मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एनएमसी कार्यबल ने योग सत्रों के आयोजन की सिफारिश की
मनीषा पारुल
- 19 Aug 2024, 02:30 PM
- Updated: 02:30 PM
नई दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के कार्य बल ने सिफारिश की है कि मेडिकल कॉलेज योग की नियमित कक्षाएं और सेमिनार आयोजित कर छात्रों को इससे जोड़ें और उनके तनाव को कम करने, मानसिक बीमारी को रोकने और संयम विकसित करने के लिए इसे पाठ्यक्रम में भी शामिल करें।
एनएमसी कार्य बल ने यह भी सिफारिश की कि कॉलेज एक खेल समिति की देखरेख में विविध खेल गतिविधियों का आयोजन करें, ताकि शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
कार्य बल की हाल ही में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा, सामाजिक अलगाव को कम करने और मेडिकल छात्रों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए, मेडिकल कॉलेज में विविध सामाजिक समूहों की स्थापना का समर्थन करने वाली नीति को लागू करना महत्वपूर्ण है।
मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के कार्य बल ने हाल ही में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि सामाजिक अलगाव को कम करने और मेडिकल कॉलेज में विविध सामाजिक समूहों और गतिविधियों के जरिये छात्रों के कल्याण के उद्देश्य से सामाजिक संस्कृति कैंपस परिषद की स्थापना की जा सकती है।
कार्य बल ने सिफारिश की कि वरिष्ठ संकाय और छात्र प्रतिनिधियों की अध्यक्षता में, यह विभिन्न सांस्कृतिक, मनोरंजक और त्योहार कार्यक्रमों के लिए संसाधन आवंटित करेगा। कार्य बल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, मानसिक समस्या को रोकने और मेडिकल छात्रों के बीच लचीलापन विकसित करने के लिए योग को एक प्रभावी अभ्यास के रूप में तेजी से मान्यता मिल रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमित योग अभ्यास तनाव और चिंता को कम करता है, एंडॉर्फिन हार्मोन के उत्पादन के माध्यम से मनोदशा को बेहतर बनाता है, और छात्रों की वर्तमान में केंद्रित रहने तथा एकाग्रता बनाए रखने में मदद करता है।
कार्य बल ने कहा, ‘‘योग मानसिक समस्या के शुरुआती लक्षणों को दूर करके छात्रों को चिकित्सा शिक्षा के दबावों का सामना करने के लिए तैयार करता है। यह मानसिक समस्याओं को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।’’
रिपोर्ट के अनुसार ‘‘मेडिकल कॉलेज नियमित कक्षाएं, कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित करके, पाठ्यक्रम में योग को शामिल करके, स्व-अभ्यास के लिए संसाधन प्रदान करके और एक सहायक वातावरण बनाकर छात्रों के जीवन में योग को एकीकृत कर सकते हैं।’’
भाषा
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