प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के कई पूर्व सदस्यों ने विधानसभा चुनाव के लिए भरा नामांकन
धीरज संतोष
- 27 Aug 2024, 06:07 PM
- Updated: 06:07 PM
श्रीनगर, 27 अगस्त (भाषा) प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर के कई पूर्व सदस्यों ने केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा के लिए होने वाले चुनाव में किस्मत आजमाने के लिए मंगलवार को बतौर निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल किया।
कारागार में बंद अलगाववादी कार्यकर्ता सर्जन बरकती की ओर से उसकी बेटी सुगरा बरकती ने नामांकन पत्र दाखिल किया।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने की वजह से जमात चुनाव नहीं लड़ सकता लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उसने प्रतिबंध हटाए जाने पर चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेने की इच्छा जताई थी।
जमात ने 1987 के बाद से चुनाव में हिस्सा नहीं लिया है और अलगाववादी संगठनों के मंच हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का हिस्सा है जिसने 1993 से 2003 तक चुनावों का बहिष्कार करने की वकालत की थी।
जमात के पूर्व अमीर (प्रमुख) तलत मजीद ने बतौर निर्दलीय पुलवामा निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। मजीद ने कहा कि वर्ष 2008 के बाद से भू राजनीति में आए बदलाव के मद्देनजर उन्होंने महसूस किया कि पूर्व के अड़ियल रवैये को छोड़ने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘ वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए मुझे लगा कि अब समय आ गया है कि हम राजनीतिक प्रक्रिया में हिस्सा लें। मैं 2014 से ही अपने विचार खुलकर व्यक्त कर रहा हूं और आज भी उसी एजेंडे को आगे बढ़ा रहा हूं।’’
मजीद ने कहा कि जमात और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जैसे संगठनों की मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में निभाने के लिए भूमिका है। उन्होंने कहा, ‘‘ जब हम कश्मीर की बात करते हैं तो वैश्विक स्थिति को नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं। कश्मीरी होने के नाते हैं हमें वर्तमान में रहना चाहिए और (बेहतर) भविष्य की ओर देखना चाहिए।’’
जमात के एक और पूर्व नेता सायर अहमद रेशी भी कुलगाम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। रेशी ने मतदातओं से अपील की है कि वे अपनी अंतर आत्मा की आवाज के आधार पर मतदान करें।
उन्होंने कहा, ‘‘किसी व्यक्ति को आशीर्वाद देना या अपमानित करना अल्लाह पर निर्भर है... लेकिन मैं लोगों से अपील करूंगा कि वे अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट दें।’’
रेशी ने कहा, ‘‘हम सुधारों के लिए एक ऐतिहासिक आंदोलन शुरू करेंगे।’’ उन्होंने स्वीकार किया कि युवाओं को खेलों से परिचित कराकर उन्हें हिंसा से दूर किया गया है, लेकिन उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरियों की जरूरत है।
सर्जन बरकती 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद फैली हिंसा से चर्चा में आया था और इस चुनाव में शोपियां जिले से अपनी किस्मत आजमा रहा है।
सर्जन की ओर से उसकी बेटी सुगरा बरकती ने नामांकन पत्र दाखिल किया। सर्जन इस समय आतंकवाद के आरोपों में कारागार में है।
केंद्र सरकार द्वारा 2019 में अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने और पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के तहत मतदान तीन चरणों 18 सितंबर, 25 सितंबर और एक अक्टूबर को कराए जाएंगे और मतों की गिनती चार अक्टूबर को होगी।
भाषा धीरज