‘लेटरल एंट्री’ का विज्ञापन वापस लिये जाने को अखिलेश ने पीडीए में आए जागरण और चेतना की जीत बताया
जफर आनन्द नोमान
- 20 Aug 2024, 05:45 PM
- Updated: 05:45 PM
लखनऊ, 20 अगस्त (भाषा) संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा नौकरशाही में ‘लेटरल एंट्री’ का विज्ञापन रद्द करने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे ‘पीडीए’ में आए जागरण और चेतना की बहुत बड़ी जीत बताया।
वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि ऐसी सभी आरक्षण विरोधी प्रक्रियाओं को हर स्तर पर रोक लगाने की जरूरत है।
केंद्र के अनुरोध के बाद यूपीएससी ने नौकरशाही में ‘लैटरल एंट्री’ के जरिये भर्ती के लिए जारी नवीनतम विज्ञापन रद्द कर दिया है।
सपा नेता यादव ने मंगलवार को 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यूपीएससी में लेटरल एंट्री के पिछले दरवाजे से आरक्षण को नकारते हुए नियुक्तियों की साजिश आखिरकार ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) की एकता के आगे झुक गयी है। सरकार को अब अपना यह फ़ैसला भी वापस लेना पड़ा है।”
उन्होंने कहा कि भाजपा के षड्यंत्र अब कामयाब नहीं हो पा रहे हैं, ये पीडीए में आए जागरण और चेतना की बहुत बड़ी जीत है।
यादव ने कहा, ''इन परिस्थितियों में समाजवादी पार्टी ‘लेटरल भर्ती’ के खिलाफ दो अक्टूबर से शुरू होने वाले आंदोलन के आह्वान को स्थगित करती है, साथ ही यह संकल्प लेती है कि भविष्य में भी ऐसी किसी चाल को कामयाब नहीं होने दिया जायेगा। जिस तरह से जनता ने हमारे दो अक्टूबर के आंदोलन के लिए जुड़ना शुरू कर दिया था, यह उस एकजुटता की भी जीत है।''
उन्होंने कहा कि ‘लेटरल एंट्री’ ने भाजपा का आरक्षण विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है।
यूपीएससी ‘लेटरल एंट्री’ के जरिए सीधे उन पदों पर उम्मीदवारों की नियुक्ति करता है, जिन पदों पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों की तैनाती होती है। इसमें निजी क्षेत्रों से अलग अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों को विभिन्न मंत्रालयों व विभागों में सीधे ज्वाइंट सेक्रेटरी और डायरेक्टर व डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर नियुक्ति दी जाती है।
बसपा प्रमुख मायावती ने मंगलवार को 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा ''केन्द्र सरकार में संयुक्त सचिव व निदेशक आदि के उच्च पदों पर आरक्षण सहित सामान्य प्रक्रिया से पदोन्नति व बहाली के बजाय भारी वेतन पर बाहर के 47 लोगों की ‘लेटरल नियुक्ति’ बसपा के तीव्र विरोध के बाद आज रद्द कर दी गयी।”
उन्होंने मांग की है कि ऐसी सभी आरक्षण विरोधी प्रक्रियाओं को हर स्तर पर रोक लगाने की जरूरत है।
इसके साथ ही मायावती ने एक अन्य पोस्ट में अनुसूचित जाति-जनजाति के आरक्षण के उपवर्गीकरण मामले में कहा, “दिनांक एक अगस्त 2024 के उच्चतम न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध एससी/एसटी के लिए पूर्व की आरक्षण व्यवस्था को बहाल करने के लिए केन्द्र संविधान संशोधन की कार्यवाही करे, जिसको लेकर कल इन वर्गों द्वारा ’भारत बंद’ का आह्वान किया गया है।''
मायावती ने आंदोलनकारियों से प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से करने की अपील की।
केंद्र सरकार ने ‘लेटरल एंट्री’ के माध्यम से 45 विशेषज्ञों की विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों में संयुक्त सचिव, निदेशक और उपसचिव जैसे प्रमुख पदों पर नियुक्ति करने की घोषणा की थी।
भाषा जफर आनन्द