कुछ मुरझाए फूलों से बगीचे की शोभा नहीं घटती: पूर्व विधायक के जदयू में शामिल होने पर उपेंद्र कुशवाहा
रवि कांत नेत्रपाल
- 23 Mar 2024, 11:30 PM
- Updated: 11:30 PM
पटना, 23 मार्च (भाषा) बिहार में शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जनता दल (यूनाइटेड) ने पूर्व विधायक रमेश सिंह कुशवाहा को पार्टी में फिर से शामिल कर लिया।
रमेश सिंह कुशवाहा ने कुछ साल पहले पार्टी छोड़ दी थी और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक मोर्चा में शामिल हो गए थे।
बिहार के सिवान जिले की जीरादेई विधानसभा सीट का 2015 से 2020 तक प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व विधायक रमेश सिंह अपनी पत्नी विजय लक्ष्मी के साथ जद (यू) में शामिल हो गए। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद इस बात की संभावना जताई जा रही है कि जद(यू) की ओर से दोनों में से किसी एक को लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया जा सकता है।
जद (यू) के पटना स्थित कार्यालय में मीडियाकर्मियों की मौजूदगी में इसकी घोषणा की गयी।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव संजय कुमार झा ने कुशवाहा दंपति का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि एक दिन पहले दंपति ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की थी।
हालांकि, संजय कुमार झा ने सिवान लोकसभा सीट से रमेश कुशवाहा की संभावित उम्मीदवारी पर सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया, जहां ऐसी अफवाहें चल रही हैं कि जद (यू) अपनी मौजूदा सांसद कविता सिंह का टिकट काट सकती है। कविता सिंह उच्च जाति की राजपूत हैं।
ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि जद (यू) सिवान से इस बार रमेश सिंह कुशवाहा को टिकट दे सकता है, जिससे उसे 'लव कुश' के अपने मूल समर्थन आधार को बरकरार रखने में मदद मिल सकती है। यह शब्द बिहार में दो सबसे प्रमुख गैर-यादव अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समूहों कुर्मी और कोइरी (कुशवाहा) का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
झा ने दावा किया, ‘‘लोकसभा उम्मीदवारों का फैसला करना हमारे पार्टी अध्यक्ष का विशेषाधिकार है। फिलहाल किसी नाम को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।’’
पिछले साल जद (यू) छोड़ने के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा बनाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार की पार्टी पर निशाना साधा।
उपेन्द्र कुशवाहा ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कविता की पंक्तियां साझा करते हुए कहा, ‘‘राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के किसी अन्य पार्टी में शामिल हो जाने पर आक्रोशित मित्र कृपया हरिवंश राय बच्चन साहब की निम्नलिखित पंक्तियों का स्मरण करें -- जो बीत गई सो बात गई मधुवन की छाती को देखो सूखी कितनी इसकी कलियां मुरझाई कितनी वल्लरियां जो मुरझाई, फिर कहां खिलीं पर बोलो सूखे फूलों पर कब मधुवन शोर मचाता है जो बीत गई सो बात गई। वैसे जदयू के लोगों से आग्रह है कि कुछ और उम्मीदवारों की जरूरत हो तो बताइएगा, कृपया।’’
भाषा रवि कांत