प्रधानमंत्री मोदी विलमिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ महत्वपूर्ण बातचीत करेंगे: विदेश सचिव
नेत्रपाल अमित
- 19 Sep 2024, 08:03 PM
- Updated: 08:03 PM
नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच शनिवार को क्वाड शिखर सम्मेलन से इतर महत्वपूर्ण बातचीत होगी और वार्ता के बाद दोनों पक्ष कम से कम दो समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बृहस्पतिवार को कहा कि एक समझौता हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचे (आईपीईएफ) से संबंधित होगा और दूसरा समझौता ज्ञापन (एमओयू) भारत-अमेरिका ड्रग फ्रेमवर्क पर होगा।
मोदी वार्षिक क्वाड शिखर सम्मेलन में भाग लेने और संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘भविष्य के शिखर सम्मेलन’ को संबोधित करने के लिए 21 सितंबर से अमेरिका की तीन दिवसीय यात्रा पर रहेंगे।
मोदी 21 सितंबर को डेलवेयर के विलमिंगटन में क्वाड शिखर सम्मेलन के मौके पर बाइडन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और उनके जापानी समकक्ष फुमियो किशिदा के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित नाकाम साजिश में भारत का हाथ होने के वाशिंगटन के आरोपों के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में कुछ असहजता के बीच मोदी और बाइडन के बीच बातचीत होगी।
अमेरिका साजिश की भारतीय जांच पर जानकारी के लिए भारत पर लगातार दबाव डालता रहा है और कहता रहा है कि वह मामले में जवाबदेही चाहता है।
बैठक में मोदी द्वारा रूस-यूक्रेन संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान खोजने पर मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और कीव में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ अपनी हालिया बातचीत से बाइडन को अवगत कराए जाने की भी उम्मीद है।
मिस्री ने कहा, “यह प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बाइडन के बीच एक ठोस वार्ता का अवसर होगा, जहां उन्हें भारत और अमेरिका के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करने का अवसर मिलेगा, जो आज 50 प्लस वार्ता तथा द्विपक्षीय संवाद तंत्रों के माध्यम से मानव प्रयास के लगभग हर पहलू को कवर करता है।’’
वह मोदी की अमेरिका यात्रा के बारे में मीडिया को जानकारी दे रहे थे।
मिस्री ने कहा, ‘‘यह भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और महत्वपूर्ण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों पर पहल जैसी कई नयी पहलों में अग्रणी भूमिका के लिए राष्ट्रपति बाइडन को धन्यवाद देने का अवसर भी होगा।’’
विदेश सचिव ने कहा कि दोनों पक्षों को कुछ समझौतों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिलेगा जिनमें से एक आईपीईएफ पर होगा।
आईपीईएफ पर समझौता स्वच्छ अर्थव्यवस्था और सभी को समान अवसर देने वाली अर्थव्यवस्था स्तंभों से संबंधित है।
हिंद-प्रशांत के लिए वाशिंगटन के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप बाइडन ने मई 2022 में महत्वाकांक्षी हिंद-प्रशांत आर्थिक समृद्धि ढांचे (आईपीईएफ) की शुरुआत की थी।
यह एक पहल है जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में समान विचारधारा वाले देशों के बीच गहरा सहयोग करना है।
भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के अलावा, आईपीईएफ के अन्य सदस्य देश ब्रुनेई दारुस्सलाम, फिजी, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, न्यूजीलैंड, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम हैं।
आईपीईएफ के चार स्तंभ हैं- व्यापार, आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन, स्वच्छ अर्थव्यवस्था और सभी को समान अवसर देने वाली अर्थव्यवस्था।
इस सवाल पर कि क्या मोदी अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे, मिस्री ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रधानमंत्री के साथ कई बैठकों का कार्यक्रम तय करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं आपको किसी विशिष्ट बैठक के बारे में नहीं बता पाऊंगा- कि बैठक को अंतिम रूप दिया गया है या नहीं।’’
मिस्री ने कहा, ‘‘हम हर पहलू से देख रहे हैं कि हमारे पास कितना समय है और हम किसके साथ बैठक कर सकते हैं। हम आपको बैठकों के बारे में जानकारी देते रहेंगे।’’
दो दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रंप ने कहा था कि वह अगले हफ्ते मोदी से मिलेंगे।
विलमिंगटन से प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘भविष्य के शिखर सम्मेलन’ में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क जाएंगे।
मिस्री ने कहा कि न्यूयॉर्क में मोदी के कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की उम्मीद है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘भविष्य के शिखर सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री की भागीदारी पर मिस्री ने कहा कि भारत के ‘‘समावेशी और न्यायसंगत सतत विकास’’ के लिए जोर देने की उम्मीद है।
सत्रह अगस्त को डिजिटल रूप से तीसरे ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ की भारत की मेजबानी का जिक्र करते हुए विदेश सचिव ने संकेत दिया कि विचार-विमर्श के दौरान उठाई गई कई चिंताओं को संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में आवाज मिलेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि शिखर सम्मेलन में उठाई गई कई चिंताओं को भविष्य के शिखर सम्मेलन में भी आवाज मिलेगी।’’
भाषा नेत्रपाल