अदालत के आदेश पर एएसआई ने भोजशाला परिसर का सर्वेक्षण शुरू किया
राजकुमार
- 22 Mar 2024, 10:11 PM
- Updated: 10:11 PM
धार (मप्र), 22 मार्च (भाषा) भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल धार जिले में स्थित विवादास्पद भोजशाला/कमल मौला मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण किया और कार्बन-डेटिंग उपकरण का उपयोग करने की तैयारी की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
छह सप्ताह के भीतर 'वैज्ञानिक सर्वेक्षण' करने के मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 15 सदस्यीय एएसआई टीम ने वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए संबंधित स्थल को तैयार किया।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 11 मार्च को एएसआई को धार जिले के विवादास्पद भोजशाला परिसर का छह सप्ताह के भीतर वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया था।
एएसआई के संरक्षित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को हिन्दू वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला की मस्जिद बताते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि सर्वेक्षण के पहले दिन के दौरान, मुस्लिम समुदाय के सदस्य कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए एकत्र हुए।
एएसआई के सात अप्रैल 2003 को जारी एक आदेश के तहत हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है जबकि मुसलमानों को हर शुक्रवार को इस जगह पर नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।
स्थानीय अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज सहित पारंपरिक प्रथाएं निर्बाध रूप से जारी रहेंगी।
धार के पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिंह ने पुष्टि की कि एएसआई के काम के दौरान इन धार्मिक गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी।
मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक आशीष गोयल एएसआई के दल के साथ मौजूद थे। गोयल ने संवाददाताओं को बताया कि एएसआई दल ने दोपहर तक काम किया और फिर परिसर से वह चला गया।
गोयल ने कहा, "आज उन्होंने (एएसआई अधिकारियों ने) सर्वेक्षण करने के लिए जमीनी स्तर की तैयारी की। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, टीम द्वारा जीपीएस और कार्बन-डेटिंग उपकरण जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।"
उन्होंने कहा कि उनके जैसे याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रमुख संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के सदस्य भी सर्वेक्षण के दौरान मौजूद थे।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि एएसआई टीम को आवश्यक सभी साजो-सामान उपलब्ध कराये गये। सिंह ने कहा, "अभ्यास के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं और शहर में शांति है।"
इस बीच, इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ मुस्लिम समुदाय द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) एक अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई है।
‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील शिरीष दुबे ने संवाददाताओं से कहा कि चूंकि उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जैसा कि उनके वकीलों ने बताया है, ऐसे में, उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार सर्वेक्षण जारी रहेगा।
सर्वेक्षण के दौरान अधिकृत मुस्लिम प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए 'शहर काजी' वकार सादिक ने एएसआई की अधिसूचना प्रक्रिया पर चिंता जताई।
उन्होंने मस्जिद के रूप में स्थल की पहचान के संबंध में ऐतिहासिक रिकॉर्ड और पिछली अदालती प्रतिक्रियाओं पर जोर दिया।
सादिक ने कहा कि 1902 और 1903 की एएसआई रिपोर्ट उसके रिकॉर्ड में हैं और पहली रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि "यह एक मस्जिद है"।
उन्होंने कहा, ‘‘1998 में बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों की ओर से विमल कुमार गोधा द्वारा उच्च न्यायालय में फिर से एक याचिका दायर की गई। तब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। उस समय जवाब दाखिल किया गया था कि यह कमाल मौला मस्जिद है और भोजशाला का अस्तित्व एक रहस्य है।’’
उन्होंने कहा कि यह जवाब उच्च न्यायालय के रिकॉर्ड में है और एएसआई इस मुद्दे पर अपने रुख से पीछे नहीं हट सकता।
उच्चतम न्यायालय द्वारा उल्लेख किए जाने के बाद भी मामला सुनवाई के लिए नहीं लिये जाने पर उन्होंने कहा कि तारीखें आगे-पीछे होती रहती हैं और समुदाय को सुनवाई का मौका मिलेगा।
भाषा सं दिमो