पतंजलि आयुर्वेद के आचार्य बालकृष्ण ने न्यायालय में बिना शर्त माफी मांगी
प्रशांत माधव
- 21 Mar 2024, 09:03 PM
- Updated: 09:03 PM
नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) पतंजलि आयुर्वेद के आचार्य बालकृष्ण ने कई गंभीर बीमारियों के इलाज में औषधीय प्रभावकारिता का दावा करने वाली कंपनी के हर्बल उत्पादों का विज्ञापन करने और चिकित्सा की अन्य प्रणालियों को कमजोर करने के लिए उच्चतम न्यायालय में बिना शर्त माफी मांगी है।
शीर्ष अदालत ने 19 मार्च को योगगुरु रामदेव और बालकृष्ण को कंपनी के उत्पादों के विज्ञापनों और उनकी औषधीय प्रभावकारिता से संबंधित अवमानना कार्यवाही में जारी नोटिस का जवाब देने में कंपनी की विफलता पर आपत्ति जताते हुए दो अप्रैल को उसके समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था।
पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने 21 नवंबर, 2023 को शीर्ष अदालत को आश्वासन दिया था कि वह किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं करेगी, खासकर उसके द्वारा निर्मित और विपणन किए गए उत्पादों के विज्ञापन या ब्रांडिंग से संबंधित कानूनों का।
कंपनी ने न्यायमूर्ति हिमा कोहली की अध्यक्षता वाली पीठ को यह भी आश्वासन दिया था कि “औषधीय प्रभावकारिता का दावा करने वाला या चिकित्सा की किसी भी प्रणाली के खिलाफ कोई भी लापरवाही भरा बयान किसी भी रूप में मीडिया में जारी नहीं किया जाएगा।”
शीर्ष अदालत ने कहा था कि पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड “इस तरह के आश्वासन से बाध्य है”।
बालकृष्ण ने हलफनामे में कहा, “अभिसाक्षी (बालकृष्ण) कानून के शासन का सर्वोच्च सम्मान करता है और कानून का अक्षरशः पालन करने के लिए कर्तव्यबद्ध है। अभिसाक्षी को प्रश्नगत विज्ञापन पर खेद है।”
बालकृष्ण की तरफ से 19 मार्च को दाखिल हलफनामे में कहा गया, “प्रतिवादी संख्या 5 (पतंजलि) की ओर से अभिसाक्षी 21 नवंबर, 2023 के आदेश के पैरा 3 में दर्ज बयान के उल्लंघन के लिए इस माननीय न्यायालय के समक्ष बिना शर्त माफी प्रस्तुत करता है।”
बालकृष्ण ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसे विज्ञापन जारी नहीं किए जाएं।
हलफनामे में हालांकि कहा गया है कि कंपनी का इरादा देश के नागरिकों को पतंजलि उत्पादों का सेवन करके स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना भर था।
शीर्ष अदालत ने पतंजलि, रामदेव और बालकृष्ण पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें सुनवाई की अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष पेश होने को कहा था।
शीर्ष अदालत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें रामदेव द्वारा कोविड टीकाकरण अभियान और चिकित्सा की आधुनिक प्रणाली के खिलाफ बदनाम करने वाला अभियान चलाने का आरोप लगाया गया है।
भाषा प्रशांत