धरनास्थल पहुंचीं ममता का चिकित्सकों से काम पर लौटने का आग्रह, प्रदर्शनकारी बोले-समझौता नहीं करेंगे
जोहेब पवनेश
- 14 Sep 2024, 06:38 PM
- Updated: 06:38 PM
(फोटो के साथ)
कोलकाता, 14 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार जारी गतिरोध के बीच शनिवार को अचानक कनिष्ठ चिकित्सकों के धरनास्थल पर पहुंचीं और उन्हें मांगों पर गौर करने तथा दोषी मिलने पर किसी को नहीं बख्शे जाने का आश्वासन दिया।
साल्ट लेक में स्वास्थ्य भवन के बाहर प्रदर्शनकारी चिकित्सकों को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि चिकित्सक बारिश के बीच सड़क पर धरना दे रहे हैं। यह बात उन्हें परेशान कर रही है और इसकी वजह से वह सो नहीं पा रही हैं। उन्होंने अपने दौरे को संकट को हल करने का "अंतिम प्रयास" बताया।
बनर्जी ने कहा कि वह उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएंगी क्योंकि वह लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाने में विश्वास नहीं रखतीं व “बंगाल उत्तर प्रदेश नहीं है।”
हालांकि, मुख्यमंत्री के जाने के बाद आंदोलनकारी चिकित्सकों ने कहा कि वे बातचीत होने तक अपनी मांगों को लेकर समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि गतिरोध जल्द खत्म होने वाला नहीं है।
बनर्जी पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार के साथ अचानक अपराह्न करीब एक बजे सेक्टर 5 स्थित धरनास्थल पर पहुंचीं।
बनर्जी ने कहा, ‘‘मैं आपसे मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि आपकी ‘दीदी’ के तौर पर मिलने आई हूं।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं आपको आश्वासन देती हूं कि आपकी मांगों पर गौर करूंगी और अगर कोई दोषी पाया गया तो कार्रवाई करूंगी।’’
उन्होंने धरने पर बैठे चिकित्सकों से काम पर लौटने का आग्रह करते हुए कहा कि वह उनके साथ अन्याय नहीं होने देंगी।
बनर्जी ने कहा, “यह संकट खत्म करने के लिए उनका आखिरी प्रयास है।”
बनर्जी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने चिकित्सकों के काम पर लौटने के लिए 10 सितंबर की समयसीमा तय की थी और वह नहीं चाहतीं कि प्रदर्शनकारी चिकित्सकों को परेशानी उठानी पड़े।
उन्होंने कहा, "इस मामले पर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई होगी। मैं नहीं चाहती कि आप लोगों को परेशानी हो... अगर आप मुझ पर भरोसा रखते हैं, तो मैं आपकी शिकायतों पर गौर करूंगी।"
उन्होंने कहा, "अगर आप काम पर लौटना चाहते हैं, तो मैं आपसे वादा करती हूं कि आपकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। मैं अकेले सरकार नहीं चलाती। मैं आपकी मांगों पर मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी के साथ चर्चा करूंगी।"
बनर्जी ने सीबीआई से आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चिकित्सक से बलात्कार और हत्या के मामले की जांच जल्द पूरी करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, "दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। अगर कोई दोषी पाया गया तो मैं निश्चित रूप से कार्रवाई करूंगी। मुझे बस इतना ही कहना है।"
बनर्जी ने प्रदर्शनकारियों से "सीबीआई से बात करने" के लिए कहा, जो बलात्कार व हत्या मामले की जांच कर रही है।
बनर्जी ने कहा कि जब जूनियर डॉक्टर सड़क पर थे, तो वह भी यह सुनिश्चित करने के लिए जाग रही थीं कि वे सुरक्षित रहें।
उन्होंने कहा, "शुक्रवार को पूरी रात बारिश हुई। जिस तरह से आप यहां बैठे हैं, मैं उससे आहत हूं। मैं भी पिछले 34 दिन से रात-रात भर नहीं सोई हूं। क्योंकि अगर आप सड़क पर हैं, तो मुझे भी एक 'गार्ड' के रूप में जागना होगा।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों को खत्म करने के लिए आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने कहा, "मैं आपके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करूंगी। यह उत्तर प्रदेश नहीं है। उन्होंने एस्मा लागू कर दिया था और सभी तरह की हड़तालों व रैलियों पर रोक लगा दी थी। लेकिन निश्चिंत रहें, मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी। मैं डॉक्टरों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई के खिलाफ हूं। मुझे पता है कि आप नेक काम करते हैं। वरिष्ठों (डॉक्टरों) को आपकी जरूरत है। मेरे प्रस्ताव के बारे में सोचें। अगर मैं आपके साथ खड़े होने के लिए इस विरोध स्थल पर आ सकती हूं, तो मैं न्याय भी सुनिश्चित कर सकती हूं और आपकी मांगों को सुन सकती हूं।"
उन्होंने कहा, "मैं लोकतांत्रिक आंदोलनों का सम्मान करती हूं। मैं भी छात्र आंदोलनों से राजनीति में आई हूं और सिंगूर भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर रही हूं।"
बनर्जी ने यह घोषणा भी की कि सभी सरकारी अस्पतालों की रोगी कल्याण समितियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, "सभी अस्पतालों की रोगी कल्याण समितियों को भंग कर दिया जाएगा और नई समितियां बनाई जाएंगी। आरजी कर की रोगी कल्याण समिति को भी भंग किया जा रहा है। नई समितियों का नेतृत्व प्राचार्य करेंगे। इसमें कनिष्ठ चिकित्सक, वरिष्ठ चिकित्सक, नर्स और पुलिस के प्रतिनिधि होंगे। मैंने यह फैसला किया है।"
प्रदर्शनकारी चिकित्सकों पर हमला करने की साजिश रचे जाने के आरोपों का जिक्र करते हुए बनर्जी ने आंदोलनकारी डॉक्टरों से "अजनबियों द्वारा दी गई कोई भी चीज न खाने" का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री के वहां से चले जाने के बाद प्रदर्शनकारी चिकित्सकों ने कहा कि जब तक बातचीत नहीं हो जाती, वे अपनी मांगों को लेकर समझौता नहीं करेंगे।
एक चिकित्सक ने कहा, "हम मुख्यमंत्री के कदम का स्वागत करते हैं और बातचीत के लिए तैयार हैं। हम भी इस गतिरोध को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन जब तक चर्चा नहीं हो जाती, हम अपनी मांगों को लेकर समझौता नहीं करेंगे।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के साथ किसी भी बैठक का सीधा प्रसारण होना चाहिए।
मंगलवार से ही चिकित्सक राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय स्वास्थ्य भवन के बाहर डेरा डाले हुए हैं। उनकी मांगों में सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था कायम करना और आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला चिकित्सक से बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में शीर्ष अधिकारियों को हटाना शामिल है।
जूनियर चिकित्सक एक महीने से ज़्यादा समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है। सरकार ने दावा किया है कि विरोध प्रदर्शन के कारण कथित तौर पर इलाज न होने से 29 लोगों की मौत हो गई है।
भाषा जोहेब