहती तो वह स्पष्ट रूप से 100 एनटीए स्कोर हासिल कर सकती थी।’’
इस विज्ञापन को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कुछ उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा किया गया था, जिन्होंने एक नाबालिग लड़की को नकारात्मक रूप से चित्रित करने पर नाराजगी व्यक्त की और कार्रवाई की मांग की।
विज्ञापन में कहा गया कि लड़की के कोचिंग संस्थान छोड़ने के कारण उसका शैक्षणिक प्रदर्शन खराब रहा और सुझाव दिया गया कि वह किसी अन्य संस्थान में जाने के बजाय खुद से पढ़ाई करके बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकती थी।
एनसीपीसीआर ने नाबालिग की प्रतिष्ठा और मनोवैज्ञानिक कुशलक्षेम पर ऐसे विज्ञापनों के संभावित प्रभाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की और कार्रवाई शुरू करने के लिए बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम, 2005 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया।
आयोग ने इस बात पर प्रकाश डाला कि विज्ञापन भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 में उल्लिखित मानहानि कानूनों का संभावित रूप से उल्लंघन करता है।
इन चिंताओं के मद्देनजर, दिल्ली पुलिस से मामले की गहन जांच करने और मानहानिकारक विज्ञापन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
एनसीपीसीआर ने दिल्ली पुलिस से पत्र प्राप्त होने के सात दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का अनुरोध किया है।
भाषा रवि कांत