भाजपा ने जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक परिवारों को आतंकवाद पर खुली बहस की चुनौती दी
नोमान अविनाश
- 29 Aug 2024, 08:27 PM
- Updated: 08:27 PM
जम्मू, 29 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक्स पार्टी (पीडीपी) और कांग्रेस को आतंकवाद, हिंसा और जन सुरक्षा पर खुली चर्चा के लिए चुनौती दी। साथ ही पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में 1990 के दशक के अशांत दौर के लिए तीनों दलों की आलोचना की।
पार्टी ने कहा कि वह आतंकवाद और आम लोगों के हताहत होने को कतई सहन नहीं करने का रुख रखती है।
भाजपा के जम्मू-कश्मीर प्रभारी तरुण चुघ ने यहां संवाददाताओं से कहा, “ मैं गांधी-नेहरू, अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवारों को - जो दवाइयों की पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली दुकानों की तरह हैं - उनके और हमारे कार्यकाल के दौरान आतंकवाद, सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा की स्थिति और अनुच्छेद 370 और 35 ए के बारे में उनके भ्रामक दावों और साजिशों पर खुली बहस के लिए चुनौती देता हूं।”
उन्होंने कहा, “हम कहीं भी खुली बहस के लिए तैयार हैं, जिसमें कोई एक पत्रकार मध्यस्थता करेगा और कोई टीवी चैनल इसका प्रसारण करेगा।” पार्टी ने केंद्र शासित प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए जम्मू में अपने मीडिया केंद्र का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम के दौरान चुघ ने कहा कि पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद आतंकवाद की घटनाओं और कानून-व्यवस्था के मुद्दों में उल्लेखनीय कमी आई है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा, “ पांच अगस्त 2019 के बाद से हमने न केवल आतंकवादियों को ढेर किया है और आतंकवाद को कम किया है, बल्कि आम लोगों और सुरक्षा बलों के कर्मियों के हताहत होने की संख्या तथा हिंसा की घटनाओं में भी भारी कमी की है।”
उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों के तहत हुई घटनाओं की वर्षवार जानकारी भी साझा की।
चुघ ने कहा, “ उनके (नेकां-कांग्रेस-पीडीपी) कार्यकाल के दौरान, नागरिकों के हताहतों होने की सालाना औसतन घटनाएं 60-70 थीं, जो 2018 में घटकर 55, 2023 में 24 और इस साल 14 हो गईं। आतंकवादी घटनाएं 2018 में 228 थी, जो 2023 में घटकर 46 रह गई और इनकी संख्या इस साल 11 पर आ गई।”
भाजपा नेता ने कहा, “ 2018 में मुठभेड़ों की संख्या 189 थी जो 2023 में घटकर 48 और इस साल 24 हो गई है। इसी तरह, सुरक्षा बलों के हताहतों होने की संख्या 2018 में 91 थी जो 2023 में घटकर 23 पर गई और अब 14 रह गई है। जान-माल की सुरक्षा के लिए हमारे प्रयास जारी हैं।”
उन्होंने स्थानीय राजनीतिक परिवारों पर अपने शासन में कश्मीर में पत्थरबाजी को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।
चुघ ने दावा किया, “उनके शासन में, पत्थरबाजी की प्रतिवर्ष लगभग 1,328 घटनाएं होती थीं, जो 2023 में घटकर शून्य हो गईं और इस वर्ष भी एक भी घटना नहीं हुई।”
उन्होंने कहा, “हमने न केवल आतंकवाद को कम किया है, बल्कि आतंकवादियों की आयु भी कम की है। हमने फर्जी मुठभेड़ों और निर्दोष लोगों की हत्याओं को भी खत्म कर दिया है। उन्हें अपने रिकॉर्ड के लिए जवाब देना होगा। मैं अब्दुल्ला को इस बहस के लिए तैयार होने की चुनौती देता हूं। मैं तैयार हूं।”
चुघ ने कांग्रेस से कैदियों की रिहाई और अनुच्छेद 370 को बहाल करने पर भी अपना रुख पूछा, जिसका जिक्र नेकां ने अपने घोषणापत्र में किया है।
उन्होंने पूछा, “डॉ. फारूक अब्दुल्ला और उनके श्रीनगर सांसद जम्मू-कश्मीर में 1990 की स्थिति और हिंसा को फिर से दोहराने की बात कर रहे हैं, जिसके कारण कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ था। क्या कांग्रेस इसका समर्थन करती है? क्या यह नेशनल कॉन्फ्रेंस का रुख है?”
भाजपा नेता ने कहा, “लोग मुफ्ती सईद और फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में 1990 की उथल-पुथल को नहीं भूले हैं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेल में बंद अलगाववादी यासीन मलिक को केंद्र में कांग्रेस के शासन में काफी तवज्जो दी गई थी और उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ फोटो खिंचवाई। “आतंकवादियों को सम्मानित किया गया और उनका हौसला बढ़ाया गया। क्या कांग्रेस उस दौर में वापस जाना चाहती है?”
भाषा
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