भारत, ब्रुनेई ने नौवहन की स्वतंत्रता पर जोर दिया, रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की
आशीष नरेश
- 04 Sep 2024, 04:35 PM
- Updated: 04:35 PM
(फोटो के साथ)
बंदर सेरी बेगवान, चार सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्रुनेई के सुल्तान हाजी हसनल बोलकिया के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद बुधवार को जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और ब्रुनेई ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत निरंतर नौवहन और उड़ान की स्वतंत्रता का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्धता जताई।
बयान में कहा गया है कि भारत और ब्रुनेई के द्विपक्षीय संबंधों को ‘‘साझेदारी’’ के स्तर पर ले जाने के संकल्प के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ब्रुनेई में स्थापित टेलीमेट्री ट्रैकिंग एवं टेलीकमांड (टीटीसी) केंद्र को जारी रखने के लिए ब्रुनेई दारुस्सलाम की भरपूर सराहना की। इस केंद्र से भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में जारी उसके प्रयासों में मदद मिली।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो अब 10वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है।
दक्षिण चीन सागर के दक्षिणी छोर पर ब्रुनेई की स्थिति के मद्देनजर ‘‘नौवहन की स्वतंत्रता’’ का संदर्भ महत्वपूर्ण है, जो समुद्री वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला मार्गों में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। हाल के दिनों में, दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपीन, जापान तथा अमेरिका समेत अन्य देशों के बीच अक्सर टकराव देखा गया है।
यह भारतीय प्रधानमंत्री की ब्रुनेई की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी जो दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) जयदीप मजूमदार ने कहा कि दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार और निवेश, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण, संस्कृति के साथ-साथ लोगों के बीच आदान-प्रदान सहित कई विषयों पर द्विपक्षीय वार्ता की।
मजूमदार ने कहा, ‘‘उन्होंने आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी), फिनटेक, साइबर सुरक्षा, नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावना तलाशने और उसे आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।’’
संयुक्त बयान के अनुसार, ‘‘दोनों नेताओं ने शांति, स्थिरता, समुद्री रक्षा और सुरक्षा को बनाए रखने एवं बढ़ावा देने के साथ नौवहन एवं उड़ान की स्वतंत्रता का सम्मान करने एवं अंतरराष्ट्रीय कानून विशेष रूप से समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) 1982 के अनुरूप निर्बाध वैध व्यापार की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।’’
दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों जैसे कि आसियान-भारत वार्ता संबंध, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, आसियान (दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन) क्षेत्रीय मंच, एशिया-यूरोप बैठक (एएसईएम) और संयुक्त राष्ट्र में सहयोग को मजबूत करने पर भी सहमति व्यक्त की।
बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने सभी प्रकार के आतंकवाद की निंदा की तथा इस पर जोर दिया कि किसी भी देश को अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं करने देना चाहिए।
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि मोदी ने ब्रुनेई दारुस्सलाम की वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ समिट (वीओजीएसएस) में निरंतर भागीदारी का स्वागत किया। यह भारत के नेतृत्व वाली पहल है जिसका उद्देश्य ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को विभिन्न मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को साझा करने के लिए एक साथ लाना है।
‘ग्लोबल साउथ’ का आशय कमजोर या विकासशील देशों के लिए किया जाता है।
बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने बंदर सेरी बेगवान और चेन्नई के बीच प्रस्तावित सीधी उड़ान सेवा का स्वागत किया, जो ‘‘लोगों के बीच मजबूत संबंध’’ को बढ़ावा देगी और दोनों देशों के बीच ‘‘व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने में मदद करेगी।’’
सिंगापुर के लिए रवाना होने से पहले मोदी ने ब्रुनेई की अपनी यात्रा को ‘‘सार्थक’’ बताया और कहा कि इससे ‘‘भारत-ब्रुनेई संबंधों को और भी मजबूत बनाने के लिए एक नए युग’’ की शुरुआत हुई है, जो हमारी धरती को बेहतर बनाने में योगदान देता है।
भाषा आशीष