जमा बीमा दायरे में समय-समय पर संशोधन की जरूरत: आरबीआई डिप्टी गवर्नर
रमण अजय
- 19 Aug 2024, 07:20 PM
- Updated: 07:20 PM
जयपुर, 19 अगस्त (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने जमा बीमा दायरा सीमा में समय-समय पर संशोधन की जरूरत बतायी है। इसका कारण जमा बीमा के मूल्य का बढ़ना, मुद्रास्फीति और आय स्तर में वृद्धि है।
वर्तमान में जमा बीमा दायरा सीमा पांच लाख रुपये है।
डिप्टी गवर्नर ने पिछले सप्ताह यहां जमा बीमा और कर्ज गारंटी निगम (डीआईसीजी) द्वारा आयोजित आईएडीआई (जमा बीमाकर्ताओं का अंतरराष्ट्रीय संघ) एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय समिति अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन भाषण में कहा कि ग्राहक जमा के लिए बीमा दायरे को पर्याप्त बनाना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भारत में 31 मार्च, 2024 तक बैंकों में कुल खातों में पूरी तरह से सुरक्षित खाते 97.8 प्रतिशत थे, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक 80 प्रतिशत है।
राव ने कहा कि हालांकि इस समय दायरा संतोषजनक लगता है लेकिन आगे चुनौतियां लग रही हैं।
उन्होंने 14 अगस्त को अपने संबोधन में कहा, ‘‘आज हम भारत को सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में से एक मानते हैं और यह वृद्धि दर निकट भविष्य में भी जारी रहने की उम्मीद है। एक बढ़ती और संगठित अर्थव्यवस्था में स्वाभाविक रूप से प्राथमिक और माध्यमिक बैंक जमा दोनों में तेज वृद्धि की उम्मीद है।’’
आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बीमा रिजर्व जरूरत और उपलब्ध रिजर्व के बीच एक अंतर पैदा हो रहा है।
वर्तमान में, देश में सीमित दायरे का विकल्प अपनाया जाता है। इसके तहत एक समान जमा बीमा उपलब्ध कराया गया है। इसमें प्रत्येक जमाकर्ता के लिए पांच लाख रुपये की सीमा तय की गयी है।
उन्होंने कहा, ‘‘बैंक जमा के मूल्य में वृद्धि, आर्थिक वृद्धि दर, मुद्रास्फीति, आय के स्तर में वृद्धि आदि जैसे विभिन्न कारकों को ध्यान में रखते हुए इस सीमा में संभवत: समय-समय पर संशोधन की जरूरत है। इसका मतलब है कि जमा बीमाकर्ता को अतिरिक्त वित्तपोषण को लेकर सचेत रहना होगा और इसे पूरा करने के लिए उपयुक्त विकल्पों पर काम करने की जरूरत है।’’
वित्तपोषण और जोखिम आधारित प्रीमियम (आरबीपी) के बारे में डिप्टी गवर्नर ने कहा कि देश में वैश्विक परिचालन वाले वाणिज्यिक बैंकों से लेकर सहकारी बैंक तक हैं। कुछ बैंक एकल शाखा मॉडल के साथ काम करते हैं। बैंक क्षेत्र में इस प्रकार की विविधता को देखते हुए आंकड़ों की जरूरतों को पूरा करना एक चुनौती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह भी गौर करने की जरूरत है कि बैंक उत्पादों के पेशकश में अधिक नवोन्मेष के साथ नये जोखिम भी हैं, जो जमा वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में जमा के लिए उच्च बीमा कवरेज की मांग, जोखिम आधारित प्रीमियम जमा बीमाकर्ता के लिए अपने वित्त की स्थिति की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए एक बेहतर विकल्प होगा।’’
राव ने कहा, ‘‘इसीलिए जोखिम-आधारित जमा बीमा कवर अपनाने के विकल्प पर सावधानीपूर्वक गौर करना महत्वपूर्ण है।’’
भाषा रमण