कॉलेजियम के दोबारा सिफारिश करने के बावजूद नियुक्ति न करने पर न्यायालय ने केंद्र से जानकारी मांगी
सुभाष रंजन
- 20 Sep 2024, 09:07 PM
- Updated: 09:07 PM
नयी दिल्ली, 20 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र से यह जानकारी देने को कहा कि उच्चतर न्यायपालिका में न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए शीर्ष अदालत के कॉलेजियम ने किन नामों की दोबारा सिफारिश की और उनकी संख्या कितनी है।
न्यायालय ने केंद्र से इस बात का कारण भी बताने को कहा है कि इन नामों पर अब तक विचार क्यों नहीं किया गया और वे किस स्तर पर लंबित हैं।
यह निर्देश प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया।
पीठ में, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम (न्यायाधीशों के लिए) कोई खोज समिति नहीं है जिसकी सिफारिशों को रोका जा सके।’’
पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा कि वह उसे कॉलेजियम द्वारा पुन: अनुशंसित किए गए नामों की एक सूची मुहैया कराएं और बताएं कि वे ‘‘क्यों और किस स्तर पर लंबित’’ हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आप दोबारा अनुशंसित नामों की एक सूची बनाएं और बताएं कि ये क्यों और किस स्तर पर लंबित हैं...।’’
पीठ ने कहा कि कुछ नियुक्तियां अभी होनी हैं और ‘‘हमें उम्मीद है कि ये बहुत जल्द की जाएंगी।’’
सुनवाई की शुरुआत में, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अटॉर्नी जनरल की ओर से सुनवाई स्थगित किये जाने की मांग पर आपत्ति जताते हुए कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्तियां वर्षों से लंबित हैं।
सिब्बल ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि ऐसे मामले में स्थगन मांगकर केंद्र को क्या मिलता है। समस्या न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में नहीं है...।’’
अटॉर्नी जनरल ने सिब्बल की दलीलों पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह कहना बहुत आसान है कि नियुक्तियां नहीं की गई हैं।
सिब्बल ने कहा, ‘‘न्यायमूर्ति विद्युत रंजन सारंगी छह महीने तक कार्यभार नहीं संभाल सकें।’’
इस मुद्दे पर अलग से याचिका दायर करने वाले वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह अनुरोध किया गया था कि अगर केंद्र छह महीने के भीतर कॉलेजियम की सिफारिशों पर जवाब नहीं देता है तो इसे नियुक्त माना जाएगा।
भूषण ने वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ किरपाल का नाम लिया, जिन्हें ‘सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम’ द्वारा बार-बार कहे जाने के बावजूद उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त नहीं किया गया है। उन्होंने अपनी याचिका को मौजूदा याचिका के साथ सूचीबद्ध करने का भी अनुरोध किया।
शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा, ‘‘ऐसे नामों के लंबित रहने के कई कारण हैं और हमें तथ्यों को पीठ के सामने लाने में कोई हिचकिचाहट नहीं है।’’
सिब्बल ने अटॉर्नी जनरल से कहा, ‘‘कृपया इसे व्यक्तिगत रूप से न लें। हम संस्थान की बात कर रहे हैं।’’
इस पर, शीर्ष विधि अधिकारी ने जवाब दिया, ‘‘मैं भी संस्थान से संबंधित हूं।’’ उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मामले कुछ व्यक्तियों के निजी क्षेत्र में नहीं आते।
पीठ ने कहा कि कॉलेजियम की सिफारिशों को संवैधानिक मान्यता प्राप्त है और वे नियुक्तियों पर खोज समितियों के निष्कर्षों के समान नहीं हैं, जिन्हें सरकार अपने पास रोक कर रख सकती है।
इसके बाद, पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी, जिसमें अटॉर्नी जनरल द्वारा स्थगन के अनुरोध को ध्यान में रखा गया कि वह अस्वस्थ हैं।
यह जनहित याचिका वकील हर्ष विभोरे सिंघल ने दायर की थी।
इसके अलावा, हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली (झारखंड की) झामुमो सरकार ने भी न्यायमूर्ति एम एस रामचंद्र राव को झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की कॉलेजियम की सिफारिश को मंजूरी नहीं देने के लिए केंद्र के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है। कॉलेजियम ने 11 जुलाई को न्यायमूर्ति राव की नियुक्ति की सिफारिश की थी।
सिब्बल ने कहा कि न्यायमूर्ति सारंगी, जिनके नाम की सिफारिश दिसंबर 2023 में झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए की गई थी, छह महीने तक कार्यभार नहीं संभाल सकें और उनकी नियुक्ति इसी साल जुलाई में की गई।
भाषा सुभाष