एसएनजेपीसी प्रस्तावों के गैर-अनुपालन पर 18 राज्यों के मुख्य सचिव, वित्त सचिव न्यायालय में पेश हुए
प्रशांत माधव
- 27 Aug 2024, 08:47 PM
- Updated: 08:47 PM
नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) न्यायिक अधिकारियों को वेतन, बकाया पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान पर द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग (एसएनजेपीसी) की सिफारिशों के अनुपालन की स्थिति के बारे में जानकारी देने के लिये 18 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव और वित्त सचिव मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में पेश हुए।
शीर्ष नौकरशाहों ने भविष्य में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
सर्वोच्च न्यायालय पूर्व न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के कल्याण एवं अन्य उपायों के क्रियान्वयन के संबंध में अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ (एआईजेए) की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
पश्चिम बंगाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने राज्य द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और निर्देशों के अनुपालन के बारे में जानकारी दी तो भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, ‘‘हमें राज्यों के मुख्य सचिवों, वित्त सचिवों को तलब करने में कोई खुशी नहीं होती लेकिन राज्यों के वकील सुनवाई के दौरान लगातार अनुपस्थित रहे हैं।’’
न्यायालय ने तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, असम, नगालैंड, मेघालय, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, केरल, बिहार, गोवा, हरियाणा और ओडिशा के शीर्ष नौकरशाह सीजेआई के अदालतकक्ष में पेश हुए और वकीलों की सहायता करते नजर आए।
कुछ मुख्य सचिवों ने 22 अगस्त तक अपने वकीलों के माध्यम से अदालत में पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से बचने का प्रयास किया, तथा कहा कि उन्होंने निर्देशों का काफी हद तक अनुपालन किया है, तथा डिजिटल माध्यम के जरिये उपस्थित होने की अनुमति देने का अनुरोध किया। पीठ ने हालांकि नरमी नहीं दिखायी और कहा कि वह कुछ नौकरशाहों के लिए अपवाद नहीं बना सकती।
सीजीआई ने 22 अगस्त को चेतावनी दी थी, “मैं देख सकता हूं कि कोई ठोस अनुपालन नहीं हुआ है। उन्हें व्यक्तिगत रूप से हमारे सामने पेश होना होगा या हम उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करेंगे।”
मंगलवार को पीठ 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपने चार जनवरी के फैसले और पहले के निर्देशों के अनुपालन से संतुष्ट थी और उसने कार्यवाही बंद कर दी थी।
उसने कहा कि शीर्ष नौकरशाहों को अब भौतिक रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है।
कुछ राज्यों के मामले में, न्यायालय ने कहा कि उनके संबंधित वित्त विभाग के प्राधिकारियों को न्यायिक अधिकारियों द्वारा उठाए गए वेतन, पेंशन और भत्ते से संबंधित बकाया दावों का चार सप्ताह के भीतर निपटारा करना होगा।
मामले में न्यायमित्र के रूप में पीठ की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने शुरुआत में कहा कि मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, मेघालय, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली जैसे कुछ राज्यों ने निर्देशों का पालन किया है।
इस पहलू को समाप्त करते हुए पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की व्यक्तिगत शिकायतों पर अब इस उद्देश्य के लिए गठित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की समिति द्वारा विचार किया जा सकता है।
भत्तों का भुगतान न होने जैसे लंबित मुद्दों को हल करने के लिए पीठ ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की समिति से हर महीने एक बार बैठक करने का आग्रह किया।
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