कर्नाटक : भाजपा विधायक मुनिरत्न उत्पीड़न, रिश्चत और जाति सूचक टिप्पणी के आरोप में हिरासत में लिए गए
धीरज प्रशांत
- 14 Sep 2024, 09:06 PM
- Updated: 09:06 PM
बेंगलुरु, 14 सितंबर (भाषा) कर्नाटक विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य मुनिरत्न को उत्पीड़न, धमकी और जाति आधारित दुर्व्यवहार करने के आरोप में दर्ज दो प्राथमिकियों के सिलसिले में शनिवार को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि राजराजेश्वरीनगर से विधायक मुनिरत्न के खिलाफ शुक्रवार को व्यालिकावल पुलिस थाने में दो मामले दर्ज किए गए।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने उन्हें हिरासत में ले लिया है। उन्हें कोलार से हिरासत में लिया गया और उन्हें बेंगलुरु लाया जा रहा है, जिसके बाद उनके खिलाफ दर्ज मामलों के सिलसिले में उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जाएगा।’’
इस बीच, भाजपा की राज्य इकाई ने अनुशासन तोड़ने का हवाला देते हुए मुनिरत्न को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और उनसे पांच दिनों के भीतर अनुशासन समिति के समक्ष उनपर लगे आरोपों को लेकर स्पष्टीकरण देने को कहा है।
बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के ठेकेदार चेलुवराजू की शिकायत पर मनिरत्न के खिलाफ दर्ज पहली प्राथमिकी में विधायक पर 30 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और राशि न मिलने पर अनुबंध समाप्त करने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
चेलुवराजू ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि शुरुआत में मुनिरत्न ने उनसे 2021 में ठोस अपशिष्ट निपटान अनुबंध के लिए 20 लाख रुपये की मांग की, लेकिन अपशिष्ट प्रबंधन अनुबंध के लिए 10 ‘ऑटो ट्रिपर’ प्राप्त करने के वास्ते भुगतान करने के बावजूद, नगर निकाय ने इन वाहनों को उपलब्ध कराने की स्वीकृति नहीं दी।
प्राथमिकी के मुताबिक, चेलुवराजू को विधायक ने बार-बार परेशान किया और कथित तौर पर गाली गलौज व मारपीट की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विधायक ने उन्हें अपना काम करने की अनुमति नहीं दी और सितंबर 2023 में उन्हें थप्पड़ भी मारा।
पुलिस के अनुसार, ठेकेदार को कथित तौर पर धमकाने, गाली देने और परेशान करने के मामले में विधायक के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों सहित तीन अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
चेलुवराजू ने आरोपी विधायक के साथ फोन पर हुई बातचीत की कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सार्वजनिक की है।
पुलिस ने बताया कि विधायक के खिलाफ दूसरी प्राथमिकी बीबीएमपी पार्षद की शिकायत पर दर्ज की गई। पार्षद ने आरोप लगाया है कि विधायक ने जाति सूचक अपशब्द कहे तथा उनके परिवार का अपमान किया। विधायक ने कथित तौर पर चेलुवराजू से कहा कि वह पार्षद की जाति के कारण उनसे न जुड़ें।
पुलिस के मुताबिक, मामले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
बाद में, मुनिरत्न ने एक वीडियो संदेश जारी की कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप ‘सत्य से कोसों दूर’ हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ पिछले 15 साल में किसी ठेकेदार या आम आदमी की तरफ से ऐसा कोई आरोप नहीं लगा कि मुनिरत्न ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। लोकसभा चुनाव और नतीजों के बाद मेरे खिलाफ साजिश रची गई।’’
विधायक ने कहा कि देवराज उर्स ट्रक टर्मिनल्स लिमिटेड में हर महीने 15 लाख रुपये की अनियमितता की शिकायत मिलने पर उन्होंने जांच की मांग करते हुए एक पत्र लिखा था और उसी दिन से उनके खिलाफ साजिशें शुरू हो गईं।
मनिरत्न ने कहा, ‘‘किसी की भी आवाज निकाली जा सकती है... प्रौद्योगिकी उन्नत हो चुकी है। उनका इरादा मुझे जेल भेजने का है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पता था कि लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद मेरे बुरे दिन आने वाले हैं। यह उस व्यक्ति का संयुक्त अभियान है जो विधानसभा चुनाव में मुझसे हार गयी थीं (कांग्रेस की कुसमा एच) और डी. के. सुरेश (कांग्रेस) जो डॉ. मंजूनाथ (बेंगलुरु ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार) से हार गये थे। इसलिए ठेकेदार चेलुवराजू का इस्तेमाल किया गया है।’’
मुनिरत्न ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता ने अब तक 20 लोगों के खिलाफ अत्याचार के मामले दर्ज कराए हैं। विधायक ने कहा कि उन्होंने वोक्कालिगा और दलित समुदाय या उससे संबंधित लोगों के खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी या बात नहीं की है।
भाजपा पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में आरोप लगाया, ‘‘कर्नाटक भाजपा के नेता जो रीति-रिवाजों और संस्कृति की बात करते हैं, पहले अपने विधायक मुनिरत्न का चेहरा साफ करें और शहर को बताएं। भाजपा का नारा कि हम सभी हिंदू हैं, केवल चुनावी मौसम तक ही सीमित है।’’
कथित वायरल ऑडियो का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मुनिरत्न ने दलित और वोक्कालिगा समुदाय को बहुत ही अभद्र टिप्पणी कर अपमानित किया है, पैसे की मांग की और पैसे न देने पर ठेकेदार को जान से मारने की धमकी दी। ये सभी बहुत गंभीर प्रकृति के अपराध हैं।’’
मुख्यमंत्री ने सवाल किया, ‘‘भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई.विजयेंद्र और नेता प्रतिपक्ष आर.अशोक जो मीडिया के सामने खड़े होकर राज्य की कानून-व्यवस्था के बारे में उपदेश देते हैं, क्या उनमें अपने ही गुंडे विधायक मुनिरत्न के सामने खड़े होकर बोलने का साहस है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘अब भाजपा नेताओं के पास दो विकल्प हैं। पहला, मुनिरत्न के बयान का समर्थन करें और स्वीकार करें कि वे दलित विरोधी हैं या फिर देश के दलित समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और उन्हें पार्टी से निष्कासित करें।’’
भाषा धीरज