‘झूठे’ बयान पर राहुल, केजरीवाल, अखिलेश के खिलाफ कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिका का निस्तारण
आशीष माधव
- 20 Mar 2024, 06:24 PM
- Updated: 06:24 PM
नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें नेताओं राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव के खिलाफ भारत की साख को नुकसान पहुंचाने के इरादे से कथित तौर पर झूठे और भ्रामक बयान देने के लिए कार्रवाई करने को लेकर केंद्र सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया गया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि भारतीय मतदाताओं की समझ को कम नहीं आंका जाना चाहिए क्योंकि वे जानते हैं कि कौन उनका नेतृत्व कर रहा है और उन्हें गुमराह कर रहा है।
याचिका में समाचार चैनल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित समाचारों का हवाला देते हुए कहा गया कि गांधी, केजरीवाल और यादव ने केंद्र सरकार द्वारा कुछ उद्योगपतियों के 16 करोड़ रुपये के कथित ऋण माफ करने के संबंध में भ्रामक और गलत बयान दिया।
याचिकाकर्ता ने केंद्र को शिकायत दर्ज करने और कथित तौर पर झूठे और भ्रामक बयान देने के लिए इन तीन नेताओं पर मुकदमा चलाने तथा विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और उन राजनीतिक दलों को इन बयानों को हटाने के संबंध में निर्देश देने का अनुरोध किया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पी एस अरोड़ा की पीठ ने कहा कि प्रभावित लोग याचिका दायर करेंगे। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को भारतीय मतदाताओं को कम नहीं आंकना चाहिए क्योंकि वे जानते हैं कि कौन उनका नेतृत्व कर रहा है और उन्हें गुमराह कर रहा है।
पीठ ने कहा, ‘‘अगर उद्योगपति प्रभावित हुए हैं या नेता आहत हुए हैं, तो वे कदम उठाएंगे। मतदाता की समझ को कम करने न आंकें। वे बहुत बहुत होशियार हैं। वे जानते हैं कि कौन सच बोल रहा है और कौन नहीं। हमें इसमें ना घसीटें। भारतीय मतदाताओं की समझदारी को कम करके मत आंकिए।’’
उच्च न्यायालय ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि उसका विचार है कि जिन उद्योगपतियों और जिन व्यक्तियों को बदनाम किया गया है, उनके पास अदालत का रुख करने और उचित कदम उठाने के साधन हैं।
किसान और सामाजिक कार्यकर्ता होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ता सुरजीत सिंह यादव ने कहा कि विपक्षी नेताओं के बयानों ने भारत की नकारात्मक छवि बनाई तथा देश और केंद्र सरकार की साख को नुकसान पहुंचाया है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के मद्देनजर इन नेताओं को इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए।
याचिका में कहा गया, ‘‘यह सबको पता है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार, बट्टे खाते में डालना ऋण माफी के समान नहीं है। लेकिन प्रतिवादी संख्या 3 से 9 (गांधी, यादव, केजरीवाल, उनके राजनीतिक दल और समाचार संस्थान) द्वारा ऋण को बट्टे खाते में डालने को ऋण माफ करने के रूप में दिखाया गया।’’
याचिकाकर्ता ने कहा, ‘‘इन प्रतिवादियों द्वारा ऋण माफ करने के संबंध में गलतबयानी से याचिकाकर्ता सहित पाठकों, दर्शकों के मन में भ्रम पैदा हो गया, जिसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार की छवि खराब हुई।’’
भाषा आशीष