साबरमती रेल दुर्घटना: रेलवे ने पटरियों पर गश्त बढ़ाई
नोमान देवेंद्र
- 23 Aug 2024, 10:40 PM
- Updated: 10:40 PM
(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) अहमदाबाद जाने वाली साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन 17 अगस्त को झांसी रेल मंडल के कानपुर और भीमसेन जंक्शन के बीच पटरी से उतर गई थी, जिसके बाद रेलवे ने पटरियों पर गश्त बढ़ा दी है। यह दुर्घटना कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा कथित तौर पर पटरियों पर रखी गई भारी वस्तु से टकराने के बाद हुई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्रालय चौबीसों घंटे पटरियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए विभिन्न कृत्रिम बुद्धिमता -आधारित समाधानों पर भी विचार कर रहा है।
रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि आरपीएफ के साथ-साथ पटरियों का रखरखाव करने वाले कर्मी पूरे वर्ष नियमित अंतराल पर दिन और रात में गश्त करते हैं और साबरमती एक्सप्रेस दुर्घटना के बाद वे और अधिक सतर्क हो गए हैं।
एक रेलवे अधिकारी ने बताया, “रेलवे बोर्ड समय-समय पर जोन और मंडलों को निर्देश जारी कर कहता है कि वे पूरे साल पटरियों की 24 घंटे गश्त करें।”
हालांकि, पटरियों की देखरेख करने वाले कर्मी और मंडल रेलवे अधिकारियों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर जमीनी रिपोर्ट से पता चलता है कि भारतीय रेलवे स्थायी पथ नियमावली के प्रावधानों के साथ-साथ पटरियों की देखरेख करने वाले कर्मियों की कमी के कारण पूरे वर्ष रात्रि गश्त नहीं की जाती है।
साबरमती एक्सप्रेस दुर्घटना के बारे में उत्तर मध्य जोन के एक रेलवे अधिकारी ने बताया कि इस घटना से पहले रात्रि गश्त नहीं की जाती थी, हालांकि अब इसे शुरू कर दिया गया है।
इस बात की जांच की जा रही है कि क्या रेल परिचालन को बाधित करने के इरादे से पटरी पर जानबूझकर भारी वस्तु को रखा गया था।
अधिकारी ने कहा, “इस घटना से पहले, रात्रि गश्त नियमित आधार पर नहीं की जाती थी, क्योंकि रात्रि गश्त का प्रावधान विशेष परिस्थितियों में प्रतिकूल मौसम की स्थिति के दौरान रेल की पटरियों के रखरखाव के उद्देश्य से किया जाता है, न कि असामाजिक गतिविधियों से इसे सुरक्षित करने के उद्देश्य से।”
‘ऑल इंडिया ट्रैक मेंटेनर्स यूनियन’ (एआईआरटीयू) के महासचिव कांता राजू ने कहा, “अगर पीडब्ल्यूआई (स्थायी पथ निरीक्षक) या उनके वरिष्ठ सहायक मंडलीय इंजीनियर (एडीईएन) को लगता है कि अत्यधिक बारिश या अत्यधिक गर्मी या ठंड की स्थिति में रात में भी पटरियों के निरीक्षण की आवश्यकता है, तो वे रात में गश्त के लिए पटरियों की देखरेख करने वाले कर्मियों को नियुक्त करते हैं। सामान्य मौसम की स्थिति में, रात में गश्त नहीं की जाती है।”
रेलवे जोन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “रेल संपत्ति की सुरक्षा रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) का कर्तव्य है, लेकिन वे दिन या रात के दौरान पटरियों की औचक या नियमित गश्त नहीं करते हैं। वे पटरियों की तरफ तभी जाते हैं, जब उन्हें किसी शरारत या किसी घटना के बारे में कोई खुफिया जानकारी मिलती है।”
भाषा नोमान