कोचिंग संस्थान मौत मामले में अदालत ने कहा : प्रशासन को गहरी नींद से जागने की जरूरत
योगेश अविनाश
- 17 Sep 2024, 04:24 PM
- Updated: 04:24 PM
नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि प्रशासन को गहरी नींद से जागने और शहर के कोचिंग संस्थानों की स्थिति को सुधारने के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है।
इसके साथ ही, अदालत ने ओल्ड राजेंद्र नगर की एक इमारत के भूमिगत तल (बेसमेंट) के चार सह-मालिकों को 30 नवंबर तक अंतरिम जमानत दे दी। उसी इमारत में एक कोचिंग संस्थान था, जहां जुलाई में सिविल सेवा के तीन अभ्यर्थी डूब गए थे।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर 13 सितंबर को पारित आदेश में प्रशासन के ‘लापरवाह रवैये’ पर अफसोस जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं बार-बार होती हैं और निर्दोष लोग उन ‘शरारती तत्वों’ के कारण अपनी जान गंवा देते हैं, जो केवल पैसा कमाना चाहते हैं।
अदालत की वेबसाइट पर जारी आदेश में न्यायाधीश ने कहा कि देशभर से बच्चे शिक्षा के लिए राष्ट्रीय राजधानी आते हैं और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोचिंग संस्थान मालिकों को ऐसे मासूम बच्चों की कोई परवाह नहीं है।
न्यायमूर्ति शर्मा ने उपराज्यपाल से आग्रह किया कि वे एक समिति गठित करें, अच्छा हो कि यह समिति उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के अधीन हो, जो सभी कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण करे तथा यह सुनिश्चित करने के लिए सुझाव दे कि वे असुरक्षित भवनों या असुरक्षित परिस्थितियों में संचालित ना हों।
अदालत ने कहा, "हालिया घटना जिसमें तीन युवा प्रतिभाशाली छात्रों की जान चली गई, बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और खतरे की घंटी है। इस अदालत ने पहले भी अनधिकृत कोचिंग संस्थान चलाने के मुद्दे को उठाया है, लेकिन दुर्भाग्य से नगर निकाय के अधिकारी कोई कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।"
अदालत ने कहा कि ऐसे छात्रों के माता-पिता अपनी मेहनत की कमाई का काफी पैसा खर्च करके अपने बच्चों को कोचिंग संस्थान में भेजते हैं, इस उम्मीद के साथ कि उनके बच्चे अपने जीवन में कुछ बनेंगे।
अदालत ने कहा, "यह अकल्पनीय है कि माता-पिता को ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण अपने बच्चों के शव वापस मिलें। अदालत का मानना है कि अब समय आ गया है कि प्रशासन को गहरी नींद से जागना होगा और उचित कदम उठाने होंगे।"
ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए एक कोष बनाने के उद्देश्य से, अदालत ने बेसमेंट के चारों सह-मालिकों को 30 नवंबर तक रेड क्रॉस सोसाइटी के पास एकमुश्त या किस्तों में पांच करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि उपराज्यपाल यह सुनिश्चित करेंगे कि धनराशि का उपयोग छात्रों के कल्याण और कोचिंग संस्थानों के कामकाज को सुचारू बनाने के लिए किया जाए।
साथ ही अदालत ने कहा कि वह मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने पर भी निर्णय ले सकते हैं।
अदालत ने कहा, "देश के सभी हिस्सों से छात्र शिक्षा/कोचिंग के लिए राष्ट्रीय राजधानी आते हैं। उनके पास इन अस्वच्छ और खराब स्थितियों में समायोजित होने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हालांकि कई निर्देशों के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अदालत ऐसे निर्देश देना बंद कर देगी। अदालतें यह सुनिश्चित करेंगी कि व्यवस्था के निवारण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।"
साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि वह मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकती।
मध्य दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में 27 जुलाई को भारी बारिश के बाद एक कोचिंग संस्थान की इमारत के भूमिगत तल में पानी भर जाने से सिविल सेवा के तीन अभ्यर्थियों (उत्तर प्रदेश की श्रेया यादव (25), तेलंगाना की तान्या सोनी (25) और केरल के नेविन डेल्विन (24)) की मौत हो गई थी।
बेसमेंट के सह-मालिकों ने इस आधार पर जमानत मांगी थी कि वे केवल बेसमेंट के मकान मालिक हैं, जिसे कोचिंग सेंटर को किराए पर दिया गया था और इसलिए, दुर्भाग्यपूर्ण घटना में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
भाषा योगेश