कश्मीरी पंडितों ने राजनीतिक दलों से घाटी में उनके पुनर्वास की मांग पर ध्यान देने को कहा
आशीष सुरेश
- 28 Aug 2024, 06:19 PM
- Updated: 06:19 PM
(अनिल भट)
जम्मू, 28 अगस्त (भाषा) जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के नजदीक आते ही विस्थापित कश्मीरी पंडित कश्मीर घाटी में अपने गृह निर्वाचन क्षेत्रों से मीलों दूर होने के बावजूद मतदान करने के लिए उत्सुक हैं और वे चाहते हैं कि वापसी तथा पुनर्वास की उनकी प्राथमिक मांग पूरी की जाए।
आतंकवाद के बढ़ने के कारण 1990 में पलायन के बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में फैला यह समुदाय विधानसभा चुनावों में अपने एजेंडे के रूप में शांति, सुरक्षा और सम्मान के साथ घाटी में स्थायी बसावट की वकालत कर रहा है।
‘रेडियो शारदा’ के निदेशक रमेश हंगलू ने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में सभी ने चुनावों का स्वागत किया है। लोकतंत्र में हमेशा से विश्वास रखने वाले कश्मीरी पंडितों ने इसका स्वागत किया है। हमारी अपेक्षा है कि हमारे वोट का सही इस्तेमाल हो। निर्वाचन आयोग ने हमें जो अधिकार दिए हैं, उसके अनुसार हम मतदान केंद्रों पर जाएंगे और वोट डालेंगे।’’
हंगलू ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। हम राहत और पुनर्वास चाहते हैं और अंततः कश्मीर में अपने घरों को लौटना चाहते हैं। यह हमारी मुख्य मांग है। हम इस मांग पर दृढ़ रहना चाहते हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं।’’
समुदाय के सदस्यों को लंबे समय से लगता रहा है कि राजनीतिक दलों ने उनकी उपेक्षा की है और घाटी में वापसी एवं पुनर्वास के बारे में उनकी चिंताओं को दूर करने में विफल रहे हैं। वर्षों से वे कश्मीर में अपने बसने की वकालत करते रहे हैं, चाहे वह एक ही किसी खास स्थान पर हो या उत्तर, मध्य और दक्षिण कश्मीर में तीन अलग-अलग क्षेत्रों में फैला हो।
कश्मीरी पंडित आईटी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और व्यवसायी अरविंद कौल ने कहा, ‘‘देश में शरणार्थी के रूप में रह रहे कश्मीरी पंडित के रूप में मेरी बड़ी उम्मीदें हैं कि जो भी सरकार बने, उसे घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास को प्राथमिकता देनी चाहिए।’’
उन्होंने अफसोस जताया कि पिछले 30 वर्षों में ‘‘किसी भी सरकार ने हमारे मुद्दों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया।’’
कश्मीरी पंडितों का कहना है कि उन्होंने दशकों में कई बार विस्थापन झेला है। उनमें से कई लोगों का कहना है कि उनका असली घर कश्मीर में है, न कि घाटी के बाहर के स्थानों में, जहां उन्होंने विस्थापन के बाद से घर बना लिये हैं। उन्होंने कि वे अब भी खुद को अपनी ही भूमि पर शरणार्थी के रूप में देखते हैं।
प्रेम नाथ शास्त्री संस्कृत शोध संस्थान (पीएनएसएसएसएस) की प्रशासक रोहिणी ज्योति ने कहा, ‘‘हम सात बार पलायन का सामना कर चुके हैं, हमलों के कारण सात बार पलायन करना पड़ा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 1990 में पूरे समुदाय को घाटी से बाहर निकाल दिया गया था। तब से हम यहां शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। हमारे पास यहां घर हैं, लेकिन हम उन्हें घर नहीं कह सकते। यह हमारा जन्म स्थान नहीं है। सरकार को हमारी बात सुननी चाहिए। यह विचारधारा की लड़ाई है। अगर सरकार चाहे तो वह हमें घाटी में फिर से बसा सकती है और हमें कश्मीर वापस ला सकती है।’’
इस भावना को दोहराते हुए, हंगलू ने उनकी (कश्मीरी पंडितों की) वापसी के लिए एक सुविचारित योजना की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 30 वर्षों से इस पर चर्चा की जा रही है। लेकिन हमें अपनी शर्तों के तहत वापस लाने का तरीका महत्वपूर्ण है। हम घाटी में वापसी का समर्थन करते हैं, लेकिन क्रियान्वयन योजना महत्वपूर्ण है। यह एक दीर्घकालिक रणनीति होनी चाहिए, न कि केवल एक अस्थायी पुनर्वास। हमारी जड़ें वहां हैं, वहां एक अनुकूल माहौल होना चाहिए और हम सभी को इसके लिए काम करना चाहिए।’’
घाटी में समुदाय के पुनर्वास के इस गंभीर मानवीय मुद्दे को कथित रूप से कमजोर करने के लिए राजनीतिक दलों पर कटाक्ष करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता विकास रैना ने कहा, ‘‘तीन लाख कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया है। सरकारें केवल दिखावटी सेवा के माध्यम से इस मुद्दे का समाधान कर रही है।’’
चुनावों से पहले, राहत और पुनर्वास विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं कि कश्मीरी प्रवासी स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से मतदान कर सकें। निर्वाचन आयोग ने जम्मू, उधमपुर और दिल्ली में समुदाय के मतदाताओं के लिए डाक मतपत्र विकल्प के साथ 24 विशेष मतदान केंद्र स्थापित किए हैं।
जम्मू-कश्मीर के राहत एवं पुनर्वास आयुक्त अरविंद करवानी ने कहा, ‘‘दोनों विकल्पों के तहत मतदाताओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। जम्मू जिले में विभिन्न स्थानों पर 19 मतदान केंद्र, उधमपुर में एक और दिल्ली में चार मतदान केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।’’
घाटी में आगामी चुनावों में मतदान करने के लिए 1,00,000 से ज्यादा कश्मीरी प्रवासी पंजीकृत हैं। निर्वाचन आयोग ने 22 अगस्त को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें इन मतदाताओं के लिए मतदान के विकल्पों के बारे में विस्तार से बताया गया है। ऐसे मतदाता उधमपुर, दिल्ली और जम्मू में विशेष मतदान केंद्रों पर व्यक्तिगत रूप से या डाक मतपत्रों के जरिये मतदान कर सकते हैं।
भाषा आशीष