उच्चतम न्यायालय ने सीएक्यूएम अध्यक्ष से पराली जलाने, प्रदूषण से निपटने के योजना पूछी
अमित माधव
- 27 Aug 2024, 06:45 PM
- Updated: 06:45 PM
नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कर्मचारियों की कमी के कारण ठीक ढंग से काम नहीं कर पा रहे हैं और राष्ट्रीय राजधानी एवं आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए जिम्मेदार निकाय से आगामी सर्दियों के समय प्रदूषण और पराली जलाने से निपटने के लिए आगामी योजना बताने को कहा।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष को मामले की सुनवाई के दौरान डिजिटल तरीके से उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, "आज स्थिति यह है कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जिससे वे ठीक ढंग से काम नहीं कर पा रहे हैं...इसलिए हम सीएक्यूएम के अध्यक्ष से अनुरोध करते हैं कि वे सुनवाई की अगली तारीख पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उपस्थित रहें और बताएं कि आयोग कौन से कदम उठाना प्रस्तावित है।"
पीठ ने यह भी सवाल किया कि सीएक्यूएम द्वारा गठित की जाने वाली सुरक्षा और प्रवर्तन संबंधी उप-समिति, रिक्त पदों के कारण दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रतिनिधित्व की कमी के चलते कैसे काम करेगी।
पीठ ने पांचों एनसीआर राज्यों को रिक्त पदों को तत्काल भरने का निर्देश दिया, अच्छा हो यह 30 अप्रैल, 2025 से पहले हो।
पीठ ने सीएक्यूएम अध्यक्ष को एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया, जिसमें बताया जाए कि आयोग द्वारा वायु प्रदूषण के खतरे को रोकने के लिए क्या कदम उठाना प्रस्तावित है, जिसे अक्सर राष्ट्रीय राजधानी से सटे राज्यों में खेतों में धान की पराली जलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है। पीठ ने मामले की अगली सुनवायी 2 सितंबर को करना निर्धारित किया।
मामले में न्याय मित्र के रूप में न्यायालय की सहायता कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने सुनवाई के दौरान, पीठ को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में बड़ी संख्या में रिक्तियों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि सीएक्यूएम अधिनियम 2021 के तहत, आयोग को क्षेत्र में प्रदूषण को रोकने के लिए कदम उठाने और अपने निर्देशों को लागू करने के लिए दिल्ली-एनसीआर में राज्यों के प्रतिनिधियों वाली उप-समितियां बनाने का अधिकार है। सिंह ने कहा, "हम लगभग सितंबर में हैं और जल्द ही राज्य प्रदूषण बोर्ड के ठीक तरह से काम नहीं कर पाने के कारण पराली जलाने और प्रदूषण की समस्याएं सामने आएंगी। बड़ी संख्या में रिक्तियों के कारण, सीएक्यूएम द्वारा जारी निर्देशों को लागू करना मुश्किल होगा।"
पीठ ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की "खेदजनक स्थिति" पर अप्रसन्नता जतायी, जो वैधानिक निकाय हैं।
राजस्थान की ओर से पेश वकील ने कहा कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में स्वीकृत 808 पदों में से 395 पद खाली हैं। उन्होंने कहा, "395 पदों में से हम अगले दो महीनों में 115 पद भरेंगे, जिसके लिए प्रक्रिया जारी है। बाकी पदों को पदोन्नति के माध्यम से भरा जाना है और इसमें कुछ समय लगेगा।"
न्यायालय ने बड़ी संख्या में पदों के रिक्त होने पर नाखुशी जतायी की और चेतावनी दी कि यदि रिक्तियों को शीघ्रता से नहीं भरा गया तो वह राज्य प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष को तलब करेगा।
दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) में स्वीकृत 344 पदों में से 233 पद रिक्त हैं।
पीठ ने राजधानी में "खराब स्थिति" पर गौर किया और दिल्ली सरकार से 30 अप्रैल, 2025 तक इन रिक्तियों को भरने को कहा। उसने कहा कि पंजाब में स्वीकृत 652 पदों में से 314 रिक्त हैं और राज्य सरकार को 30 अप्रैल, 2025 तक सभी रिक्तियों को भरने का निर्देश दिया।
पीठ ने हरियाणा के लिए भी ऐसा ही आदेश जारी किया, जहां स्वीकृत 483 पदों में से 202 पद रिक्त हैं। उत्तर प्रदेश के मामले में पीठ को बताया गया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में लगभग 350 पद रिक्त हैं और उन्हें भरने के प्रयास जारी हैं।
भाषा अमित