मोहिनीअट्टम नृत्यांगना सत्यभामा की अपने सहयोगी कलाकार के लिए की गई नस्लीय टिप्पणी की निंदा
शफीक मनीषा
- 21 Mar 2024, 05:53 PM
- Updated: 05:53 PM
तिरुवनंतपुरम, 21 मार्च (भाषा) मशहूर मोहिनीअट्टम नृत्यांगना कलामंडलम सत्यभामा एक साक्षात्कार के दौरान अपने एक साथी कलाकार के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी को लेकर केरल में राजनेताओं और सांस्कृतिक संगठनों सहित समाज के विभिन्न वर्गों के निशाने पर आ गईं।
प्रसिद्ध मोहिनीअट्टम नर्तक डॉ. आरएलवी रामकृष्णन ने आरोप लगाया कि सत्यभामा ने यह टिप्पणियां उनके लिए की थीं और उन्होंने नृत्यांगना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की धमकी दी।
सत्यभामा ने रामकृष्णन के आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्होंने एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार में विशेष रूप से किसी का नाम नहीं लिया।
इंटरव्यू के दौरान सत्यभामा ने कहा था, ‘‘जो व्यक्ति मोहिनीअट्टम करता है उसे ‘मोहिनी’ (आकर्षक) होना चाहिए। उनका रंग कौवे जैसा है। मेरी राय में, पुरुषों को मोहिनीअट्टम तभी करना चाहिए जब वे अच्छे दिखते हों।’’
66 वर्षीय सत्यभामा के साक्षात्कार का उक्त हिस्सा समाचार चैनलों पर प्रसारित होने के बाद कई नेताओं के अलावा सोशल मीडिया पर भी लोगों ने नृत्यांगना की निंदा की।
राज्य के मंत्री आर. बिंदू और वीना जॉर्ज के अलावा केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन ने बयान की निंदा की। कांग्रेस ने त्रिशूर जिले के चलाकुडी शहर में विरोध मार्च निकाला।
रामकृष्णन चलाकुडी के रहने वाले हैं। वह प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता दिवंगत कलाभवन मणि के भाई हैं।
फेसबुक पर एक पोस्ट में, रामकृष्णन ने कहा कि सत्यभामा ने उनके खिलाफ नस्लीय दुर्व्यवहार जारी रखा है और आरोप लगाया है कि वह मोहिनीअट्टम सिखाने के लिए योग्य नहीं हैं।
रामकृष्णन ने कहा ‘‘मैंने त्रिपुनिथुरा के प्रसिद्ध आरएलवी कॉलेज में अपनी पढ़ाई पूरी की। मैंने एमजी विश्वविद्यालय से मोहिनीअट्टम में एमए किया जिसमें मैं प्रथम रैंक धारक हूं। मैं एमफिल में शीर्ष स्कोरर हूं और कलामंडलम से पीएचडी पूरी की है। यह पहली बार नहीं है जब मैंने उनके द्वारा किए गए अपमान का सामना किया है।’’
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की वजह से शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति के लिए रह पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा ‘‘ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’’
सत्यभामा ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि उन्होंने साक्षात्कार में किसी का नाम नहीं लिया था। उन्होंने कहा ‘‘मैंने साक्षात्कार में जो कहा, वह मेरी अपनी राय है और मैं उस पर कायम हूं। मुझे कोई पछतावा नहीं है।’’
भाषा शफीक