हुड्डा पर हरियाणा की सत्ता में कांग्रेस की वापसी कराने का दारोमदार
पारुल माधव
- 16 Sep 2024, 04:26 PM
- Updated: 04:26 PM
रोहतक, 16 सितंबर (भाषा) “मैं यह लड़ाई अपने लिए नहीं, बल्कि आपके लिए लड़ना चाहता हूं... मैं चाहता हूं कि हरियाणा एक बार फिर नंबर वन बने।” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र गढ़ी सांपला-किलोई में कुछ दिन पहले आयोजित एक चुनावी रैली के मंच से यह बात कही थी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हुड्डा रविवार को 77 साल के हो गए। वह रोहतक से चार बार सांसद रह चुके हैं। 1990 के दशक में उन्होंने पूर्व उपप्रधानमंत्री देवी लाल को इस सीट पर तीन बार शिकस्त दी थी।
हालांकि, कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा में चुनाव जीतने पर उसके विधायक और आला कमान मुख्यमंत्री चुनेगा, लेकिन राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों में दिग्गज जाट नेता हुड्डा को पार्टी का चेहरा माना जा रहा है।
कांग्रेस भिवानी को छोड़ हरियाणा की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उसने भिवानी सीट मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के लिए छोड़ी है। राज्य की अधिकांश सीटों पर हुड्डा के वफादारों या उनके करीबी माने जाने वाले नेताओं को टिकट दिया गया है। इसके अलावा, पार्टी ने सभी 28 मौजूदा विधायकों को फिर से मैदान में उतारा है, जिनमें से अधिकांश हुड्डा के प्रति निष्ठा रखते हैं।
हाल में संपन्न लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने हरियाणा की नौ सीट पर किस्मत आजमाई। इनमें से सिरसा सीट से हुड्डा की प्रतिद्वंद्वी मानी जाने वाली कुमारी शैलजा ने चुनाव लड़ा, जबकि बाकी आठ सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री के पसंद के उम्मीदवारों को मौका दिया गया।
लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने हरियाणा की सिरसा सहित पांच सीट पर जीत दर्ज की। वहीं, विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) की उसकी सहयोगी आम आदमी पार्टी (आप) को कुरुक्षेत्र सीट पर हार का सामना करना पड़ा।
विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए हुई वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद ‘आप’ ने ‘एकला चलो’ की रणनीति अपनाई है। ऐसा माना जाता है कि हुड्डा विधानसभा चुनाव के लिए अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ किसी भी तरह के गठबंधन के खिलाफ थे।
पार्टी के भीतर अपने कुछ विरोधियों के विरोध के बावजूद हुड्डा कांग्रेस की हरियाणा इकाई से जुड़े मामलों पर मजबूत पकड़ बनाए रखने में कामयाब रहे हैं।
गढ़ी सांपला-किलोई रोहतक जिले का एक जाट बहुल ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र है। यह सीट 2007 में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। हुड्डा इस सीट पर फिर से चुनाव जीतने की कोशिशों में जुटे हैं। गढ़ी सांपला-किलोई को हुड्डा परिवार का गढ़ माना जाता है। परिसीमन से पहले यह सीट किलोई के नाम से जानी जाती थी।
साल 2005 में कांग्रेस के हरियाणा में 67 विधानसभा सीटें जीतकर सत्ता में लौटने के बाद पार्टी आला कमान ने रोहतक के तत्कालीन लोकसभा सांसद हुड्डा को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हुड्डा ने पार्टी के दिग्गज नेता भजन लाल को मात दी थी। वह 2014 तक इस पद पर बने रहे।
पिछले हफ्ते अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद हुड्डा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से कहा, “आपने मुझे मौका दिया। आज मैं जो कुछ भी हूं, आपकी और आपके आशीर्वाद की बदौलत हूं।”
उन्होंने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर भी वह “आर-पार की लड़ाई लड़ना चाहते हैं”, अपने लिए नहीं, बल्कि राज्य के लोगों के लिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हरियाणा की सत्ता से बेदखल करने के लिए लोगों से अपनी पार्टी का समर्थन करने की अपील की।
उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि हमारा राज्य एक बार फिर सभी क्षेत्रों में नंबर वन बने।”
हुड्डा ने दोहराया कि अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों में मतदाता “वोट काटू (वोट काटने वाली) पार्टियों को खारिज कर देंगे” और कांग्रेस, जो एक दशक से अधिक समय से सत्ता से बाहर है, उसका भाजपा से सीधा मुकाबला होगा।
यह पूछे जाने पर कि वह कांग्रेस की जीत को लेकर कितने आश्वस्त हैं, हुड्डी ने कहा, “हम भारी बहुमत से जीत दर्ज करेंगे। छत्तीस बिरादरी (सभी वर्गों के लोग) ने कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाने का मन बना लिया है। भाजपा सत्ता से बाहर हो रही है और कांग्रेस सत्ता में वापस आ रही है।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जब उन्हें सरकार चलाने का मौका मिला, तब हरियाणा विकास के विभिन्न मानकों, मसलन-प्रति व्यक्ति आय, निवेश, कानून-व्यवस्था, रोजगार सृजन, किसानों और गरीबों का कल्याण सहित अन्य में काफी आगे था।
उन्होंने आरोप लगाया, “लेकिन आज राज्य काफी पिछड़ गया है। बेरोजगारी चरम पर है, अपराध बढ़ रहा है और लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।”
हुड्डा ने कहा कि जनता भाजपा के 10 साल के शासन से तंग आ चुकी है।
पारदर्शी प्रशासन, समान विकास और योग्यता के आधार पर भर्तियां सुनिश्चित करने के भाजपा के दावों की आलोचना करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, “हर कोई जानता है कि विकास के संबंध में उनके दावे खोखले हैं और इस सरकार ने कई घोटाले किए हैं। हालांकि, उन्हें ‘इवेंट मैनेजमेंट’ में महारत हासिल है और वे हमेशा अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश करते हैं।”
हुड्डा ने कांग्रेस के सत्ता में लौटने पर बुजुर्गों के लिए पेंशन दोगुनी करने, दो लाख ‘रिक्त’ पदों को भरने, 300 यूनिट मुफ्त बिजली और 500 रुपये में गैस सिलेंडर देने तथा सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का भरोसा दिलाया है।
भाजपा ने गढ़ी सांपला-किलोई में रोहतक जिला परिषद की अध्यक्ष मंजू हुड्डा (35) को मैदान में उतारा है।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ने को एक चुनौती के रूप में देखती हैं, मंजू ने कहा, “(जिला परिषद अध्यक्ष के तौर पर) मैं लोगों के बीच रही हूं और उनका काम करवा रही हूं। मैंने विकास सुनिश्चित किया है। इसलिए, मैं इसे चुनौती के रूप में नहीं देखती।”
भाजपा प्रत्याशी ने कहा, “मैं जो कड़ी मेहनत कर रही हूं, उस पर मुझे पूरा भरोसा है। मुझे यकीन है कि लोग मुझे अपना आशीर्वाद जरूर देंगे।”
नामांकन वापसी की अंतिम तिथि से पहले इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो), जननायक जनता पार्टी (जेजेपी), ‘आप’ और कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों सहित कुल 11 उम्मीदवार गढ़ी सांपला-किलोई से मैदान में थे।
निर्दलीय उम्मीदवारों में 26 वर्षीय अमित हुड्डा शामिल हैं, जो वाणिज्य में स्नातक हैं और वर्तमान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं।
अमित हुड्डा कहते हैं, “मैं गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से आता हूं और यह मेरा पहला चुनाव है। मैं हमेशा अपने दादाजी से प्रेरित रहा हूं, जिन्होंने काफी समाज सेवा की। मैं भी अपने लोगों के लिए कुछ करना चाहता हूं, इसलिए मैंने चुनाव लड़ने का फैसला किया।”
इस बीच, कांग्रेस समर्थक राजेंद्र ने दावा किया कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा भारी अंतर से जीतेंगे, क्योंकि गढ़ी सांपला-किलोई उनका गढ़ है। हालांकि, एक भाजपा समर्थक ने दावा किया कि मंजू हुड्डा विजयी होंगी, क्योंकि उन्हें अपने काम और राज्य में भाजपा सरकार द्वारा किए गए विकास के कारण बड़े पैमाने पर लोगों, खासकर युवाओं का समर्थन हासिल है।
भाषा पारुल