उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता पुलिस को फटकारा; ममता ने दुष्कर्म के खिलाफ सख्त कानून की मांग की
खारी वैभव
- 22 Aug 2024, 11:24 PM
- Updated: 11:24 PM
कोलकाता/नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सख्त लहजे में कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला चिकित्सक से कथित तौर पर बलात्कार एवं उसकी हत्या के संबंध में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज करने में कोलकाता पुलिस की देरी ‘‘बेहद व्यथित करने वाली’’ है। न्यायालय ने साथ ही बंगाल के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के अवरुद्ध होने के 14वें दिन प्रदर्शनकारी चिकित्सकों से काम पर लौटने का आग्रह किया।
न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को देशभर में स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश देते हुए, कोलकाता की घटना में प्राथमिकी दर्ज करने में 14 घंटे की देरी और इसके पीछे के कारणों पर सवाल उठाए।
चिकित्सक की मौत के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने चिकित्सकों की सुरक्षा, प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और पश्चिम बंगाल सरकार की जिम्मेदारियों से संबंधित कई निर्देश जारी किए। पीठ में न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।
पीठ ने पूछा, ‘‘आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के संपर्क में कौन था? उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी क्यों की? इसका क्या मकसद था?’’
इस बीच, मामले की जांच कर रहे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बृहस्पतिवार को पूर्व प्राचार्य संदीप घोष और चार अन्य चिकित्सकों की ‘पॉलीग्राफ’ जांच कराने की अनुमति मांगी।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर बलात्कार के दोषियों के लिए कठोर सजा के साथ सख्त केंद्रीय कानून बनाने की मांग की।
कोलकाता के अस्पताल के संगोष्ठी कक्ष में नौ अगस्त को परास्नातक प्रशिक्षु महिला चिकित्सक का शव बरामद किया गया था जिसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में अगले दिन कोलकाता पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया और कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 13 अगस्त को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था, जिसके बाद एजेंसी ने 14 अगस्त को अपनी जांच शुरू की।
पीठ ने कहा, ‘‘ऐसा कैसे हुआ कि पोस्टमार्टम नौ अगस्त को शाम छह बजकर 10 मिनट पर किया गया, लेकिन अप्राकृतिक मौत की सूचना ताला पुलिस थाने को नौ अगस्त को रात साढ़े 11 बजे भेजी गई। यह बेहद परेशान करने वाली बात है।’’
इसने घटना के बारे में पहली प्रविष्टि दर्ज करने वाले कोलकाता पुलिस के अधिकारी को अगली सुनवाई में पेश होने और प्रविष्ठि दर्ज करने का समय बताने का निर्देश दिया गया।
पीठ ने कहा कि कोलकाता की घटना के संबंध में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बाधित नहीं किया जाएगा। अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि उसने राज्य सरकार को वैध शक्तियों का इस्तेमाल करने से नहीं रोका है।
न्यायालय ने कहा, ‘‘जब हम कहते हैं कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को परेशान नहीं किया जाएगा, तो इससे हमारा मतलब यह भी है कि उचित प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा।’’
इसने कहा कि प्रदर्शनकारी चिकित्सकों के खिलाफ कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अदालत ने इस घटना का राजनीतिकरण करने को लेकर राजनीतिक दलों को भी आगाह किया और जोर देकर कहा कि ‘‘कानून अपना काम करेगा।’’
पीठ ने कहा, ‘‘इस माहौल का राजनीतिकरण न करें। सभी दलों को यह समझना होगा कि कानून अपना काम करेगा। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि त्वरित जांच के बाद कानून अपना काम करे।’’
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने न्यायालय की टिप्पणियों का स्वागत किया, खासकर मामले का राजनीतिकरण न करने के निर्देश का।
तृणमूल नेता कुणाल घोष ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने जो कहा हम उस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते क्योंकि मामला विचाराधीन है। हालांकि, हम न्यायालय की इस टिप्पणी का स्वागत करते हैं कि राजनीतिक दलों को मामले का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। हम शीर्ष अदालत द्वारा प्रदर्शनकारी चिकित्सकों को काम पर वापस लौटने के लिए कहने का स्वागत करते हैं। सीबीआई तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।’’
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग कर रही विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अदालत की टिप्पणियों का स्वागत किया और कहा कि राज्य सरकार और कोलकाता पुलिस द्वारा दोषियों को बचाने के कथित प्रयासों का पर्दाफाश हो गया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘‘राज्य सरकार और पुलिस शुरू से ही अपराधियों को बचाने और सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल का भी प्रयोग किया। आज शीर्ष अदालत में तृणमूल सरकार की पोल खुल गई।’’
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर दुष्कर्म के अपराधियों के लिए कठोर सजा के साथ सख्त केंद्रीय कानून बनाने का आग्रह किया।
बजर्नी ने कहा, ‘‘यह प्रवृत्ति देखकर डर लगता है। यह समाज और राष्ट्र के आत्मविश्वास और विवेक को झकझोर डालती है। इसे रोकना हमारा परम कर्तव्य है ताकि महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। ऐसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे से कड़े केंद्रीय कानून के माध्यम से व्यापक रूप से निपटने की आवश्यकता है ताकि इन जघन्य अपराधों में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।’’
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने यौन उत्पीड़न के मामलों में 50 दिनों के भीतर दोषसिद्धि को अनिवार्य करने वाले कानून बनाने का आह्वान किया।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में साल्ट लेक में राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय तक मार्च के दौरान कोलकाता में उस समय भाजपा समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प हुई जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अवरोधक को पार करने का प्रयास किया।
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और पुलिस ने अधिकारी को हिरासत में ले लिया और बाद में रिहा कर दिया।
जूनियर डॉक्टर ने लगातार चौदहवें दिन भी हड़ताल जारी रखी जिसके कारण पश्चिम बंगाल में सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं।
भाषा
खारी