भाजपा ने भूखंड आवंटन विवाद में प्रियंक खरगे को कर्नाटक मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की
आशीष मनीषा
- 27 Aug 2024, 05:38 PM
- Updated: 05:38 PM
बेंगलुरु, 27 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को कर्नाटक के राज्यपाल को एक आवेदन देकर मंत्री प्रियंक खरगे को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि भूखंड का आवंटन प्रियंक के पिता और कांग्रेस अध्यक्ष एम मल्लिकार्जुन खरगे सहित उनके परिवार द्वारा संचालित एक ट्रस्ट को किया गया।
कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी टी नारायणस्वामी ने ‘‘भाई-भतीजावाद’’ का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि यह खरगे परिवार द्वारा अनुसूचित जाति (एससी) के उद्यमियों के प्रति आपराधिक विश्वासघात का मामला है।
हालांकि, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने भूखंड आवंटन का बचाव करते हुए कहा कि यह कानून के अनुसार किया गया है।
कांग्रेस नीत सरकार में इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि कुछ भी गड़बड़ी नहीं हुई है। उन्होंने भाजपा पर राज्यपाल से शिकायत करके राजनीति करने का आरोप लगाया।
नारायणस्वामी ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के दौरान उन्हें पत्र सौंपा। इसमें कहा गया है, ‘‘मैं अत्यंत दुख के साथ आपके संज्ञान में कर्नाटक सरकार में भाई-भतीजावाद का एक और मामला लाना चाहता हूं।’’
उन्होंने पत्र में कहा कि सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) द्वारा मार्च 2024 में नागरिक सुविधाओं (सीए) के लिए निर्धारित 45.94 एकड़ भूमि में से बेंगलुरु के पास हाईटेक डिफेंस एयरोस्पेस पार्क में एससी कोटे के तहत पांच एकड़ जमीन आवंटित की गई है।
नारायणस्वामी ने कहा कि ट्रस्ट के न्यासियों में मल्लिकार्जुन खरगे, उनकी पत्नी राधाबाई, बेटे और मंत्री प्रियंक खरगे, सांसद और दामाद राधाकृष्ण दोड्डामणि और छोटे बेटे राहुल खरगे शामिल हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि खरगे परिवार कैसे एयरोस्पेस उद्यमी बन गया। नारायणस्वामी ने कहा, ‘‘विभाग ने इस आवंटन के लिए मंजूरी कैसे दे दी? क्या मुख्यमंत्री ने मंत्री (उद्योग) को भूमि आवंटित करने के लिए मजबूर किया था?’’
भाजपा नेता नारायणस्वामी ने राज्यपाल से मामले की गंभीरता का संज्ञान लेने और ‘‘अनुसूचित जाति के योग्य उद्यमियों से एक और अवसर छीनने’’ के लिए प्रियंक खरगे को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ‘‘...यह खरगे परिवार द्वारा अनुसूचित जाति के उद्यमियों के प्रति आपराधिक विश्वासघात का मामला है और मेरा मानना है कि यह कर्नाटक सरकार में मंत्री के रूप में ली गई शपथ का उल्लंघन है।’’
भाजपा नेता और राज्यसभा सदस्य लहर सिंह सिरोया ने भी रविवार को खरगे परिवार द्वारा संचालित ट्रस्ट को केआईएडीबी के भूखंड के कथित आवंटन पर सवाल उठाए और पूछा कि वे जमीन के पात्र होने के लिए एयरोस्पेस उद्यमी कब बन गए।
उन्होंने यह भी सवाल किया था कि क्या यह मामला सत्ता के दुरुपयोग, भाई-भतीजावाद और हितों के टकराव से जुड़ा है।
सिरोया के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंक खरगे ने सोमवार को कहा कि आवंटित किया गया भूखंड औद्योगिक या वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए नहीं बल्कि शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। प्रियंक ने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य सीए साइट पर एक बहु कौशल विकास केंद्र स्थापित करना है। उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या यह गलत है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘एससी/एसटी संगठनों को आवंटित नागरिक सुविधा भूखंडों के लिए कोई सब्सिडी या रियायती दरें नहीं हैं। न्यासी अच्छी गुणवत्ता और सस्ती शिक्षा मुहैया कराने वाले संस्थानों की स्थापना और प्रबंधन से जुड़े रहे हैं।’’
प्रियंक ने मंगलवार को कहा कि भाजपा के पास ‘‘बुनियादी सामान्य ज्ञान की कमी है’’ कि सीए साइट को आवंटित या नीलाम नहीं किया जाता है; उन्हें केआईएडीबी और सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार खरीदना होता है।
उन्होंने कहा कि 193 भूखंड के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे और केवल 43 संगठनों ने आवेदन किया था। मंत्री ने कहा, ‘‘इसलिए भाई-भतीजावाद के आरोप निराधार हैं।’’
प्रेरणा ट्रस्ट, चाणक्य विश्वविद्यालय और राष्ट्रोत्थान सहित अन्य को भूखंड आवंटित करने के लिए पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों पर सवाल उठाते हुए प्रियंक ने कहा, ‘‘यहां हम सीए साइट खरीद रहे हैं, हमने कोई सब्सिडी या भुगतान में देरी या कोई अवैध चीज नहीं मांगी है। इसमें अवैध क्या है, मुझे समझ में नहीं आ रहा है। सिर्फ मुख्यमंत्री और मल्लिकार्जुन खरगे का नाम लेकर और राज्यपाल से शिकायत करके आप (भाजपा) राजनीति कर रहे हैं।’’
भूखंड आवंटन के बारे में आरोपों को लेकर पूछे जाने पर सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘यह कानून के अनुसार किया गया है। उनका ट्रस्ट पात्र है, इसलिए हमने ऐसा किया है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘भाजपा ने (सत्ता में रहते हुए) चाणक्य विश्वविद्यालय के लिए भूखंड का आवंटन कैसे किया? हमने इसे कानून के अनुसार किया है।’’
राज्यपाल से मुलाकात से पहले पत्रकारों से बातचीत में नारायणस्वामी ने कहा, ‘‘यह साफ तौर पर देखा जा सकता है कि भूखंड प्रभावशाली लोगों को दिए गए हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य आवेदनों को खारिज करते हुए खरगे परिवार को यह भूखंड आवंटित किया गया है। भाजपा नेता ने कहा, ‘‘यह भूखंड प्रभावशाली लोगों को आवंटित किया गया है, जिससे संदेह पैदा होता है। यहां ट्रस्ट में परिवार के सदस्य हैं, यह सार्वजनिक ट्रस्ट नहीं है। यह ट्रस्ट कलबुर्गी में बुद्ध विहार के लिए पंजीकृत है। यह एक धार्मिक ट्रस्ट है, लेकिन आपने (खरगे परिवार ने) इसे अनुसंधान एवं विकास के लिए मांगा है, वह भी एयरोस्पेस पार्क में, इसका क्या संबंध है।’’
नारायणस्वामी ने इसे भाई-भतीजावाद का स्पष्ट मामला बताते हुए कहा, ‘‘यह एक पारिवारिक ट्रस्ट है....और कोई मंत्री इसमें (ट्रस्ट में) निदेशक नहीं हो सकता, अगर वह इसमें है तो यह भाई-भतीजावाद है। यह स्पष्ट है कि भूखंड प्राप्त करने के लिए प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। इसलिए उनका (प्रियंक खरगे का) इस्तीफा तुरंत मांगा जाना चाहिए। यह एक और एमयूडीए (कथित घोटाला, जिसमें सिद्धरमैया पर आरोप लग रहे हैं) है।’’
भाषा आशीष