वित्तीय अनियमितताओं के सिलसिले में आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्राचार्य, सहयोगियों के घरों पर छापेमारी
जोहेब नरेश
- 06 Sep 2024, 06:07 PM
- Updated: 06:07 PM
(फोटो के साथ)
कोलकाता, छह सितंबर (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कलकत्ता राष्ट्रीय मेडिकल कॉलेज में ‘डेटा एंट्री ऑपरेटर’ और आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष के करीबी माने जा रहे प्रसून चट्टोपाध्याय को अस्पताल में हुईं कथित अनियमितताओं के सिलसिले में शुक्रवार को हिरासत में ले लिया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
ईडी अधिकारियों को दोपहर करीब दो बजे चट्टोपाध्याय को दक्षिण 24 परगना जिले के सुभाषग्राम स्थित उनके आवास से बाहर लाते हुए देखा गया। इससे पहले अधिकारियों ने उनके घर पर सात घंटे से अधिक समय तक तलाशी अभियान चलाया ।
इसके बाद चट्टोपाध्याय को जिले के कैनिंग क्षेत्र के मध्य नारायणपुर ले जाया गया, जहां घोष ने कथित तौर पर तीन साल पहले दो बीघा जमीन पर करोड़ों रुपये का फार्म हाउस-बंगला बनवाया था। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घोष अपने परिवार के सदस्यों के साथ अक्सर वहां आते थे।
कथित तौर पर खुद को "घोष का निजी सहायक" बताने वाले चट्टोपाध्याय को भी नौ अगस्त के कथित वीडियो में आर.जी. कर अस्पताल के सेमिनार हॉल में भीड़ के बीच देखा गया था, जहां प्रशिक्षु चिकित्सक का शव मिला था।
कलकत्ता राष्ट्रीय मेडिकल कॉलेज (सीएनएमसी) के कर्मचारी चट्टोपाध्याय कथित तौर पर अपने आधिकारिक कार्यस्थल में उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करते थे, लेकिन अपना दिन आरजी कर स्थित घोष के कार्यालय में बिताते थे।
चट्टोपाध्याय ने एजेंसी के अधिकारियों के साथ अपने घर से बार निकलते हुए पत्रकारों से कहा, “मैंने ईडी के अधिकारियों के सभी सवालों का जवाब दे दिया है।”
उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
चट्टोपाध्याय के पड़ोसी भी अपने घरों से बाहर आ गए और ‘हमें न्याय चाहिए’ नारे लगाते हुए देखे गए।
अधिकारी ने बताया कि ईडी की छापेमारी शुक्रवार सुबह से कोलकाता और उसके उपनगरों में कम से कम नौ स्थानों पर एक साथ शुरू किए गए तलाशी अभियान का हिस्सा थी। यह छापेमारी आरजी कर अस्पताल में घोष के प्राचार्य रहते हुईं कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में की गई है।
घोष और उनके तीन अन्य सहयोगियों को इसी मामले में तीन सितंबर को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया था। ईडी ने घोष के खिलाफ प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है, जो आपराधिक मामलों में दर्ज होने वाली प्राथमिकी के समान है।
सुभाषग्राम के अलावा, पूर्वी कोलकाता में घोष के बेलियाघाट आवास और शहर के उत्तरी इलाके में हवाईअड्डा गेट नंबर 2 के पास मिलन पल्ली इलाके में उनके रिश्तेदारों के दो अपार्टमेंट पर भी छापा मारा गया।
बेलियाघाट में ईडी अधिकारियों को करीब तीन घंटे इंतजार के बाद सुबह साढ़े नौ बजे घोष के घर में प्रवेश की अनुमति मिली। घोष की पत्नी ने केंद्रीय एजेंसी की टीम के लिए ताले खोले।
उन्होंने कहा, "मेरे पति के खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं। समय आने पर उनकी बेगुनाही साबित हो जाएगी।"
ईडी के अधिकारी गिरफ्तार मेडिकल उपकरण आपूर्तिकर्ता बिप्लब सिन्हा के आवास और हावड़ा के संकरैल में उसी मोहल्ले में कौशिक कोले के घर भी पहुंचे। कोले सिन्हा की कंपनी में अकाउंटेंट के तौर पर काम करते थे।
मिलन पल्ली में ईडी अधिकारियों ने पूर्वाह्न करीब 11:30 बजे घोष की भाभी अर्पिता बेरा और उनके पति प्रीतिन के स्वामित्व वाले और किराए पर लिए गए दो अपार्टमेंट में तलाशी अभियान शुरू किया।
एक पड़ोसी ने बताया कि सरकारी प्रतिष्ठानों में चिकित्सक होने के कारण बेरा दंपत्ति ने परिसर में एक दूसरा अपार्टमेंट किराए पर ले रखा था, जहां घोष अक्सर आते थे।
छापेमारी के दौरान ईडी के एक अधिकारी को एक अपार्टमेंट से काले रंग का ट्रॉली बैग ले जाते देखा गया।
ईडी अधिकारियों की एक अन्य टीम सुबह करीब सात बजे हुगली के बैद्यबाटी में घोष के ससुराल वालों के पते पर पहुंची और संपत्ति को बंद पाकर पड़ोस में कुणाल रॉय के घर पहुंची, जो मेडिकल क्षेत्र में काम करने वाली एक निजी कंपनी में काम करते हैं।
पूर्वी कोलकाता के मदुरदाहा में लाउंड्री के मालिक अंकुर रॉय के घर की भी एजेंसी ने तलाशी ली। रॉय का नाम कथित तौर पर गिरफ्तार संदिग्धों से पूछताछ के दौरान सामने आया था। ईडी अधिकारियों ने कोलकाता के कैमक स्ट्रीट में क्रिसेंट मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर की भी तलाशी ली।
विनिर्माण और आपूर्ति से जुड़ी इस कंपनी का घोष के प्राचार्य रहते आर.जी. कर अस्पताल के साथ कथित तौर पर लेन-देन था।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच 23 अगस्त को राज्य द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) से लेकर सीबीआई को स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय ने यह फैसला अस्पताल के पूर्व उपाधीक्षक डॉ. अख्तर अली की याचिका पर लिया था, जिन्होंने घोष के कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के कई आरोपों की ईडी से जांच कराने का अनुरोध किया था।
घोष ने फरवरी 2021 से सितंबर 2023 तक प्राचार्य के रूप में काम किया। अक्टूबर 2023 में उन्हें आरजी कर से कुछ समय के लिए स्थानांतरित किया गया था, लेकिन एक महीने में उन्हें बहाल कर दिया गया था।
अली ने चिंता जताई थी कि आरजी कर अस्पताल में चिकित्सक की मौत का संबंध भ्रष्टाचार से हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि संभवत: पीड़िता को कदाचार के बारे में पता था और उसने इसे उजागर करने की धमकी दी होगी।
भाषा जोहेब