प्रधानमंत्री के सीजेआई के आवास पर गणेश पूजा में शामिल होने पर विवाद, भाजपा ने साधा विपक्ष पर निशाना
ब्रजेन्द्र नरेश
- 12 Sep 2024, 04:05 PM
- Updated: 04:05 PM
नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ के आवास पर गणपति पूजा समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शामिल होने को लेकर पैदा विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दलों ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उनकी प्रतिक्रियाओं को ‘लापरवाही भरा’ बताया और कहा कि शीर्ष अदालत पर ‘निराधार आक्षेप’ लगाना एक खतरनाक मिसाल पेश करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को यहां सीजेआई के आवास पर गणपति पूजा में भाग लिया था।
इस समारोह से संबंधित एक वीडियो में चंद्रचूड़ और उनकी पत्नी कल्पना दास अपने घर पर मोदी का स्वागत करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
सीजेआई के आवास पर मोदी के पूजा में शामिल होने पर विपक्ष के कई नेताओं और उच्चतम न्यायालय के कुछ वकीलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में आश्चर्य जताया कि सीजेआई के आवास पर एक धार्मिक आयोजन में प्रधानमंत्री के भाग लेने पर भी कुछ लोग राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल किया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इफ्तार पार्टी का आयोजन करते थे तो क्या उसमें प्रधान न्यायाधीश नहीं आते थे?
उन्होंने कहा, ‘‘जब इफ्तार पार्टी में चीफ जस्टिस और प्रधानमंत्री बैठ सकते हैं, गुफ्तगू कर सकते हैं, एक टेबल पर बैठकर जब दोनों की बात हो सकती है... वह भी एक त्यौहार है, यह भी एक त्यौहार है। दोनों त्योहारों के बीच यह अंतर क्यों?’’
पात्रा ने कहा कि यह आपत्ति दोनों के मिलने से नहीं है बल्कि गणपति पूजा से है।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ मूर्खतापूर्ण, बिके हुए, तथाकथित धर्मनिरपेक्ष हैं जो इस तरह की शिष्टाचार मुलाकातों पर आपत्ति करते हैं। लेकिन इस महान लोकतंत्र की परिपक्वता इतनी व्यापक है जो इस प्रकार की ‘अपरिपक्व और बचकानी’ बातों को अस्वीकार करता है।
इससे पहले, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि जब ‘संविधान के रक्षक नेताओं से मिलते हैं’ तो लोगों के मन में संदेह पैदा होता है।
इसके साथ ही उन्होंने यह मांग उठायी कि सीजेआई को शिवसेना और राकांपा विधायकों से संबंधित अयोग्यता याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लेना चाहिए।
राउत ने मुंबई में संवाददाताओं से कहा, ‘‘भारत के प्रधान न्यायाधीश को खुद को मामलों की सुनवाई से अलग कर लेना चाहिए क्योंकि प्रधानमंत्री के साथ उनके संबंध सामने आ चुके हैं। क्या वह हमें न्याय दे सकते हैं?’’
शिव सेना (यूबीटी) और एकनाथ शिंदे नीत शिव सेना कानूनी विवाद में उलझे हुए हैं और बाल ठाकरे द्वारा स्थापित पार्टी में विभाजन के बाद यह मामला उच्चतम न्यायालय में है।
वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत से समझौता किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुख्य न्यायाधीश की स्वतंत्रता पर से सारा भरोसा उठ गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एससीबीए (सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन) को कार्यपालिका से सीजेआई की स्वतंत्रता से सार्वजनिक रूप से किए गए समझौते की निंदा करनी चाहिए।’’
पात्रा ने संवाददाता सम्मेलन में सवाल किया, ‘‘आप क्या चाहते हैं? क्या लोकतंत्र के अलग-अलग खंभें मिल नहीं सकते? क्या वे दोस्त नहीं हो सकते? क्या उन्हें दुश्मन होना चाहिए? क्या उन्हें एक-दूसरे से बातचीत नहीं करनी चाहिए? क्या उन्हें एक दूसरे से हाथ नहीं मिलाना चाहिए? क्या उन्हें एक दूसरे के प्रति सम्मान नहीं रखना चाहिए?’’
