आरएचएफएल के कोष को खपाने में अनिल अंबानी थे ‘मास्टमाइंड’ : सेबी आदेश
प्रेम प्रेम अजय
- 23 Aug 2024, 07:24 PM
- Updated: 07:24 PM
नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी ने अपने आदेश में अनिल अंबानी को कोष को दूसरी कंपनियों में खपाने का ‘मास्टमाइंड’ बताते हुए कहा है कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के निदेशक मंडल ने अयोग्य लेनदारों को कर्ज देने को लेकर चेतावनी दी थी।
इस आदेश के मुताबिक, असल में आरएचएफएल की ऋण मंजूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण अनियमितताएं पाई गईं, जिसमें कंपनी की कर्ज नीति से विचलन और अधूरे दस्तावेज भी शामिल हैं।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने आदेश में कहा है कि आरएचएफएल के निदेशक मंडल ने इस तरह ऋण देने के व्यवहार पर लगाम लगाने और कंपनियों को कर्ज देने की नियमित समीक्षा करने के कड़े निर्देश जारी किए थे लेकिन कंपनी प्रबंधन ने उन आदेशों की अनदेखी की।
सेबी ने आदेश में कहा, ‘‘यह एक अजीबोगरीब मामला है, जहां कंपनी के प्रबंधन ने अपने ही निदेशक मंडल के उस आदेश की खुलेआम अवहेलना की है, जिसने सामान्य जरूरतों के लिए कॉरपोरेट कर्ज देने के बारे में चिंता जताई थी।’’
सेबी ने कहा, ‘‘धोखाधड़ी की इस योजना के पीछे का मास्टरमाइंड एडीएजी का चेयरमैन अनिल अंबानी होने की संभावना दिखाई देती है।’’
सेबी आरएचएफएल के कोष को दूसरी कंपनियों में भेजने के निष्कर्ष तक दो महत्वपूर्ण रिपोर्टों के आधार पर पहुंचा है। आरएचएफएल के वैधानिक ऑडिटर पीडब्ल्यूसी और आरएचएफएल के कर्जदाताओं के समूह के अगुवा बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा की तरफ से नियुक्त फॉरेंसिक ऑडिटर ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट को आधार बनाया गया है।
पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि आरएचएफएल के सामान्य उद्देश्य वाले कॉरपोरेट कर्ज उत्पाद के तहत वितरित ऋणों में तेजी से वृद्धि हुई है। वितरित राशि 31 मार्च, 2018 को लगभग 900 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 मार्च, 2019 तक लगभग 7,900 करोड़ रुपये हो गई।
पीडब्ल्यूसी ने अपनी रिपोर्ट में नकारात्मक शुद्ध हैसियत, सीमित राजस्व या लाभ-रहित कर्जदारों, आरएचएफएल से उधार लेने के अलावा कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं, और उठाए गए कर्ज की तुलना में कम इक्विटी पूंजी जैसे कई अहम बिंदुओं का उल्लेख किया है।
इसके साथ अप्रैल, 2016 से जून, 2019 तक की गई फॉरेंसिक ऑडिट ने चिंताओं को बढ़ा दिया। इसमें पाया गया कि आरएचएफएल ने इस अवधि में कुल 14,577.68 करोड़ रुपये के कर्ज कंपनियों को दिया था जिनमें से 12,487.56 करोड़ रुपये 47 इकाइयां संभावित अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी थीं। इनमें से आठ कंपनियां रिलायंस पावर और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर से संबंधित थीं।
मई, 2020 में जारी दूसरी फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट ने खुलासा किया कि आरएचएफएल ने इन संबंधित इकाइयों से जुड़े 150 ऋण मामलों में 12,573.06 करोड़ रुपये वितरित किए। ऑडिट में 43 संबद्ध इकाइयों में धन भेजने का पता लगाया गया, जिसने बाद में उन्हें 19 इकाइयों को हस्तांतरित कर दिया, जिनमें से 14 कथित तौर पर प्रवर्तक समूह से जुड़ी थीं।
सर्वाधिक राशि पाने वाली इकाइयों में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (2,359.91 करोड़ रुपये) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (2,278.58 करोड़ रुपये) शामिल थीं।
भाषा प्रेम प्रेम