आईसीएमआर ने मनुष्यों पर नैदानिक परीक्षणों के पहले चरण को आगे बढ़ाने के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए
सुरेश माधव नेत्रपाल
- 14 Sep 2024, 06:29 PM
- Updated: 06:29 PM
नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने देश के नैदानिक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए मनुष्यों पर नैदानिक परीक्षणों के पहले चरण को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रायोजकों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओए) को औपचारिक रूप दिया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘ये समझौते चार महत्वपूर्ण अणुओं के लिए मनुष्यों पर प्रथम नैदानिक परीक्षणों में एक अभूतपूर्व प्रवेश को चिह्नित करते हैं।’’
बयान में कहा गया, ‘‘यह पहल भारत को फार्मास्युटिकल एजेंटों के नैदानिक विकास में अग्रणी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’’
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने आईसीएमआर और प्रमुख उद्योग एवं शैक्षणिक भागीदारों के बीच रणनीतिक सहयोग की सराहना की तथा इसे सभी नागरिकों के लिए किफायती एवं सुलभ अत्याधुनिक उपचार की खोज में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
उन्होंने कहा कि यह पहल भारत को स्वास्थ्य सेवा नवाचार में वैश्विक अगुआ के रूप में उभरने की स्थिति में ले जाएगी।
आईसीएमआर के महानिदेशक, सचिव डॉक्टर राजीव बहल ने परियोजना की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर देते हुए कहा, ‘‘यह सहयोग रणनीतिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भारत में नैदानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’’
बयान में कहा गया, ‘‘हमारा लक्ष्य इस नेटवर्क का और विस्तार करना है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भारत अभिनव और किफायती स्वास्थ्य सेवा समाधानों के विकास में अग्रणी बना रहे।’’
डॉ. बहल ने आईसीएमआर की पहलों के व्यापक प्रभाव पर भी प्रकाश डाला, जैसे कि चरण-1 क्लिनिकल ट्रायल के लिए नेटवर्क, इंटेंट नेटवर्क और मेडटेक मित्र, जो सरकार के ‘विकसित भारत’ दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। उन्होंने भारत बायोटेक के सहयोग से कोवैक्सीन के विकास में आईसीएमआर की महत्वपूर्ण भूमिका का हवाला देते हुए कहा कि यह संगठन सभी के लिए किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
चरण-1 क्लिनिकल ट्रायल के लिए आईसीएमआर नेटवर्क में भारत भर में रणनीतिक रूप से स्थित चार संस्थान-केईएमएच और जीएसएमसी, मुंबई; एसीटीआरईसी, नवी मुंबई; एसआरएम एमसीएचएंडआरसी, कट्टनकुलथुर; और पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ शामिल हैं। इन्हें आईसीएमआर मुख्यालय, नयी दिल्ली में एक केंद्रीय समन्वय इकाई द्वारा समर्थन प्राप्त है।
बयान में कहा गया कि इस नेटवर्क को प्रारंभिक चरण के नैदानिक परीक्षण करने की भारत की क्षमता बनाने और बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें कहा गया कि प्रत्येक परीक्षण स्थल पर मजबूत बुनियादी ढांचे और समर्पित मानव शक्ति द्वारा समर्थित नैदानिक परीक्षण सुचारू और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करते हैं। इन समझौतों पर हस्ताक्षर आईसीएमआर द्वारा प्रमुख उद्योग खिलाड़ियों के साथ विकसित की गई मजबूत साझेदारी को मजबूत करते हैं।
बयान के अनुसार, ‘‘यह भारत में एक मजबूत नैदानिक परीक्षण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने, प्रारंभिक चरण के परीक्षणों से लेकर विपणन तक नयी दवाओं को विकसित करने की क्षमता को बढ़ावा देने और अंततः सभी के लिए सस्ती, उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा के मिशन को आगे बढ़ाने को लेकर संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय संसाधनों पर निर्भरता कम हो सके।’’
भाषा सुरेश माधव