आरएसएस नेता से मुलाकात पर एडीजीपी ने मुख्यमंत्री कार्यालय को दिया स्पष्टीकरण
प्रशांत रंजन
- 07 Sep 2024, 08:45 PM
- Updated: 08:45 PM
तिरुवनंतपुरम, सात सितंबर (भाषा) केरल में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी एम आर अजित कुमार की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ नेता के साथ कथित मुलाकत पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) ने मुख्यमंत्री कार्यालय के समक्ष दिये स्पष्टीकरण में कहा कि उनकी मुलाकात व्यक्तिगत थी।
एडीजीपी के स्पष्टीकरण पर सत्तारूढ़ पार्टी की सहयोगी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और विपक्षी कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
मीडिया की खबरों के अनुसार मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के करीबी कुमार ने मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को स्पष्टीकरण दिया कि उन्होंने पिछले साल मई में त्रिशूर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से मुलाकात की थी, लेकिन स्पष्ट किया कि यह एक “निजी दौरा” था।
सीएमओ के एक सूत्र ने हालांकि कहा कि उनके पास एडीजीपी के स्पष्टीकरण के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है।
सबसे पहले इस गोपनीय बैठक के बारे में सवाल उठाने वाली विपक्षी कांग्रेस ने शीर्ष अधिकारी पर मुख्यमंत्री विजयन के ‘दूत’ के रूप में संघ नेता से मिलने का आरोप लगाया, वहीं सत्तारूढ़ माकपा ने यह रुख अपनाया कि इस मामले पर प्रतिक्रिया देने की उन्हें कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि एडीजीपी उनकी पार्टी के व्यक्ति नहीं हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस घटनाक्रम पर सतर्कतापूर्वक प्रतिक्रिया देते हुए आश्चर्य व्यक्त किया कि एक पुलिस अधिकारी और एक सार्वजनिक कार्यकर्ता के बीच बैठक में क्या गलत था।
भाजपा ने कांग्रेस के इस आरोप को खारिज कर दिया कि उसने त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र में अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए आईपीएस अधिकारी के समर्थन से पूरम उत्सव को बाधित करने के लिए मार्क्सवादी पार्टी के साथ साजिश रची थी।
सत्तारूढ़ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने विपक्षी कांग्रेस के इस आरोप को ‘झूठ और पूरी तरह निरर्थक’ करार दिया कि अजित कुमार ने मुख्यमंत्री और आरएसएस के बीच ‘मध्यस्थ’ के रूप में काम किया, ताकि त्रिशूर पूरम महोत्सव को बाधित करके त्रिशूर में भाजपा उम्मीदवार की लोकसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित की जा सके।
इस बीच एडीजीपी का स्पष्टीकरण वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) में दूसरे सबसे बड़े गठबंधन सहयोगी भाकपा को पसंद नहीं आया, जिसने आज कहा कि शीर्ष अधिकारी की आरएसएस नेता के साथ कथित मुलाकात लोगों के बीच संदेह पैदा करती है।
भाकपा के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने एडीजीपी के स्पष्टीकरण पर मीडिया में आई खबरों पर कड़ा रुख अपनाया और जानना चाहा कि एडीजीपी ने आरएसएस की शाखा विज्ञान भारती के संगठनात्मक नेताओं के साथ कौन सा ज्ञान साझा किया था।
नेता ने पत्रकारों से कहा कि राज्य के लोगों को स्वाभाविक रूप से यह जानना चाहेंगे कि एडीजीपी ने आरएसएस नेताओं से मुलाकात क्यों की और गुप्त बैठक का क्या कारण था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और आरएसएस में राजनीति या विचारधारा सहित कुछ भी समान नहीं है।
एडीजीपी द्वारा दिए गए कथित स्पष्टीकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने कहा कि उन्होंने अजित कुमार और आरएसएस नेता के बीच बैठक के बारे में जो कुछ भी बताया था, वह अब सच हो गया है।
उन्होंने आरोप लगाया, “एडीजीपी मुख्यमंत्री के संदेशवाहक के तौर पर आरएसएस नेता से मिलने गए थे। मुख्यमंत्री ने पहले भी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा मामलों को निपटाने के लिए केंद्र को प्रभावित करने के लिए पुलिस अधिकारियों का इस्तेमाल किया था।”
उन्होंने अपना आरोप दोहराया कि माकपा ने लोकसभा चुनावों में भाजपा की मदद करने के लिए त्रिशूर पूरम को बाधित करने के लिए पुलिस का इस्तेमाल किया था।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन ने एडीजीपी के कथित स्पष्टीकरण पर सवाल उठाया।
उन्होंने पूछा, “कौन सी व्यक्तिगत मुलाकात। संघ एक ऐसा संगठन है जो एलडीएफ और यूडीएफ दोनों का समान रूप से विरोधी है। मुख्यमंत्री के अधीन एक आईपीएस अधिकारी ने ऐसे संगठन के राष्ट्रीय नेता से मुलाकात की थी। क्या उन्हें मुलाकात से पहले मुख्यमंत्री या पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सूचित नहीं करना चाहिए था।”
माकपा के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने पूछा कि अगर एडीजीपी ने किसी से मुलाकात की है, तो पार्टी को इसका जवाब देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
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