पत्थर फेंकने वालों को जेल, हाथों में लैपटॉप और तिरंगा रखने वालों को मिलेगी नौकरी : अमित शाह
वैभव पारुल
- 16 Sep 2024, 08:34 PM
- Updated: 08:34 PM
चंद्रकोट (जम्मू-कश्मीर), 16 सितंबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस आतंकवादियों और पत्थरबाजों को रिहा कराना चाहती हैं, ताकि जम्मू-कश्मीर को फिर से आतंक के गर्त में ले जाया जा सके।
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इन दलों को आतंकवाद को फिर से मजबूती प्रदान नहीं करने देगी और हाथों में लैपटॉप तथा तिरंगा लेने वाले युवाओं को नौकरी मिलेगी।
गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में पहले चरण के तहत 18 सितंबर को होने वाले मतदान के लिए प्रचार के अंतिम दिन रामबन जिले के चंद्रकोट में एक रैली में कहा, ‘‘पत्थर फेंकने वालों के लिए जेल तैयार हैं।’’
उन्होंने केंद्र-शासित प्रदेश में सोमवार को अपनी तीसरी चुनावी रैली को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय दलों के पाकिस्तान के साथ वार्ता और सीमापार व्यापार फिर शुरू करने की वकालत करने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि जब तक आतंकवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, जब तक ऐसा कुछ नहीं होने वाला।
विधानसभा चुनावों के लिए जम्मू-कश्मीर भाजपा के घोषणापत्र का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि तीन चरण के चुनावों के बाद एक श्वेत पत्र जारी किया जाएगा, ताकि केंद्र-शासित प्रदेश में पिछले 35 वर्षों में 40,000 से अधिक लोगों के आतंकवाद के कारण जान गंवाने के मामले में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने पार्टी उम्मीदवार राकेश सिंह ठाकुर (रामबन) और मोहम्मद सलीम भट (बनिहाल) के समर्थन में रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘वे (नेकां, पीडीपी और कांग्रेस) आतंकवादियों और पत्थरबाजों को रिहा कराना चाहते हैं और उन्हें नौकरियां दिलाना चाहते हैं। मैं उन्हें बता देना चाहता हूं कि मोदी सरकार उन युवाओं को नौकरी देगी, जिनके हाथ में लैपटॉप और तिरंगा हो।’’
शाह ने कहा कि ये दल पाकिस्तान के साथ बातचीत और जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सीमापार व्यापार फिर से शुरू करने की वकालत कर रहे हैं। सीमापार व्यापार अप्रैल 2019 में निलंबित कर दिया गया था।
गृह मंत्री ने कहा, ‘‘मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि जब तक आतंकवाद समाप्त नहीं होगा, पाकिस्तान से कोई बात नहीं होगी। उमर अब्दुल्ला अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर लें... (लेकिन) जब तक आतंकवाद को पाताल में दफन नहीं कर दिया जाता, तब तक पाकिस्तान के साथ कोई व्यापार नहीं होगा।’’
शाह ने नेकां नेता उमर अब्दुल्ला के इस बयान की निंदा की कि संसद हमले के दोषियों को फांसी पर नहीं लटकाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘‘आपकी मंशा आतंकवाद को लौटाने की है, जिसे पूरा नहीं होने दिया जाएगा। आप आग से खेल रहे हैं, क्योंकि आतंकवाद से किसी का भला नहीं होता।’’
शाह ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसका समर्थन किया है, जबकि इसमें अनुच्छेद-370 और दूसरे झंडे को वापस लाने की बात कही गई है।
उन्होंने रैली में मौजूद लोगों से सवाल पूछा, ‘‘क्या आपको दूसरा झंडा चाहिए?’’ इस पर लोगों ने अपने हाथ हिलाते हुए ‘नहीं’ में जवाब दिया।
गृह मंत्री ने कहा, ‘‘राहुल बाबा आप जितनी ताकत लगा सकते हैं, लगा लें, लेकिन जम्मू-कश्मीर में केवल एक झंडा रहेगा और वो है हमारा प्यारा तिरंगा।’’
शाह ने कहा, ‘‘मैं आपसे और कश्मीर की जनता से, खासतौर पर मुस्लिम भाइयों-बहनों से पूछना चाहता हूं कि अनुच्छेद-370 ने आपको गरीबी, बेरोजगारी और आतंकवाद के अलावा क्या दिया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुस्लिम, हिंदू, बौद्ध और सिख समुदाय के लोगों को अनुच्छेद-370 से कोई फायदा नहीं हुआ और केवल इन परिवारों-अब्दुल्ला (नेशनल कॉन्फ्रेंस), गांधी (कांग्रेस) और मुफ्ती (पीडीपी) ने अपने राजनीतिक हितों के लिए इसका इस्तेमाल किया।’’
शाह ने कहा, ‘‘क्या वे आपके वोटों के हकदार हैं? उन्होंने नौजवानों के हाथों में बंदूक और पत्थर दिए और अपने बच्चों को विदेश में शिक्षा दिलाई, ताकि वे बाद में सत्ता का सुख भोग सकें।’’
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव कराके 30,000 युवकों को अवसर दिया।
शाह ने कहा कि वे अनेक समुदायों को दिए गए आरक्षण की समीक्षा करने की बात कर रहे हैं और ‘‘युवाओं को भ्रष्टाचार की आग में झोक रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, “हम जम्मू-कश्मीर में विभाजनकारी राजनीति नहीं होने देंगे और यह हमारा दृढ़ संकल्प है।”
भाषा
वैभव