टिप्पणियाँ संस्थानों को हतोत्साहित कर सकती हैं: धनखड़
नेत्रपाल माधव
- 16 Sep 2024, 05:20 PM
- Updated: 05:20 PM
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि निर्वाचन आयोग तथा जांच एजेंसियों सहित संस्थाएं कठिन परिस्थितियों में अपना कर्तव्य निभाती हैं और एक टिप्पणी उन्हें ‘‘हतोत्साहित’’ कर सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी को भी देश के संस्थानों के बारे में ‘‘अत्यंत सचेत’’ रहना होगा जो मजबूत हैं और उचित नियंत्रण एवं संतुलन के साथ कानून के शासन के तहत स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं।
रविवार को मुंबई में एक कार्यक्रम में उनकी टिप्पणी उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश द्वारा शुक्रवार की गई इस टिप्पणी की पृष्ठभूमि में आई कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को पिंजरे में बंद तोता होने की धारणा को दूर करना चाहिए।
यह उल्लेख करते हुए कि आबकारी नीति मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी अनुचित थी, शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने एजेंसी की आलोचना की थी और कहा था कि उसे पिंजरे में बंद तोता होने की धारणा को दूर करना चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धनखड़ ने कहा कि राज्य के सभी अंगों का एक ही उद्देश्य है कि आम आदमी को सभी अधिकार मिलें और भारत फले-फूले तथा समृद्ध हो।
उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों और आगे के संवैधानिक आदर्शों को पोषित एवं पुष्पित करने के लिए मिलकर एकजुटता से काम करने की जरूरत है... इन पवित्र मंचों - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - को राजनीतिक भड़काऊ बहस का बिंदु न बनने दें क्योंकि यह चुनौतीपूर्ण एवं कठिन परिस्थितियों में भी देश की अच्छी सेवा करने वाले संस्थानों के लिए हानिकारक है।’’
उन्होंने संस्थाओं का जिक्र करते हुए निर्वाचन आयोग और जांच एजेंसियों का जिक्र किया।
उनका विचार था कि संस्थाएँ कठिन परिस्थितियों में अपना कर्तव्य निभाती हैं और टिप्पणियाँ उन्हें ‘‘हतोत्साहित’’ कर सकती हैं।
धनखड़ ने कहा, ‘‘यह एक राजनीतिक बहस को जन्म दे सकता है और एक विमर्श को गढ़ सकता है। हमें अपने संस्थानों के बारे में बेहद सचेत रहना होगा। वे मजबूत हैं, वे कानून के शासन के तहत स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं और वहां उचित नियंत्रण एवं संतुलन है।’’
भाषा नेत्रपाल