मप्र में एनसीएल में रिश्वतखोरी का भंडाफोड़, सीबीआई ने अपने डीएसपी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया
सुभाष माधव
- 19 Aug 2024, 07:01 PM
- Updated: 07:01 PM
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मध्यप्रदेश के सिंगरौली में ‘नॉदर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड’ (एनसीएल) में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले में अपने ही पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार किये गए लोगों में एनसीएल के दो अधिकारी भी शामिल हैं।
एनसीएल, कोयला मंत्रालय के अधीन एक 'मिनी रत्न' कंपनी है।
संघीय जांच एजेंसी ने इस मामले के संबंध में 17 अगस्त को उत्तर प्रदेश के नोएडा के अलावा सिंगरौली और जबलपुर में तलाशी ली थी।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मिनी रत्न कंपनी के विभिन्न अधिकारियों के परिसर की तलाशी ली गई, जिनमें एनसीएल के मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के निजी सचिव और प्रबंधक (सचिवालय) सूबेदार ओझा, एनसीएल के पूर्व सीएमडी भोला सिंह और इसके वर्तमान मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं।
सूत्रों ने बताया कि पांच लोगों को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है।
जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें जबलपुर में सीबीआई की भ्रष्टाचार रोधी शाखा में तैनात पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) जॉय जोसेफ दामले, एनसीएल के मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) के निजी सचिव सूबेदार ओझा, कंपनी के मुख्य प्रबंधक (प्रशासन) लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) बसंत कुमार सिंह, सिंगरौली स्थित संगम इंजीनियरिंग के निदेशक और कथित बिचौलिए रविशंकर सिंह और उनके सहयोगी दिवेश सिंह के नाम शामिल हैं।
सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने उन्हें सोमवार को जबलपुर में एक विशेष अदालत में पेश किया, जिसने उन्हें 24 अगस्त सीबीआई की हिरासत में भेज दिया।
सीबीआई के एक प्रवक्ता ने कहा कि ओझा के आवास से 3.85 करोड़ रुपये नकद बरामद किये गए थे।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘यह राशि कथित तौर पर कई ठेकेदारों और अधिकारियों से सिंगरौली स्थित एनसीएल में उनके संचालन में लाभ दिलाने के एवज में ली गई थी।’’
उन्होंने कहा कि रविशंकर सिंह विभिन्न ठेकेदारों, व्यापारियों और एनसीएल के कई अधिकारियों के बीच कथित तौर पर एक ‘मध्यस्थ’ के रूप में ‘रिश्वत’ के लेन-देन में सहयोग कर रहे थे।
सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि दिवेश सिंह को उनके खिलाफ लंबित शिकायतों और जांच के मामलों में अनुकूल रिपोर्ट प्राप्त करने और जांच एजेंसी द्वारा की जा रही जांच के बदले दामले को पांच लाख रुपये की रिश्वत देते समय रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था।
आरोप है कि 16 अगस्त को रविशंकर सिंह के निर्देश पर उनके कर्मचारी अजय वर्मा ने लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) बसंत कुमार सिंह से पांच लाख रुपये लिए थे।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘रिश्वत की रकम कथित तौर पर सूबेदार ओझा ने भेजी थी। 17 अगस्त को, रविशंकर सिंह ने दिवेश सिंह को यह रकम डीएसपी दामले तक पहुंचाने का निर्देश दिया था।’’
सीबीआई ने तलाशी के दौरान डिजिटल उपकरण और संदिग्ध दस्तावेज भी जब्त किए थे।
भाषा सुभाष