चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर निराशा महसूस करते हैं: आरजी कर के वंशज
अमित अविनाश
- 23 Aug 2024, 08:59 PM
- Updated: 08:59 PM
(सौगत मुखोपाध्याय)
कोलकाता, 23 अगस्त (भाषा) कलकत्ता स्कूल ऑफ मेडिसिन की स्थापना करने वाले डॉ. राधा गोविंद कर की 172वीं जयंती पर उनके वंशजों ने उस “सरकारी अस्पताल में न्यूनतम प्रगति” होने पर निराशा जतायी जहां युवा चिकित्सक तैयार होते हैं।
डॉ. राधा गोविंद कर ने 1886 में कलकत्ता स्कूल ऑफ मेडिसिन की स्थापना की थी। बाद में इस संस्थान का नाम उनकी याद में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कर दिया गया था।
आर.जी. कर के वंशजों की चौथी पीढ़ी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बात की। परिवार के सदस्य हावड़ा के रामराजतला क्षेत्र में उसी घर में रहते हैं, जहां 23 अगस्त 1852 को राधा गोविंद कर का जन्म हुआ था। परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्हें यह जानकर बहुत दुख हुआ कि उभरते चिकित्सकों को सुरक्षा और सुविधाएं प्रदान करने के मामले में बहुत कम सुधार हुआ है, जिस लक्ष्य के साथ कर ने 138 साल पहले प्रतिकूल स्थिति में इस अस्पताल की स्थापना की थी।
परिवार का मानना है कि यह आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों की अंतरात्मा पर छोड़ना समझदारी होगी कि वे तय करें कि उनके काम पर लौटने का समय आ गया है या नहीं। पिछले दो सप्ताह से जूनियर डॉक्टर की हड़ताल के चलते पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
परिवार के सदस्यों ने यह भी कहा कि राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय की अपील के बावजूद आंदोलनकारी चिकित्सकों के बीच विश्वास पैदा करने और उन्हें काम पर लौटने के लिए मनाने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने भी इस संबंध में बार-बार अनुरोध किया है।
फोटोग्राफर-शिक्षक पार्थ कर ने कहा, “आजादी के इतने समय बाद भी सरकारी अस्पतालों में हमारे चिकित्सकों को मिल रही सुविधाओं की कमी से मैं काफी निराश महसूस करता हूं। हम पहले भी इस तरह के अत्याचारों के बारे में सुनते रहे हैं और मुझे लगता है कि हम भविष्य में भी अस्पताल परिसरों के अंदर इस तरह के और भी घिनौने अपराध सुनेंगे। आरजी कर अपने समय की व्यापक बीमारियों से निपटने के लिए गुणवत्तापूर्ण डॉक्टर तैयार करना चाहते थे। हम उनकी स्मृति का सम्मान करने में विफल रहे हैं।”
पार्थ की पत्नी गार्गी ने कहा, "मैं यह सोचकर कांप उठती हूं कि पीड़िता के साथ जो हुआ, वह मेरी बेटी के साथ भी हो सकता था। उसकी आंखों से आंसू नहीं, बल्कि खून बह रहा था।"
अस्पताल परिसर में हुए भयावह अपराध के प्रकाश में आने के बाद पीड़ा व्यक्त करते हुए, कर परिवार के 30 से अधिक सदस्यों ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 'रिक्लेम द नाइट' विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था।
पार्थ ने कहा कि परिवार के कम से कम तीन सदस्य आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। पार्थ ने कहा कि उन्होंने कभी छात्रों और प्रशिक्षुओं को उनकी सुरक्षा में इस तरह की गंभीर खामियों की शिकायत करते नहीं सुना।
पार्थ ने कहा, "मुझे जूनियर डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन में कुछ भी गलत नहीं लगता। वे केवल एक सुविधा की मांग कर रहे हैं, वह है उनकी निजी सुरक्षा। अस्पताल उनका दूसरा घर है। वे काम के लिए लंबे समय तक उस परिसर में रहते हैं। मैं यह उनके विवेक पर छोड़ता हूं कि उन्हें आगे क्या करना चाहिए।"
भाषा अमित