अपमानजनक टिप्पणी के लिए भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई करने का एनजीओ का आयोग से आग्रह
अमित सुरेश
- 12 Sep 2024, 08:29 PM
- Updated: 08:29 PM
नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक गैर-सरकारी संगठन नेशनल सेंटर फॉर प्रोमोशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपल (एनसीपीईडीपी) ने हरियाणा में चुनाव प्रचार के दौरान दिव्यांग व्यक्तियों के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर निर्वाचन आयोग से राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक उम्मीदवार के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को संबोधित एक पत्र में, एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने एक कथित वीडियो को लेकर चिंता जताई, जिसमें सफीदों निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार राम कुमार गौतम अपने चुनाव प्रचार के दौरान दिव्यांगता का उल्लेख करते हुए आपत्तिजनक शब्द "लंगड़ा" का इस्तेमाल करते हुए दिखायी दे रहे हैं।
एनजीओ ने पत्र में कहा है कि इस तरह की भाषा न केवल अत्यंत अपमानजनक है, बल्कि सम्मान और समावेशिता के सिद्धांतों के भी विपरीत है, जिसे राजनीतिक दलों से बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।
संगठन ने इस बात पर भी जोर दिया कि गौतम की टिप्पणी दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के साथ-साथ निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का भी उल्लंघन करती है।
आयोग द्वारा जारी दिसंबर 2023 के परामर्श का हवाला देते हुए, एनसीपीईडीपी ने कहा कि राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधियों को भाषणों या सार्वजनिक बयानों में दिव्यांगता के अपमानजनक संदर्भों से बचना चाहिए।
परामर्श में विशेष रूप से दिव्यांगता से संबंधित शब्दों का उपयोग अक्षमता को दर्शाने या रूढ़िवादिता को बनाए रखने के लिए करने के खिलाफ चेतावनी दी गई है। इसमें कहा गया है कि उल्लंघन होने पर दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम की धारा 92 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
पत्र में लिखा है, ‘‘एनसीपीईडीपी अपमानजनक भाषा के उपयोग की कड़ी निंदा करता है, विशेष रूप से राजनीतिक क्षेत्र में, जिसमें नेताओं को गरिमा और सम्मान का उदाहरण स्थापित करना चाहिए।’’
एनजीओ ने आयोग से इस मुद्दे को तत्काल समाधान करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि इस तरह के उल्लंघनों का उचित परिणाम भुगतना पड़े।
दिव्यांग अधिकार समूह ने जींद में भाजपा नेता राम कुमार गौतम और चेन्नई में आध्यात्मिक नेता महा विष्णु द्वारा कथित तौर पर दिव्यांगों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने के मद्देनजर सार्वजनिक हस्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
एनसीपीईडीपी ने इन बयानों की निंदा की तथा इन्हें व्यापक सामाजिक उदासीनता का हिस्सा बताया, जो दिव्यांगों के प्रति पूर्वाग्रह को बढ़ावा देता है।
एनसीपीईडीपी ने एक बयान में चेन्नई पुलिस की सराहना की, जिसने महा विष्णु को शीघ्र गिरफ्तार कर लिया। महा विष्णु ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि दिव्यांगता "पिछले जन्मों के बुरे कृत्यों" का परिणाम होता है।
इस बीच, एनसीपीईडीपी ने दावा किया कि गौतम ने दिव्यांगों के बारे में बोलते समय "लंगड़ा" और "रिजेक्टेड माल" जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने कहा, "ऐसे बयान हानिकारक सामाजिक दृष्टिकोण को मजबूत करते हैं।" उन्होंने भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) से दिव्यांगों के संबंध में सम्मानजनक भाषा को अनिवार्य करने वाले दिशानिर्देश लागू करने का आग्रह किया।
अली ने दिव्यांगता को व्यक्तिगत विफलता या कर्म के रूप में पेश करने वाले विमर्श की भी आलोचना की और इस बात पर जोर दिया कि दिव्यांगों के सामने असली बाधाएं सामाजिक हैं।
यूसीएमएस और जीटीबी अस्पताल में सक्षम इकाई के समन्वयक प्रोफेसर डॉ. सतेंद्र सिंह ने टिप्पणियों को न केवल क्रूर, बल्कि बेहद अज्ञानतापूर्ण बताया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दिव्यांगता को "बुरे कर्म" के लिए जिम्मेदार ठहराना कैसे व्यक्तियों को अमानवीय बनाता है।
उन्होंने बताया कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 92(ए) जैसे कानूनों के बावजूद दिव्यांगों के खिलाफ अभद्र भाषा जारी है।
पेरिस पैरालिंपिक में भारत के उल्लेखनीय प्रदर्शन के बाद इस मुद्दे ने ध्यान आकर्षित किया है, जहां खिलाड़ियों ने 29 पदक जीते।
इन उपलब्धियों की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके मंत्रियों ने प्रशंसा की।
चेन्नई में विष्णु की टिप्पणियों की व्यापक निंदा की गई, जिसके कारण उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। हालांकि उनकी टीम के एक सदस्य ने माफी मांगी, लेकिन दिव्यांग अधिकार पैरोकारों ने दलील दी कि नुकसान पहले ही हो चुका है। अली ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां हानिकारक रूढ़ियों को बढ़ावा देती हैं।
गौतम के बयानों के जवाब में, एनसीपीईडीपी ने निर्वाचन आयोग के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें इसके दिशानिर्देशों का हवाला दिया गया है, जो दिव्यांगों व्यक्तियों के बारे में चर्चा करते समय सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल करने को अनिवार्य बनाते हैं।
मौजूदा कानूनी प्रावधानों के बावजूद, कार्यकर्ताओं ने दिव्यांगों के खिलाफ अभद्र भाषा के लिए कम दोषसिद्धि होने की आलोचना की। उन्होंने दिव्यांगता से संबंधित अपराध संबंधी डेटा की कमी की भी आलोचना की, क्योंकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ऐसे अपराधों पर विशिष्ट रिकॉर्ड नहीं रखता है।
दिव्यांग अधिकार समूह अब भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और पूरे भारत में दिव्यांगों की गरिमा की रक्षा के लिए कानूनों के सख्त प्रवर्तन का आग्रह कर रहे हैं।
भाषा अमित