जम्मू कश्मीर विस चुनाव में गांधी-अब्दुल्ला परिवार और भाजपा के बीच स्पष्ट लड़ाई: शाह
अविनाश
- 16 Sep 2024, 08:10 PM
- Updated: 08:10 PM
किश्तवाड़, 16 सितंबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में स्पष्ट लड़ाई कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच है।
उन्होंने कहा कि एक पक्ष अनुच्छेद 370 को वापस लाना चाहता है, तो दूसरा इसे रोकने को लेकर प्रतिबद्ध है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता शाह ने कहा कि भाजपा प्रत्याशी शुगन परिहार के पक्ष में मतदान करना ना केवल विकास और प्रगति का समर्थन करना है, बल्कि यह उनके पिता सहित अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि देना भी है।
शाह ने यहां एक रैली में कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में यह चुनाव स्पष्ट रूप से दो ताकतों के बीच है। एक तरफ नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस है, और दूसरी तरफ भाजपा है। यह भाजपा और गांधी-अब्दुल्ला परिवारों के बीच का मुकाबला है। दोनों के एजेंडे स्पष्ट हैं।’’
उन्होंने कहा कि भाजपा प्रेमनाथ डोगरा की विचारधारा ‘एक विधान, एक निशान और एक प्रधान’ के सिद्धांत का पालन करती है।
उन्होंने पुष्टि की कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक अभिन्न हिस्सा है और ‘‘कोई भी इसे बदल नहीं सकता।’’
पार्टी उम्मीदवार शुगन परिहार, सुनील शर्मा और तारक कीन के समर्थन में चुनाव प्रचार कर रहे शाह ने बताया कि नेकां और कांग्रेस ने कहा है कि सत्ता में आने पर वे अनुच्छेद 370 को बहाल करेंगे। शाह ने कहा, ‘‘पहाड़ी लोगों और गुज्जरों के लिए अभी उपलब्ध आरक्षण को अनुच्छेद 370 के तहत फिर छीन लिया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि (प्रधानमंत्री) मोदी जी ने अनुच्छेद 370 हटाकर जो किया वह इतिहास बन गया है और भारत के संविधान में अनुच्छेद 370 के लिए अब कोई जगह नहीं बची है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में फिर कभी दो संविधान, दो प्रधानमंत्री और दो ध्वज नहीं हो सकते, ध्वज हमेशा सर्वप्रिय तिरंगा ही रहेगा।
उन्होंने नेकां और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 1990 की तरह आतंकवाद को फिर से मजबूत करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘नेकां और कांग्रेस ने कुछ वादे किए हैं कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आई तो वे आतंकवादियों को रिहा कर देंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज आप सभी को बताता हूं कि यह नरेन्द्र मोदी सरकार है, किसी में भी भारत की धरती पर आतंकवाद फैलाने की हिम्मत नहीं है।’’
उन्होंने नेकां-कांग्रेस गठबंधन पर आतंकवाद को ‘पोषित’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने घाटी में सरकार बनाई, तब आतंकवाद पनपा है।
उन्होंने कहा, ‘‘1990 के दशक को याद करें... मैं (पूर्व मुख्यमंत्री) फारूक अब्दुल्ला से पूछना चाहता हूं, जो राजीव गांधी के साथ समझौते के बाद तब मुख्यमंत्री थे। जब हमारी घाटी खून से लथपथ थी तब आप कहां थे?’’
शाह ने कहा कि परिहार को वोट देना और उन्हें विजयी बनाना न केवल शांति, प्रगति और विकास के लिए है, बल्कि उनके पिता और चाचा सहित इस भूमि के शहीदों को श्रद्धांजलि देना भी है।
शाह ने कहा कि अगर कांग्रेस-नेकां गठबंधन सत्ता में लौटता है, तो फिर से गोलीबारी होगी, पथराव फिर से शुरू होगा, आतंकवादियों के लिए अंतिम संस्कार फिर से आयोजित किए जाएंगे, ताजिया जुलूस पर फिर से प्रतिबंध लगाया जाएगा, सिनेमा हॉल फिर से बंद किए जाएंगे, अमरनाथ यात्रा पर एक बार फिर हमले होंगे और जम्मू-कश्मीर में आने वाले निवेश की जगह बेरोजगारी ले लेगी।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस, जिसने कभी अब्दुल्ला परिवार को ‘देशद्रोही’ कहा था और उन्हें आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया था, ने उमर अब्दुल्ला के दादा को वर्षों तक जेल में रखा था, लेकिन आज मोदी जी को हराने के लिए राहुल गांधी और अब्दुल्ला एक-दूसरे को ‘इलू-इलू' कह रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को चेतावनी देते हुए शाह ने कहा कि अब भी समय है कि वे वापस लौट जाएं, नहीं तो भारतीय सेना और सुरक्षा बल यहां तैनात हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र को ‘मजबूत’ किया है।
शाह ने कहा, ‘‘मैं फारूक अब्दुल्ला से पूछना चाहता हूं - आपके परिवार ने तीन पीढ़ियों तक शासन किया, लेकिन क्या जम्मू-कश्मीर के लोगों को कभी पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिला? मोदी जी ने मैदान से लेकर पहाड़ तक सभी को पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा दी है।’’
कश्मीर पर पार्टी की लंबी लड़ाई को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित प्रेमनाथ डोगरा के नेतृत्व में प्रजा परिषद और भारतीय जनसंघ ने एक देश में ‘दो झंडे, दो संविधान और दो प्रधान’ के विचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
शाह ने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने आंदोलन को कुचल दिया। शाह ने कहा, ‘‘वे कहते थे, चाहे आसमान से तारे गिर जाएं, लेकिन अनुच्छेद 370 कभी नहीं हटेगा।’’
भाषा संतोष