उत्कृष्ट शिक्षण गीता के ज्ञान को ध्वनित करता है: यूजीसी अध्यक्ष
संतोष दिलीप
- 06 Sep 2024, 10:45 PM
- Updated: 10:45 PM
कुरुक्षेत्र, छह सितंबर (भाषा) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि गीता में भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए मार्गदर्शन की तरह उत्कृष्ट शिक्षण में छात्रों को सोचने, सवाल करने और खुद का निर्णय लेने की आजादी देना शामिल है।
कुमार यहां सीनेट हॉल में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 17वें गोयल पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि थे।
वैज्ञानिकों को उनके असाधारण कार्य के लिए सम्मानित करने के लिए 1990 में अमेरिका में बसे एक अनिवासी भारतीय (एनआरआई) दिवंगत राम एस गोयल द्वारा गोयल पुरस्कार की स्थापना की गई थी।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कुमार ने इस बात पर प्रकाश डाला कि गीता की भूमि की शिक्षाएं उत्कृष्ट शिक्षण का सार प्रस्तुत करती हैं।
कुमार ने पवित्र ग्रंथ का हवाला देते हुए कहा, ‘‘महाभारत की शुरुआत में भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं, मैंने तुम्हें वह सब कुछ बता दिया है जिसके बारे में तुम्हें जानना आवश्यक था, लेकिन अब तुम तय करो कि तुम क्या करना चाहते हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह वही है जो एक महान शिक्षक छात्रों के साथ करता है। वे छात्रों को सोचने, सवाल करने और खुद को और अपने आसपास की दुनिया को जानने की आजादी देते हैं।’’
उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के 10 प्रतिशत से अधिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर भारतीय शिक्षा प्रणाली से आने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अब भी इस प्रणाली में और सुधार करना है, ताकि 50 प्रतिशत से अधिक कंपनियों का नेतृत्व भारतीयों के पास हो।’’
इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति और गोयल पुरस्कार आयोजन समिति के अध्यक्ष सोम नाथ सचदेवा ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि वैज्ञानिक अपने शानदार वैज्ञानिक शोध से लोगों के जीवन को सार्थक और बेहतर बनाते हैं।
सचदेवा ने यह भी घोषणा की कि गोयल शांति पुरस्कार शीघ्र ही इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ को प्रदान किया जाएगा।
सचदेवा ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के वैज्ञानिकों को प्रस्ताव दिया कि यदि संस्थान हरियाणा में एक विज्ञान अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की योजना बनाता है, तो कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय 100 एकड़ भूमि आवंटित करने के लिए तैयार है।
गोयल पुरस्कार आयोजन समिति के सह-अध्यक्ष प्रोफेसर एसपी सिंह ने कहा कि गोयल पुरस्कार 1992 से वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण शोध को मान्यता दे रहे हैं।
भीम सिंह (प्रोफेसर एमेरिटस), आईआईटी दिल्ली, बेंगलुरु स्थित आईआईएससी के प्रोफेसर शांतनु भट्टाचार्य, आईआईएससी के ‘माइक्रोबायोलॉजिकल और सेल बायोलॉजी’ विभाग के प्रोफेसर वी. नागराज और आईआईएससी के ही ‘सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक एंड ओशनिक साइंसेज’ के प्रोफेसर एसके सतीश को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2021-22 के लिए गोयल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें से प्रत्येक को एक पदक, एक प्रशस्ति पत्र और दो लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया।
देश के चार वैज्ञानिकों, जिनकी उम्र 45 वर्ष से कम है, को युवा वैज्ञानिकों को दिये जाने वाले राजीब गोयल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इन युवा वैज्ञानकों में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, बेंगलुरु (एप्लाइड साइंसेज) के प्रोफेसर सप्तर्षि बसु, बेंगलुरु स्थित जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च के प्रोफेसर सेबास्टियन सी पीटर, आईआईटी कानपुर के जैविक विज्ञान और बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर बुशरा अतीक और भुवनेश्वर स्थित भौतिकी संस्थान के प्रोफेसर संजीब कुमार अग्रवाल शामिल हैं।
भाषा संतोष