उन्होंने कहा, ‘‘सीजेआई और भारत के प्रधानमंत्री का एक दूसरे के प्रति कैसा व्यवहार होना चाहिए? क्या एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराना नहीं चाहिए? क्या एक-दूसरे के प्रति सद्भाव नहीं होना चाहिए? यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। तभी तो हम दूसरे राष्ट्रों से अच्छे हैं। जिन राष्ट्रों में लोकतंत्र नहीं है, उनमें किस प्रकार का व्यवहार न्यायपालिका के साथ किया जाता है और हमारे हमारे देश में काम करते समय अलग व्यवहार और काम से अलहदा उससे अलग हटकर, अलग व्यवहार। यही लोकतंत्र की खूबसूरती होती है।’’
पात्रा ने कहा कि उन्हें आश्चर्य होता है कि सीजेआई से देश के प्रधानमंत्री मिलते हैं तो उस पर आपत्ति जताई जाती है लेकिन अमेरिका में भारत विरोधी इल्हान उमर से मुलाकात (कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुलाकात) से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘देश के चुने हुए प्रधानमंत्री और सीजेआई के बीच संवाद होता है तो आपत्ति कैसे हो सकती है?’’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश इतने अपरिपक्व नहीं है कि संविधान के संदेश को ना समझते हों।
उन्होंने कहा, ‘‘इतनी बुद्धि विपक्ष के पास होनी चाहिए। मगर बुद्धि तो है पर वह खलबुद्धि है। इस कारण इस प्रकार के प्रश्न चिन्ह उठाए जा रहे हैं।’’
इस बीच, जयसिंह के पोस्ट पर पलटवार करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी एल संतोष ने कहा कि हालांकि वामपंथी उदारवादियों ने प्रधान न्यायाधीश के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के शामिल होने पर रोना शुरू कर दिया है लेकिन ‘यह घुलना-मिलना (लोगों से) नहीं बल्कि शुद्ध रूप से गणपति पूजा’ थी।
संतोष ने जयसिंह की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘रोना शुरू हो गया!!!! सभ्यता, सौहार्द, एकजुटता, देश की यात्रा में सहयात्री... सभी इन वामपंथी उदारवादियों के लिए अभिशाप हैं। इसके अलावा, यह कोई घुलना-मिलना नहीं था बल्कि शुद्ध रूप से गणपति पूजा थी, जिसे पचाना बहुत मुश्किल है। एससीबीए कोई नैतिक दिशा निर्देशक नहीं है।’’
एक अन्य पोस्ट में संतोष ने लिखा, ‘‘कल की एक पूजा और आरती ने देश भर में कई लोगों की नींद, सुबह की वॉक और चाय नाश्ता बिगाड़ दिया!!!!’’
शिव सेना के राज्यसभा सदस्य मिलिंद देवड़ा ने भी आलोचकों पर निशाना साधा और कहा कि गणपति आरती के लिए प्रधान न्यायाधीश के आवास पर प्रधानमंत्री मोदी के दौरे पर ‘लापरवाह टिप्पणी’ देखना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया, ‘‘जब फैसले उनके पक्ष में होते हैं तो विपक्ष उच्चतम न्यायालय की विश्वसनीयता की प्रशंसा करता है लेकिन जब चीजें उनके अनुकूल नहीं होती हैं तो वे आसानी से दावा करते हैं कि न्यायपालिका से समझौता किया गया है।’’
देवड़ा ने कहा, ‘‘विपक्ष द्वारा सीजेआई की विश्वसनीयता को कमतर करने का यह लापरवाह प्रयास न केवल गैर जिम्मेदाराना है बल्कि संस्थान की अखंडता को भी नुकसान पहुंचाता है। भारत की राजनीति एक बदसूरत मोड़ ले रही है।’’
उन्होंने कहा कि मनमानी न्यायिक नियुक्तियों का युग चला गया है और मौजूदा सीजेआई ने बेहद ईमानदारी के साथ अपने पद पर काम किया है।
देवड़ा ने कहा, ‘‘जो लोग उनकी विरासत और विश्वसनीयता को धूमिल करना चाहते हैं, वे खराब निर्णय का नमूना पेश कर रहे हैं और राष्ट्र के सर्वोत्तम हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।’’
भाजपा के सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि चंद्रचूड़ के आवास पर गणपति पूजन में प्रधानमंत्री के शामिल होने के बाद पूरी कांग्रेस और कम्युनिस्ट पारिस्थितिकी तंत्र में हलचल मच गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘इन्हीं संदिग्धों ने इसे धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक माना जब डॉ मनमोहन सिंह ने इफ्तार पार्टियों की मेजबानी की और तत्कालीन सीजेआई इसमें शामिल हुए।’’
मालवीय ने कहा, ‘‘उनकी समस्या केवल प्रधानमंत्री और सीजेआई के बीच का शिष्टाचार और सौहार्द नहीं है, बल्कि गणेश चतुर्थी है। कांग्रेस और कम्युनिस्टों को हमेशा हिंदू त्योहारों से दिक्कत रही है और अब उन्हें महाराष्ट्र से भी दिक्कत है, जो गणेश चतुर्थी को बड़े उत्साह के साथ मनाता है।’’
इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश के आवास पर गणपति पूजा समारोह में प्रधानमंत्री मोदी का शामिल होना एक संदेश देता है जो किसी को भी असहज करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हर संस्थान की स्वतंत्रता सिर्फ सैद्धांतिक नहीं होनी चाहिए, यह दिखाई देनी चाहिए। गणपति पूजा एक बहुत ही व्यक्तिगत मुद्दा है, आप कैमरे के साथ वहां जा रहे हैं। जो संदेश भेजा जा रहा है, वह असहज कर देता है।’’
उन्होंने आश्चर्य जताया कि प्रधानमंत्री मोदी और सीजेआई ने कार्यक्रम की तस्वीरें क्यों जारी कीं?
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