खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में मिला-जुला रुख
राजेश राजेश अजय
- 20 Mar 2024, 09:44 PM
- Updated: 09:44 PM
नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) देश में आयातित खाद्य तेलों की कमी की स्थिति के बीच तेल-तिलहन बाजारों में बुधवार को तेल-तिलहन कीमतों में मिला-जुला रुख दिखाई दिया। सोयाबीन डी-आयल्ड केक (डीओसी) की कमजोर स्थानीय मांग और निर्यात बाजारों के कम दाम की वजह से सोयाबीन तिलहन के भाव में गिरावट आई जबकि सोयाबीन डीगम तेल का स्टॉक लगभग समाप्त होने के बीच सोयाबीन तेलों की कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज के लगभग 2.25 प्रतिशत मजबूत होने से कच्चे पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन के दाम सुधार के साथ बंद हुए। वहीं शिकॉगो एक्सचेंज में भी लगभग एक प्रतिशत की तेजी है। मंडियों में आज सरसों की आवक घटने के कारण सरसों तेल-तिलहन के भाव भी मजबूती दर्शाते बंद हुए। ऊंचे दाम पर लिवाली प्रभावित होने से मूंगफली तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर रहे। वहीं नकली खल की शिकायतों के बीच तेल मिलों के बिनौले खल का भाव महंगा बैठने के बीच इसके भाव भी पूर्वस्तर पर बने रहे।
सूत्रों ने कहा कि 30-35 साल पहले सोयाबीन को नकदी फसल के रूप में देखा जाता था और इसे हाथों-हाथ खरीद लिया जाता था। इस फसल की मुख्य वस्तु इससे प्राप्त होने वाला लगभग 82 प्रतिशत डीओसी है जिसे निर्यात तथा घरेलू बाजार में मवेशीचारे के रूप में खपाकर किसानों को लाभ मिलता है। लेकिन डीओसी की घरेलू मांग कमजोर है और विदेशों में इसके दाम कम लगाये जा रहे हैं जिससे मिल वालों को नुकसान है। डीओसी की कमजोर मांग से सोयाबीन तिलहन में गिरावट है। दूसरी ओर इतिहास में संभवत: पहली बार बंदरगाहों पर सोयाबीन डीगम तेल का स्टॉक लगभग समाप्त हो गया है। आने वाले समय में नवरात्र का त्योहार है और शादी-विवाह की भारी मांग आने वाली है। ऐसे में नरम तेलों की दयनीय दशा को लेकर चिंता की जानी चाहिये।
सूत्रों ने कहा कि विदेशों में कितना तेल लोड हुआ है इसकी जानकारी लगभग एक महीने पहले मिल जाती है क्योंकि विदेशों से सोयाबीन डीगम जैसे नरम तेल के आने में लगभग 45-60 दिन का समय लगता है। जो लोग पाइपलाइन की आपूर्ति देखने को जिम्मेदार थे, संभवत: उन्होंने इस कमी की पूर्वसूचना नहीं दी। इसलिए अब सरकार को खुद ही आयात-निर्यात की स्थिति की निगरानी अपने हाथ लेनी चाहिये। बंदरगाहों पर अगर सोयाबीन डीगम तेल नहीं है और मंडियों में देशी सोयाबीन फसल, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 5-7 प्रतिशत नीचे दाम पर बिक रही है, तो इसकी जवाहदेही आखिर कौन लेगा ?
सूत्रों ने कहा कि मौजूदा कम कीमत पर केवल जरुरतमंद किसान ही सरसों बेच रहे हैं और मजबूत किसान अच्छे दाम के इंतजार में अपनी फसल रोके हुए हैं। इस वजह से आज सरसों की आवक कल के 16 लाख बोरी से घटकर लगभग 15.25 लाख बोरी रह गई। स्टॉकिस्ट मौजूदा स्थिति में सरसों की खरीद कर रहे हैं क्योंकि एमएसपी पर सरकारी खरीद होने के बाद उन्हें इस कम दाम पर सरसों नहीं मिलेगा।
उन्होंने कहा कि देशी तेल-तिलहन नुकसान में हैं और आयातित तेल प्रीमियम दाम के साथ बिक रहे हैं। इस ओर ध्यान देना होगा।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,310-5,350 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,080-6,355 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,800 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,225-2,500 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,300 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,740-1,840 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,740 -1,855 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,950 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,700 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,300 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 9,300 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,550 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,625 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,75 0 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 4,615-4,635 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,415-4,455 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,075 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश