कुमारस्वामी के खिलाफ मुकदमे की अनुमति पर फैसले के लिए राज्यपाल को ‘सलाह’ देंगे: कर्नाटक मंत्रिमंडल
धीरज सुरेश
- 22 Aug 2024, 07:35 PM
- Updated: 07:35 PM
बेंगलुरु, 22 अगस्त (भाषा) कर्नाटक मंत्रिमंडल ने जनता दल (सेक्युलर) नेता एवं केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी तथा खनन कारोबारी जी जनार्दन रेड्डी सहित भाजपा के तीन पूर्व मंत्रियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के अनुरोध पर निर्णय के लिए राज्यपाल थावरचंद गहलोत को ‘सहायता और सलाह’ देने का बृहस्पतिवार को फैसला किया।
कांग्रेस सरकार ने यह कदम मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूमि आवंटन ‘घोटाले’ में 16 अगस्त को राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दिए जाने के एक सप्ताह के भीतर उठाया है।
कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने कहा, ‘‘लंबित मामलों में जल्द से जल्द निर्णय लेने तथा न्यायिक प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत मंत्रिमंडल राज्यपाल को सहायता एवं सलाह दे सकता है। इसका उपयोग करते हुए मंत्रिमंडल ने राज्यपाल को सहायता एवं सलाह देने को अपनी मंजूरी दी है।’’
पाटिल ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं को फैसलों की जानकारी देते हुए बताया, ‘‘सलाह राज्यपाल को भेजी जाएगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जिन चार लंबित मामलों में हमने सहायता और सलाह दी है, इनमें से दो मामलों (जनार्दन रेड्डी और कुमारस्वामी) में आरोप-पत्र दायर किये जा चुके हैं...।’’
पाटिल से जब यह पूछा गया कि क्या राज्यपाल मंत्रिमंडल की सहायता और सलाह को अस्वीकार कर सकते हैं, उन्होंने कहा, ‘‘हमारे अनुसार, वह हमारी सलाह मानने को बाध्य हैं; उनका विवेकाधिकार सीमित है। मुझे यकीन है कि वह अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल बहुत विवेकपूर्ण तरीके से करेंगे।’’
राज्यपाल ने 16 अगस्त को सिद्धरमैया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 के तहत एस पी प्रदीप कुमार, टी जे अब्राहम और स्नेहमयी कृष्णा की याचिकाओं में उल्लिखित कथित अपराधों में मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।
पाटिल ने कहा कि अभियोजन की मंजूरी मांगने वाली कई अर्जी राज्यपाल के समक्ष लंबित हैं, जिनमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत याचिकाएं भी शामिल हैं; इनमें से कुछ मामलों में आरोप-पत्र भी दायर किये जा चुके हैं।
मंत्री ने कहा कि इन अर्जियों में से विशेष अर्जी (भाजपा की पूर्व मंत्री) शशिकला जोले के विरुद्ध हैं, जिनके खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने नौ दिसंबर, 2021 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमोदन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। उन्होंने बताया कि (भाजपा के पूर्व मंत्री) मुरुगेश निरानी के खिलाफ इसी कानून की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमोदन के लिए 26 फरवरी, 2024 को आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
उन्होंने बताया कि तीसरी अर्जी कुमारस्वामी मामले को लेकर है, जिनके खिलाफ 21 नवंबर 2023 को आवेदन प्रस्तुत किया गया था। अर्जी में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 और भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत मंजूरी मांगी गई है।
पाटिल ने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने आरोप-पत्र दाखिल कर दिया है और राज्यपाल ने 29 जुलाई, 2024 को मामले पर स्पष्टीकरण मांगा था, जिसपर इसने (एसआईटी ने) 16 अगस्त, 2024 को आवश्यक स्पष्टीकरण दे दिया है।
उन्होंने बताया कि चौथा मामला रेड्डी से संबंधित है, जिनके खिलाफ 13 मई, 2024 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 और बीएनएसएस के प्रावधानों के तहत मंजूरी मांगने के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किया गया था और इस मामले में आरोप पत्र भी दाखिल किया गया है।
मंत्री ने कहा कि राज्यपाल द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब जांच एजेंसियों ने दे दिया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि जनता की नजर में राज्यपाल का कार्यालय गलत काम करता हुआ नहीं दिखना चाहिए; ‘‘इसलिए हमें लगा कि यह सहायता और सलाह देना उचित है।’’
उन्होंने यह भी कहा कि सिद्धरमैया के मामले में एक निजी व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी, जबकि इन चार मामलों में जांच हो चुकी है और दो मामलों में आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
भाषा धीरज