स्थायी श्रमशक्ति के साथ जिला कृषि मौसम विज्ञान इकाइयों को पुनर्जीवित करने की सरकार की योजना: अधिकारी
नेत्रपाल सुरेश
- 28 Aug 2024, 08:38 PM
- Updated: 08:38 PM
नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) सरकार जिला कृषि मौसम विज्ञान इकाइयों के नेटवर्क को पुनर्जीवित करने की योजना बना रही है, जो देश के लाखों किसानों को ब्लॉक-स्तर पर मौसम संबंधी विस्तृत जानकारी प्रदान करती थीं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस साल की शुरुआत में इन्हें बंद करने का निर्देश दिया था।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कांग्रेस सांसद जयराम रमेश समेत कई नेताओं ने इन इकाइयों को बंद किए जाने का विरोध किया था।
यह पूछे जाने पर कि क्या जिला कृषि मौसम विज्ञान इकाइयों (डीएएमयू) को पुनर्जीवित करने की कोई योजना है, एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मौसम के पूर्वानुमान में मानव बुद्धि महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, भले ही अब हम मॉडल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का उपयोग करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘डीएएमयू प्रकृति में अस्थायी थीं, कर्मचारियों को प्रत्येक परियोजना के हिसाब से नियुक्त किया जाता था। पदों की तदर्थ प्रकृति ने पूर्वानुमान की गुणवत्ता को प्रभावित किया। इस बार एक स्थायी संरचना होगी। श्रमशक्ति में स्थायी और संविदात्मक दोनों कर्मचारी शामिल होंगे। हमारा लक्ष्य प्रक्रिया को औपचारिक बनाना बनाना है।’’
सरकार ने 2015 में किसानों को फसल और स्थान-विशिष्ट विस्तृत सलाह प्रदान करने तथा उन्हें दिन-प्रतिदिन निर्णय लेने में सहायता करने के लिए ग्रामीण कृषि मौसम सेवा (जीएमएसवी) शुरू की थी।
पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहयोग से देश में कृषि-जलवायु क्षेत्रों में 130 कृषि मौसम क्षेत्र इकाइयां (एएमएफयू) स्थापित की गईं। प्रत्येक एएमएफयू के दायरे में चार से पांच जिले आते हैं।
सरकार ने 2018 में कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के परिसर में 530 जिला कृषि मौसम इकाइयां स्थापित करके सेवा की पहुंच बढ़ाने का निर्णय लिया था। हालांकि, कोविड महामारी ने इस प्रक्रिया को प्रभावित किया और केवल 199 डीएएमयू स्थापित की जा सकीं। इनमें से प्रत्येक में एसएमएस एग्रोमेट और एग्रोमेट ऑब्जर्वर के रूप में दो संविदा कर्मी थे।
आईएमडी ने 17 जनवरी को सभी डीएएमयू को पत्र लिखकर वित्त वर्ष 2023-24 के अंत तक अपना परिचालन बंद करने को कहा था।
सूत्रों के मुताबिक, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय चाहता है कि डीएएमयू का खर्च कृषि मंत्रालय वहन करे।
गडकरी ने पूर्व पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह को लिखे पत्र में कहा था कि डीएएमयू को बंद करने से कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और कृषक समुदाय की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
इस महीने की शुरुआत में, रमेश ने कहा था कि डीएएमयू को बंद कर दिया गया, क्योंकि नीति आयोग ने उनकी भूमिका को ‘‘गलत तरीके से प्रस्तुत’’ किया।
भाषा नेत्रपाल