भारत ने जापान से प्रौद्योगिकी साझा करने के लिए नियामक बाधाओं को दूर करने का आह्वान किया
खारी वैभव
- 21 Aug 2024, 12:47 AM
- Updated: 12:47 AM
(तस्वीरों सहित)
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) भारत ने मंगलवार को जापान से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को साझा करने में मौजूद नियामक बाधाओं को दूर करने का आह्वान किया। इसके साथ ही दोनों देशों ने क्षेत्र में चीन की आक्रामक सैन्य गतिविधियों के मद्देनजर एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के साझा लक्ष्य की दिशा में तेजी से काम करने का संकल्प लिया।
विदेश और रक्षा मंत्री स्तर पर की गई तीसरी ‘‘2 प्लस 2’’ वार्ता में भारत और जापान समग्र सामरिक संबंधों को और विस्तारित करने की इच्छा के अनुरूप सुरक्षा सहयोग के लिए एक नयी रूपरेखा तैयार करने पर भी सहमत हुए।
दिल्ली में हुई वार्ता में जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री योको कामिकावा और रक्षा मंत्री किहारा मिनोरू ने किया। भारतीय दल का नेतृत्व जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया।
एक संयुक्त बयान में कहा गया कि मंत्रियों ने मानवरहित रोबोटिक्स के क्षेत्र में सहयोग के सफल समापन की सराहना की।
उन्होंने कहा कि उन्होंने ‘यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना’ (यूनिकॉर्न) और संबंधित प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण में प्रगति की सराहना की।
अधिकारियों ने बताया कि ‘यूनिकॉर्न’ को भारतीय नौसेना के जहाजों पर लगाया जाएगा।
जयशंकर ने अपने मीडिया वक्तव्य में कहा, ‘‘पिछले दशक में हमारे संबंधों ने एक विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का रूप ले लिया है। इस विकास का कारण हमारे बढ़ते हित और बढ़ती गतिविधियां हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि हम दोनों एक अधिक अस्थिर और अप्रत्याशित दुनिया की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, इसलिए ऐसे विश्वसनीय साझेदारों की आवश्यकता है जिनके साथ पर्याप्त साझेदारी हो।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘परिणामस्वरूप, हमने एक-दूसरे के प्रयासों को सुगम बनाने, एक-दूसरे के उद्देश्यों को समझने, एक-दूसरे की स्थिति को मजबूत करने और साझा सहजता वाले अन्य देशों के साथ काम करने की कोशिश की है।’’
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार बढ़ती रहेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘आज हमारा सहयोग एक खुले, स्वतंत्र और नियम आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के व्यापक परिप्रेक्ष्य में है।’’
जयशंकर ने कहा कि ‘‘2 प्लस 2’’ संवाद में विशेष रूप से आगे के कदमों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने जापानी शहर फुकुओका में एक नये वाणिज्य दूतावास की स्थापना के भारत के फैसले की भी घोषणा की।
उन्होंने कहा, ‘‘हम पिछली बार तोक्यो में मिले थे। (तब से) दुनिया में कई घटनाक्रम घटे हैं।’’
कामिकावा ने जाहिर तौर पर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की सेना के आक्रामक रुख की ओर परोक्ष इशारा करते हुए कहा, ‘‘हमने बलपूर्वक यथास्थिति बदलने के एकपक्षीय प्रयासों का विरोध करने की और कानून के शासन पर आधारित खुली और स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कायम रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।’’
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी लोकतांत्रिक मूल्यों तथा कानून के शासन पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है और घरेलू रक्षा क्षमता निर्माण करना इस लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘रक्षा क्षेत्र में भारत-जापान की साझेदारी हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण पहलू रहेगी।’’
उन्होंने विश्वास जताया कि इस चर्चा से रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए मजबूत प्रतिबद्धता जताई जा सकेगी।
सिंह ने कहा, ‘‘वर्तमान वैश्विक स्थिति को देखते हुए इस क्षेत्र में भारत-जापान साझेदारी बहुत महत्वपूर्ण होगी। मुझे लगता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्रता, समावेश और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह साझेदारी महत्वपूर्ण है।’’
जयशंकर और सिंह ने ‘‘2 प्लस 2’’ वार्ता से पहले अपने जापानी समकक्षों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय चर्चा की।
जापान के साथ ‘‘2 प्लस 2’’ वार्ता द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग को और गहरा करने तथा दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और अधिक गहन करने के लिए शुरू की गई थी।
भाषा खारी