राजनाथ ने परमवीर चक्र पुरस्कार विजेताओं को सम्मान देने वाले अभियान दल की सराहना की
नेत्रपाल रंजन
- 20 Sep 2024, 08:55 PM
- Updated: 08:55 PM
नयी दिल्ली, 20 सितंबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समुद्र में अनेक चुनौतियों को पार करते हुए परमवीर चक्र विजेताओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए तैराकी अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करने में दिखाए गए साहस के वास्ते तीनों सेनाओं की टीम की शुक्रवार को सराहना की।
इस संबंध में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यहां आयोजित एक कार्यक्रम में सिंह ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के 21 द्वीपों पर अपनी तरह के पहले खुले जल तैराकी अभियान को हरी झंडी दिखाई। इन द्वीपों का नाम परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा गया है।
सिंह ने अपने संबोधन में टीम के साहस और क्षमता की सराहना की, जिसने समुद्र में अनेक चुनौतियों को पार करते हुए अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया और वीरों की वीरता तथा बलिदान की कहानियों को लोगों तक पहुंचाया।
मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में सिंह के हवाले से कहा गया, ‘‘यह अभियान सरकार के उन प्रयासों के अनुरूप था, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्र की सेवा में बलिदान देने वाले हमारे सैनिकों के वीरतापूर्ण कार्यों के बारे में लोगों, विशेषकर युवाओं को पता चले और ये वीर लोग उनके नायक बनें।’’
उन्होंने आशा व्यक्त की कि सशस्त्र बल के जवान राष्ट्र को गौरवान्वित करते रहेंगे तथा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
कार्यक्रम के दौरान टीम द्वारा रक्षा मंत्री को ‘अभियान ध्वज’ सौंपा गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले वर्ष 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के अवसर पर मनाए जाने वाले पराक्रम दिवस पर अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के 21 सबसे बड़े अनाम द्वीपों का नाम परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा था।
मंत्रालय ने कहा कि नाम बदलने की पहली वर्षगांठ के अवसर पर त्रि-सेवा अंडमान और निकोबार कमान ने ‘अभियान परमवीर’ शुरू किया, जिसमें थलसेना, नौसेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय तटरक्षक बल के कर्मियों की एक टीम ने 21 वीरता पुरस्कार विजेताओं की वीरता और बलिदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए सभी 21 द्वीपों की तैराकी की और प्रत्येक द्वीप पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
अभियान के दौरान तैराकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें गंभीर थकावट, अत्यधिक निर्जलीकरण, धूप से झुलसना और अशांत समुद्री परिस्थितियां शामिल थीं।
बयान में कहा गया, ‘‘कई बार घातक समुद्री जीवों से भी सामना हुआ। पूरा अभियान बिना किसी दुर्घटना के पूरा हुआ। यह एक शानदार उपलब्धि है क्योंकि इसमें भाग लेने वाले अधिकतर लोग पहली बार खुले जल में तैराकी कर रहे थे।’’
टीम ने पांच महीने की अवधि में 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करके सभी 21 द्वीपों की यात्रा की। अभियान का समापन 15 अगस्त को 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुआ।
भाषा नेत्रपाल