कोचिंग सेंटर में छात्रों की मौत का मामला : अदालत ने जमानत याचिकाओं पर सीबीआई से जवाब मांगा
अमित माधव
- 05 Sep 2024, 04:39 PM
- Updated: 04:39 PM
नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने ओल्ड राजेंद्र नगर में कोचिंग सेंटर के बेसमेंट के सह-मालिकों की जमानत याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा। बेसमेंट मालिक अभी जेल में हैं।
गत जुलाई में इसी बेसमेंट में पानी भर जाने से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले तीन छात्रों की डूबने से मौत हो गई थी।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने बेसमेंट के सह-मालिकों परविंदर सिंह, तजिंदर सिंह, हरविंदर सिंह और सरबजीत सिंह की जमानत याचिकाओं पर एजेंसी को नोटिस जारी किया और उससे जवाब दाखिल करने को कहा।
न्यायमूर्ति शर्मा ने नोटिस जारी करते हुए कहा, ‘‘यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी।’’
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों - उत्तर प्रदेश की श्रेया यादव (25), तेलंगाना की तान्या सोनी (25) और केरल के नेविन डेल्विन (24) - की हादसे में मृत्यु हो गई थी, जब 27 जुलाई की शाम को मध्य दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में भारी बारिश के कारण राऊ आईएएस स्टडी सर्किल की इमारत के बेसमेंट में पानी में भर गया था।
मामले की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) समेत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की अन्य धाराओं के तहत जांच की जा रही है। उच्च न्यायालय ने मामले की जांच का जिम्मा दिल्ली पुलिस से सीबीआई को सौंप दिया है।
आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने माना कि घटना वास्तव में "दुखद" थी, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि उनके मुवक्किलों ने केवल बेसमेंट और एक अन्य मंजिल को कोचिंग सेंटर को लीज पर दिया था और इसलिए उन्हें मौतों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने सवाल किया, ‘‘कानून के एक निष्पक्ष छात्र के रूप में, मैं जिम्मेदार हो सकता हूं, हां, लेकिन किस हद तक?"
उन्होंने कहा कि राऊ आईएएस स्टडी सर्किल को बेसमेंट किराए पर देते समय, चारों भाइयों ने कभी नहीं सोचा होगा कि किसी की मौत हो जाएगी। माथुर ने कहा कि इस समय याचिका केवल जमानत के लिए है, न कि आरोपमुक्त करने के लिए। उन्होंने कहा कि चारों आरोपी लगभग छह सप्ताह से हिरासत में हैं।
इस बात पर जोर देते हुए कि माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ायी के लिए कोचिंग सेंटर में भेजते हैं, न्यायाधीश ने कहा कि वर्तमान मामला "कोई साधारण मामला नहीं होना चाहिए" और मकान मालिकों को अपनी संपत्ति किराये पर देने से पहले चार बार सोचना चाहिए।
अदालत ने कहा, ‘‘ऐसा क्यों हुआ? आपको इस बारे में भी सोचना होगा। आप मुझे बताइये कि भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। यह कोई साधारण मामला नहीं होना चाहिए।’’
अदालत ने कहा, ‘‘आपने अपनी संपत्ति को व्यावसायिक और कोचिंग उद्देश्य से किराये पर दिया है..अदालत केवल यही चाहती है कि अगली बार जब कोई मकान मालिक किराये पर दे, तो उसे चार बार सोचना चाहिए।’’
अदालत ने सीबीआई के वकील से बेसमेंट के सह-मालिकों की जवाबदेही के संबंध में "ठोस सबूत" देने को कहा, जैसा कि उसने आरोप लगाया है और जानना चाहा कि क्या शहर के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
माथुर ने दावा किया कि सीबीआई ने मामले में "एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) के एक भी डिप्टी कमिश्नर को हाथ नहीं लगाया है।’’ उन्होंने एजेंसी "चुनिंदा तरीके से काम नहीं कर सकती।’’
सीबीआई के वकील ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी शहर के अधिकारियों और उस क्षेत्र में जलभराव के मुद्दे की भी जांच कर रही है, जिसे एक व्यक्ति ने पहले भी उठाया था और आशंका जतायी थी कि वहां ऐसी त्रासदी हो सकती है।
अदालत ने कहा, ‘‘क्या एमसीडी सो रही थी? उन्होंने इसे सील क्यों नहीं किया? पुलिस क्या कर रही थी?’’
सीबीआई के वकील ने कहा कि एजेंसी "एक एक करके कदम उठा रही है।’’
न्यायमूर्ति शर्मा ने सीबीआई से कहा कि वह पीठ के समक्ष वे सबूत पेश करे जो उसने आरोपियों की "मंशा" को दिखाने के लिए जुटाए हैं।
अदालत ने कहा, ‘‘मिंटो ब्रिज में हर साल जलभराव होता है। अगर कोई शिकायत है, तो हर अधिकारी पर (बीएनएस धारा 105 के तहत) कार्रवाई की जाएगी? ठोस सबूत दीजिए.. आप एक प्रमुख एजेंसी हैं। आपको ठोस सबूत लेकर आना होगा, ऐसा नहीं चलेगा कि (चीजें) हवा में हो।’’
मामले की अगली सुनवायी 11 सितंबर को करना तय करते हुए अदालत ने मृत छात्रों में से एक के पिता को जमानत याचिकाओं पर "संक्षिप्त जवाब" दाखिल करने की अनुमति भी दी।
एक सत्र अदालत ने पहले आरोपियों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था और कहा था कि सीबीआई जांच प्रारंभिक चरण में है और हादसे में उनकी विशिष्ट भूमिका का पता लगाया जाना है।
उच्च न्यायालय में दायर आवेदन में, सह-मालिकों में से एक ने कहा है कि निचली अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार करते हुए इस बात पर गौर नहीं किया कि सह-मालिकों ने कोचिंग सेंटर चलाने के लिए इमारत के बेसमेंट और तीसरी मंजिल को लीज पर दिया था, जो एमसीडी मानदंडों के तहत एक स्वीकार्य गतिविधि है, और उनका कभी भी ऐसा अपराध करने का इरादा नहीं था और न ही उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी थी।
याचिका में कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता केवल मकान मालिक है और किरायेदारों के प्रबंधन या दिन-प्रतिदिन के व्यवसाय में कोई भी भूमिका नहीं निभाता है। याचिकाकर्ता ने 05.01.2022 की लीज डीड के माध्यम से 01.01.2022 से शुरू होकर 9 वर्ष की अवधि के लिए राऊ आईएएस स्टडी सर्कल को संपत्ति किराये पर दी थी।’’ याचिका में कहा गया है, "यह उल्लेख करना उचित है कि ‘लीज डीड’ के अनुसार, कोचिंग सेंटर को अनुमेय मापदंडों के भीतर चलाने के लिए डीडीए, एमसीडी और अन्य स्थानीय अधिकारियों जैसे स्थानीय अधिकारियों से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के लिए पट्टेदार जिम्मेदार है।"
उन्होंने जमानत याचिका में कहा है कि निचली अदालत ने इस तथ्य पर विचार नहीं किया कि सह-मालिक, जिनका नाम प्राथमिकी में नहीं है, घटना के बाद स्वेच्छा से पुलिस थाने गए थे, जो स्पष्ट रूप से उनकी ईमानदारी को दर्शाता है।
भाषा अमित