लेटरल एंट्री: विपक्ष ने सरकार को आरक्षण विरोधी बताया, सरकार बोली- आरक्षण का सिद्धांत लागू होगा
हक हक माधव
- 20 Aug 2024, 06:50 PM
- Updated: 06:50 PM
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने ‘लेटरल एंट्री’ के विषय पर अपने कदम पीछे खींचने के बाद मंगलवार को सरकार हमला बोला और दावा किया कि विपक्ष के विरोध के कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को संबंधित विज्ञापन निरस्त करना पड़ा है, लेकिन असल में वह आरक्षण की विरोधी है।
दूसरी तरफ, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार ने सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए ‘लेटरल एंट्री’ के जरिये नियुक्ति में आरक्षण के सिद्धांत को लागू करने का फैसला किया है।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने मंगलवार को केंद्र के निर्देश के बाद नौकरशाही में ‘लेटरल एंट्री’ भर्ती के लिए जारी अपना नवीनतम विज्ञापन रद्द कर दिया।
यूपीएससी ने 17 अगस्त को ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से 45 संयुक्त सचिवों, निदेशकों और उप सचिवों की भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की थी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘संविधान जयते। हमारे दलित, आदिवासी, पिछड़े और कमजार वर्गों के सामाजिक न्याय के लिए कांग्रेस पार्टी की लड़ाई ने आरक्षण छीनने के भाजपा के मंसूबों पर पानी फेरा है। लेटरल एंट्री पर मोदी सरकार की चिट्ठी ये दर्शाती है कि तानाशाही सत्ता के अहंकार को संविधान की ताकत ही हरा सकती है।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘राहुल गांधी, कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों की मुहिम से सरकार एक कदम पीछे हटी है, पर जब तक भाजपा-आरएसएस सत्ता में है, वो आरक्षण छीनने के नए-नए हथकंडे अपनाती रहेगी। हम सबको सावधान रहना होगा।’’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वह संविधान और आरक्षण व्यवस्था की हर कीमत पर रक्षा करेंगे तथा भाजपा की ‘लेटरल एंट्री’ जैसी ‘‘साजिशों’’ को हर हाल में नाकाम करके दिखाएंगे।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘संविधान और आरक्षण व्यवस्था की हम हर कीमत पर रक्षा करेंगे। भाजपा की ‘लेटरल एंट्री’ जैसी साजिशों को हम हर हाल में नाकाम कर के दिखाएंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक बार फिर कह रहा हूं - 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा को तोड़ कर हम जातिगत गिनती के आधार पर सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेंगे। जय हिन्द।’’
‘लेटरल एंट्री’ संबंधी विज्ञापन निरस्त किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण निर्णय से एक बार फिर बी आर आंबेडकर की संविधान के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यूपीएससी ने लेटरल एंट्री के लिए बहुत पारदर्शी तरीका अपनाया। अब हमने उसमें भी आरक्षण का सिद्धांत लागू करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।’’
उनका यह भी कहना था, ‘‘हमने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया, जो पहले एक साधारण निकाय था। चाहे वह, मेडिकल में प्रवेश के लिए नीट हो, सैनिक स्कूल या नवोदय विद्यालय हो, हमने हर जगह आरक्षण के सिद्धांत को लागू किया है।’’
वैष्णव ने कहा कि मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने आंबेडकर के पंचतीर्थ को गौरवपूर्ण स्थान बनाया। उन्होंने कहा, ‘‘आज यह बहुत गर्व की बात है कि भारत की राष्ट्रपति भी आदिवासी समुदाय से हैं।’’
मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की सभी तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लक्ष्य के तहत अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों को अधिकतम लाभ मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने ‘लेटरल एंट्री’ से संबंधित विज्ञापन को रद्द किए जाने की सराहना करते हुए मंगलवार को कहा कि इससे केंद्र ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है।
पटना में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पासवान ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की नौकरशाही में ‘‘लेटरल एंट्री’’ को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले ‘‘इंडिया’’ गठबंधन द्वारा की जा रही आलोचना पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकारें वंचित जातियों के लिए आरक्षित पदों को भरने में विफल रहीं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘नौकरशाही में बड़े पैमाने पर लेटरल एंट्री योजना के लिए कल शाम तक केंद्रीय मंत्रियों द्वारा मनमोहन सिंह को दोषी ठहराया जा रहा था। कुछ मेहरबान टिप्पणीकारों ने तो नेहरू को भी दोषी ठहरा दिया था। अब वही मंत्री अचानक पटरी से उतर गए हैं और नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री को सामाजिक न्याय का हिमायती बताने के लिए मजबूर हो रहे हैं, जो कि अब और अधिक बेनकाब हो चुके हैं। पाखंड की कोई सीमा नहीं है।’’
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यूपीएससी में लेटरल एंट्री के पिछले दरवाज़े से आरक्षण को नकारते हुए नियुक्तियों की साजिश आखिरकार पीडीए की एकता के आगे झुक गयी है। सरकार को अब अपना यह फैसला भी वापस लेना पड़ा है।''
उन्होंने कहा कि भाजपा के षड्यंत्र अब कामयाब नहीं हो पा रहे हैं, ये पीडीए में आए जागरण और चेतना की बहुत बड़ी जीत है।
राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार में बैठे लोग दलित विरोधी, संविधान विरोधी और आरक्षण विरोधी है।
उन्होंने कहा, ‘‘आरक्षण खत्म हो रहा है, लेकिन चिराग पासवान, जीतन राम माझी और नीतीश कुमार ने चुप्पी साधे हुए हैं। यह बड़े दुख की बात है। रामविलास पासवान जी होते आज ऐसा नहीं होने देते। लेकिन ये लोग सिर्फ सत्ता भोगना चाहते हैं।’’
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा आरक्षण को खत्म करना चाहती है।
उन्होंने कहा, ‘‘240 सीट पर रोके जाने के बावजूद भाजपा अपनी हरकत से बाज नहीं आ रही है। वह आरक्षण खत्म करना चाहती है।’’
‘लेटरल एंट्री’ सीधी भर्ती की प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की केंद्र सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों में कुछ निश्चित समय के लिए नियुक्ति की जाती है। ये भर्तियां सामान्यत: संयुक्त सचिव, निदेशक और उप सचिव के पदों पर की जाती हैं।
केंद्र सरकार ने ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से 45 विशेषज्ञों की विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों में संयुक्त सचिव, निदेशक और उपसचिव जैसे प्रमुख पदों पर नियुक्ति करने की घोषणा की थी।
आमतौर पर ऐसे पदों पर अखिल भारतीय सेवाओं-भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) और अन्य ‘ग्रुप ए’ सेवाओं के अधिकारी तैनात किए जाते हैं।
भाषा हक हक