पीएमएमएल सोसाइटी के सदस्य ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर नेहरू से संबंधित दस्तावेजों तक पहुंच मांगी
आशीष रंजन
- 22 Sep 2024, 09:04 PM
- Updated: 09:04 PM
नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) सोसाइटी के सदस्य रिजवान कादरी ने रविवार को कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से संबंधित निजी दस्तावेज तक प्रत्यक्ष या डिजिटल पहुंच की अनुमति देने का अनुरोध किया है।
अहमदाबाद के एक कॉलेज में इतिहास पढ़ाने वाले कादरी (56) ने कहा कि वह पीएमएमएल सोसाइटी-जिसे पहले नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (एनएमएमएल) के नाम से जाना जाता था-की वार्षिक आम बैठकों में उन कागजातों को ‘‘वापस लेने’’ के लिए आवाज उठाते रहे हैं, जिन्हें गांधी परिवार ने कई साल पहले वापस ले लिया था।
भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू मध्य दिल्ली में तीन मूर्ति भवन में रहते थे, जिसे उनके निधन के बाद संग्रहालय बना दिया गया। यहां पुस्तकों और दुर्लभ अभिलेखों का समृद्ध संग्रह था। कादरी ने कहा कि नेहरू के निजी कागजात से संबंधित अभिलेखों वाले 51 बक्से गांधी परिवार द्वारा वापस ले लिए गए थे।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया को नौ सितंबर को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है, ‘‘पंडित जवाहरलाल नेहरू जी और उनके पिता पंडित मोतीलाल नेहरू जी अपने योगदान के महत्वपूर्ण अभिलेख छोड़ गए हैं, जो सौभाग्य से नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय में संरक्षित रहा है। राष्ट्र निर्माण में उनके महान योगदान के लिए गहन वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है, जिसके लिए संपूर्ण अभिलेखों तक पहुंच आवश्यक है।’’
उन्होंने कहा कि हाल में पूछताछ के बाद पता चला कि इनमें से अधिकतर रिकॉर्ड प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय में रखे गए हैं। कादरी ने पत्र में लिखा है, ‘‘मुझे यह भी बताया गया कि कुछ रिकॉर्ड आपके कार्यालय द्वारा लिए गए थे, क्योंकि आप परिवार की प्रतिनिधि और दाता थीं। मुझे विश्वास है कि इन अमूल्य दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए यह सद्भावनापूर्वक किया गया था।’’
इतिहासकार ने कहा कि हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि ये अभिलेख ‘‘हमारे देश के इतिहास की व्यापक समझ सुनिश्चित करने के लिए सुलभ रहें।’’ उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों में नेहरू और जयप्रकाश नारायण, एडविना माउंटबेटन और अल्बर्ट आइंस्टीन के बीच पत्रों से संबंधित रिकॉर्ड शामिल हैं।
अहमदाबाद में रह रहे कादरी ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सबसे अच्छा कदम यह होगा कि सभी रिकॉर्ड पीएमएमएल को वापस भेज दिए जाएं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो ‘‘कम से कम उन दस्तावेजों तक डिजिटल पहुंच’’ की अनुमति दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा एकमात्र उद्देश्य महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू जी और सरदार (वल्लभभाई) पटेल का सच्चे वैज्ञानिक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में अध्ययन करना है। इस प्रयास में आपका सहयोग अमूल्य होगा। आपके विचार और सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद।’’
भाषा आशीष